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रोजगार की कमी या अवसर? भारत में नौकरी की स्थिति पर एक नजर!

Jobs Report: सरकारी आंकड़ों में बेरोजगारी दर में मामूली गिरावट और नियमित नौकरियों में बढ़ोतरी के संकेत मिले हैं। जानिए जुलाई 2026 के PLFS आंकड़े रोजगार बाजार की असली तस्वीर क्या बताते हैं।
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भारत

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MI Zahir

Aug 26, 2026

Employment Trends India News

PLFS और अन्य सरकारी आंकड़ों के अनुसार रोजगार बाजार में धीमी लेकिन सकारात्मक बदलाव के संकेत दिख रहे हैं। (फोटो: AI)

भारत में रोजगार की वर्तमान स्थिति'चाहे वह स्थिरता हो या मामूली सुधार'वास्तव में कितने मायने रखती है? हाल ही में जारी सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि रोजगार की वृद्धि धीमी अवश्य है, लेकिन कुछ सकारात्मक संकेत भी हैं। आइए, इस स्थिति को विस्तार से समझते हैं।

श्रम बाजार की मौजूदा स्थिति

अप्रैल–जून 2026 की तिमाही में कुल श्रम भागीदारी दर (LFPR) 54.6% रही, जो पिछली तिमाही के 55.5% से थोड़ी गिरावट दर्शाती है। वहीं, शहरी LFPR 50.2% पर स्थिर रही। पुरुषों की शहरी LFPR में मामूली बढ़ोतरी हुई—75.0% से बढ़कर 75.3% हो गई।

शहरी बेरोजगारी दर (UR) 6.7% पर बनी रही, जबकि ग्रामीण UR में हल्का इजाफा हुआ—4.3% से बढ़कर 4.8% हो गई।

नियमित वेतनभोगी रोजगार दोनों क्षेत्रों में बढ़ा-ग्रामीण में 15.5% से 16.1% और शहरी में 48.9% से 49.3% तक।

क्षेत्रीय बदलाव भी देखने को मिले। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि का रोजगार हिस्सा घटकर 52.9% रह गया, जबकि द्वितीयक क्षेत्र 22.6% से बढ़ कर 24.4% और तृतीयक क्षेत्र 21.7% से बढ़कर 22.7% हो गया। शहरी क्षेत्रों में द्वितीयक क्षेत्र का हिस्सा बढ़कर 31.9% हो गया, जबकि कृषि घटकर 6.1% पर आ गई।

महीने-दर-महीना स्थिरता

जून 2026 के मासिक PLFS बुलेटिन में LFPR 54.4%, WPR 51.4% और UR 5.5% दर्ज किया गया। महिला LFPR 32.7% रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 0.7 प्रतिशत अंक अधिक है।

जुलाई 2026 में बेरोजगारी दर 5.1% पर आ गई, जो जून के 5.5% से कम है। इसी दौरान श्रम भागीदारी दर (LFPR) 54.4% से बढ़कर 55.4% हो गई। ग्रामीण UR में उल्लेखनीय सुधार हुआ और यह 5.0% से घटकर 4.5% रह गई, जबकि शहरी बेरोजगारी दर 6.6% से बढ़ कर 6.7% रही।

नौकरी की गुणवत्ता और मांग

नौकरी की गुणवत्ता में सुधार का संकेत नियमित वेतनभोगी रोजगार में बढ़ोतरी से मिलता है। इसके अलावा, Naukri Jobspeak इंडेक्स के अनुसार अप्रैल 2026 में गैर-आईटी क्षेत्रों जैसे बीमा (21%), BPO/ITES (15%), रियल एस्टेट (12%) और हेल्थकेयर (11%) में भर्ती बढ़ी। AI/ML भूमिकाओं में 32% की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

ManpowerGroup की रिपोर्ट के अनुसार जुलाई–सितंबर 2026 के लिए भारत का नेट रोजगार आउटलुक 48% है। यह अप्रैल–जून की 68% से कम है, लेकिन फिर भी अमेरिका, ब्रिटेन और चीन से बेहतर है।

सरकारी पहल और दीर्घकालिक रुझान

Q2 FY26 (जुलाई–सितंबर 2025) में कुल रोजगार 56.2 करोड़ था, जो Q1 की तुलना में लगभग 8.7 लाख अधिक था।

संगठित क्षेत्र में FY24 के दौरान रोजगार में 6% की वृद्धि हुई, जिससे FY23 की तुलना में 10 लाख से अधिक नौकरियां जुड़ीं।

Economic Survey 2025–26 के अनुसार महिला श्रम भागीदारी दर 2017–18 में 23.3% से बढ़कर 2023–24 में 41.7% हो गई, जबकि बेरोजगारी दर 5.6% से घटकर 3.2% रह गई। गिग वर्कर्स की संख्या भी तेजी से बढ़ी और FY21 से FY25 के बीच इसमें 55% की वृद्धि दर्ज की गई।

वैश्विक संदर्भ और अर्थव्यवस्था की ताकत

विश्व बैंक ने FY2025–26 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का 7.6% का अनुमान जताया है, जो FY25 के 7.1% से बेहतर है। रिपोर्ट के अनुसार रोजगार दर स्थिर रही और औपचारिक रोजगार सृजन मजबूत बना रहा।

भारत का Net Employment Outlook (जुलाई–सितंबर 2026) 48% है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे ऊंचे स्तरों में शामिल है।

क्या रोजगार वृद्धि वास्तव में उल्लेखनीय है?

संख्याएं बताती हैं कि रोजगार वृद्धि धीमी अवश्य है, लेकिन पूरी तरह रुकी नहीं है। बेरोजगारी दर में मामूली गिरावट, नियमित वेतनभोगी रोजगार में बढ़ोतरी, महिला भागीदारी में सुधार और AI/ML जैसे उभरते क्षेत्रों में भर्ती की तेजी सकारात्मक संकेत हैं।

हालांकि, LFPR में उतार-चढ़ाव और ग्रामीण-शहरी तथा पुरुष-महिला असंतुलन जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।

अब आगे क्या हो सकता है?

सरकार को महिला श्रम भागीदारी बढ़ाने, ग्रामीण रोजगार के अवसर मजबूत करने तथा कौशल विकास और गिग व डिजिटल रोजगार को बढ़ावा देने पर अधिक ध्यान देना होगा। AI/ML, हेल्थकेयर और ग्रीन सेक्टर जैसे भविष्योन्मुख क्षेत्रों में निवेश रोजगार की गुणवत्ता और संख्या दोनों बढ़ा सकता है।

श्रम भागीदारी और क्षेत्रीय असंतुलन जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद

बहरहाल, रोजगार वृद्धि पूरी तरह रुकी नहीं है, लेकिन इसे बहुत तेज भी नहीं कहा जा सकता। स्थिरता और मामूली सुधार के संकेत जरूर हैं, जबकि श्रम भागीदारी और क्षेत्रीय असंतुलन जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। यदि महिला भागीदारी, कौशल विकास और नए रोजगार क्षेत्रों पर लगातार निवेश बढ़ता है, तो यह धीमी लेकिन सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का संकेत हो सकता है।