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Doomscrolling से बिगड़ रहा हमारा मानसिक स्वास्थ्य, कैसे करें पहचान और सुधार एक्सपर्ट्स से जानें

क्या आप भी घंटों स्मार्टफोन पर बुरी खबरें स्क्रॉल करते रहते हैं? इसे 'डूमस्क्रॉलिंग' कहते हैं, जो अनजाने में आपकी मानसिक शांति और सेहत को छीन रही है। क्या है इस डिजिटल लत का मनोविज्ञान? इस लत का क्या पड़ता है बुरा प्रभाव? क्या होता है डिजिट डिटॉक्स? इन सवालों का वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. सुनील शर्मा दे रहे हैं जवाब।

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भारत

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Chitra Badoliya

Apr 16, 2026

क्या आप भी घंटों स्मार्टफोन पर बुरी खबरें स्क्रॉल करते रहते हैं? इसे 'डूमस्क्रॉलिंग' कहते हैं, जो अनजाने में आपकी मानसिक शांति और सेहत को छीन रही है। जानिए इस डिजिटल लत के पीछे का मनोविज्ञान, शरीर पर इसके गंभीर प्रभाव और एक्सपर्ट डॉ. सुनील शर्मा के बताए 'डिजिटल डिटॉक्स' के आसान तरीके, जिनसे आप अपनी जिंदगी को फिर से खुशनुमा बना सकते हैं।

Doomscrolling : आज के दौर में जब हम सुबह आंखें खोलते हैं, तो सबसे पहले हमारा हाथ स्मार्टफोन की ओर बढ़ता है। हम सोशल मीडिया ऐप्स खोलते हैं और स्क्रॉल करना शुरू करते हैं। अचानक हमें एक बुरी खबर दिखती है कहीं कोई युद्ध हो रहा है, कहीं प्राकृतिक आपदा आई है, या कहीं कोई बड़ी आर्थिक मंदी की आहट है। हम रुकते नहीं हैं, बल्कि और नीचे स्क्रॉल करते हैं। इस व्यवहार को मनोवैज्ञानिकों ने एक नाम दिया है डूमस्क्रॉलिंग' (Doomscrolling)। आइए जानते है डूमस्क्रॉलिंग कैसे हमारी जिंदगी पर असर डालता हैं।

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