पटना

Bihar: पिंडदान से पूर्व फल्गु नदी में स्नान क्यों फायदेमंद

Gaya: वैज्ञानिकों का एक दल इस बात के शोध करने पहुंचा है कि फल्गू नदी अपने में कौन कौन सी विशेषताओं को समेटे हुए है। इसके साथ यह भी प्रकट हो जाएगा कि आखिर किन वैज्ञानिक खूबियों के चलते गया में पिंडदान से पूर्व फल्गु स्नान ज़रूरी है।

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Sep 26, 2019
पिंडदान से पूर्व फल्गु नदी में स्नान क्यों फायदेमंद

गया. पिंडदान से पूर्व फल्गु नदी में आखिर क्यों स्नान करना पवित्र माना जाता है। आखिर इसमें ऐसी क्या खासियत है कि इसमें नहाने के बाद आदमी पवित्र माना जाता है। पिंडदान से पूर्व इसमें स्नान क्यों जरूरी है इन तमाम तथ्यों की जानकारी के लिए वैज्ञानिक शोध करेंगे।
वैज्ञानिकों का एक दल इस बात के शोध करने पहुंचा है कि फल्गू नदी अपने में कौन कौन सी विशेषताओं को समेटे हुए है। इसके साथ यह भी प्रकट हो जाएगा कि आखिर किन वैज्ञानिक खूबियों के चलते गया में पिंडदान से पूर्व फल्गु स्नान ज़रूरी है।
शोध के लिए बनारस से वैज्ञानिकों का एक दल यहां पहुंचा है। यह दल इसकी विशेष गुणों की पड़ताल कर उस पर शोध कर रहा है। दल के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ वाचस्पति त्रिपाठी ने बताया कि फल्गु अंतःसलिला कही जाती है। इस नदी के रेत के नीचे पानी रहता है। कहते हैं,यह सीता के श्राप के असर से है। लेकिन इसका भी वैज्ञानिक पक्ष खोजने का विषय है।
डॉ त्रिपाठी ने कहा कि यह नदी झारखंड ,उड़ीसा समेत ऐसे इलाकों से गुजरती हुई निकलती है जहां पहाड़ों और वन संपदाओं की प्रचूर मात्रा है। इन क्षेत्रों से गुजरते हुए नदी का पानी अनेक रहस्यमय जड़ी बूटियों के संसर्ग में आकर औषधीय गुणों से सरोबार हो जाती होगी। इसी खासीयत का पता लगाना है।
उन्होंने बताया कि नदियों में स्नान की सनातनी परंपरा भी वैज्ञानिकता से लैस है। हाल में यह शोध सामने आया है कि कुंभ स्नान से सुपरबर्ग वैक्टीरिया का विनाश होता है। यानी स्नान से यह शरीर का टीकाकरण हो जाता है। ऐसी विशेषताओं से नदियां भरी पड़ी हैं। इन पर शोध की आवश्यकता है।

Published on:
26 Sept 2019 05:26 pm
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