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Google पर कस्टमर केयर नंबर सर्च करते हैं? खाली हो सकता है बैंक खाता, इन 5 तरीकों से खुद को रखें सेफ

गूगल पर कस्टमर केयर नंबर सर्च करना पड़ सकता है भारी! जानें साइबर ठगों के फेक हेल्पलाइन जाल से बचने और बैंक खाता सुरक्षित रखने के 5 आसान टिप्स।
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भारत

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Chitra Badoliya

Aug 25, 2026

Google

Customer Care Scam से कैसे बचें (AI)

डिजिटल दौर में जब भी हमें किसी बैंक, ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल, कूरियर सर्विस या गैस एजेंसी से जुड़ी कोई समस्या पैदा होती है, तो हम सबसे पहले गूगल सर्च करना और "कस्टमर केयर नंबर" टाइप करना शुरू कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी जल्दबाजी आपका बैंक खाता खाली करवा सकती है?

साइबर अपराधियों ने अब लोगों को फंसाने के लिए गूगल सर्च इंजन को अपना प्रमुख हथियार बना लिया है। भ्रामक सर्च रिजल्ट्स, फर्जी विज्ञापनों और सर्च इंजन मैनिपुलेशन के जरिए हैकर्स असली हेल्पलाइन की जगह अपने नंबर प्रमोट कर देते हैं। इस लेख में विस्तार से समझते हैं कि यह पूरा खेल कैसे काम करता है और खुद को सुरक्षित रखने के सबसे पुख्ता तरीके क्या हैं।

गूगल सर्च पर नकली कस्टमर केयर नंबरों का जाल कैसे काम करता है?

साइबर फ्रॉड के इस तरीके को समझने के लिए अपराधियों के काम करने के तरीके (Modus Operandi) को जानना जरूरी है।

  • सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO) का दुरुपयोग: अपराधी लोकप्रिय ब्रांड्स के नाम से फर्जी वेबसाइट्स और ब्लॉग्स बनाते हैं। वे ऐसे कीवर्ड्स का इस्तेमाल करते हैं जिससे उनकी फर्जी साइट गूगल सर्च के पहले पेज पर आ जाए।
  • गूगल मैप्स और 'Suggest an Edit' फीचर का गलत इस्तेमाल: गूगल बिजनेस प्रोफाइल पर कई बार स्थानीय शाखाओं या सेवा केंद्रों की लिस्टिंग होती है। स्कैमर्स "Suggest an edit" टूल का इस्तेमाल करके असली नंबर की जगह अपना नंबर दर्ज कर देते हैं।
  • गूगल एड्स (Google Ads) के प्रायोजित लिंक: कई बार सर्च रिजल्ट्स में सबसे ऊपर "Sponsored" या "Ad" टैग के साथ कुछ लिंक्स दिखते हैं। स्कैमर्स पैसे देकर अपने फर्जी हेल्पलाइन नंबर को शीर्ष पर दिखा देते हैं।
  • AI ओवरव्यू की खामियों का लाभ: सर्च इंजन के एआई स्निपेट्स अक्सर इंटरनेट पर मौजूद अत्यधिक दोहराए गए डेटा को सच मान लेते हैं। अपराधी कई मंचों पर एक ही फर्जी नंबर डालकर एआई को भ्रमित कर देते हैं।

फ्रॉड से बचने के 5 सबसे असरदार टिप्स

सर्च इंजन रिजल्ट्स के बजाय आधिकारिक ऐप या पोर्टल का रुख करें

  • गूगल के सामान्य सर्च बॉक्स में दिखने वाले किसी भी अनवेरिफाइड नंबर पर सीधे कॉल न करें।
  • संबंधित कंपनी के आधिकारिक मोबाइल ऐप्लिकेशन में जाएं। वहां 'Help', 'Support' या 'Contact Us' सेक्शन में दर्ज नंबर ही इस्तेमाल करें।
  • यदि वेबसाइट खोल रहे हैं, तो URL की स्पेलिंग और 'https://' के साथ लॉक (पैडलॉक) आइकन की जांच करें। फर्जी वेबसाइट्स अक्सर असली नाम में मामूली स्पेलिंग बदलाव (जैसे 'paymt' की जगह 'paymtt') करके बनाई जाती हैं। बैंक कार्ड, पासबुक और मासिक बिल पर छपे नंबरों पर ही भरोसा करें ।
  • बैंकिंग या वित्तीय सेवाओं के मामले में गूगल सर्च करने की बिल्कुल जरूरत नहीं होती।
  • आपके डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड के पीछे हमेशा एक 24x7 टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर छपा होता है।
  • बैंक पासबुक, अकाउंट स्टेटमेंट, बिजली-पानी के बिल या एलपीजी रसीद पर कंपनी का आधिकारिक ग्राहक सेवा नंबर दर्ज होता है। यह नंबर पूरी तरह सुरक्षित और प्रमाणित होता है।

'प्रायोजित लिंक' (Sponsored Ads) और AI सजेशन की दोबारा जांच करें

  • सर्च करते समय सबसे ऊपर दिखने वाले विज्ञापनों पर आंख मूंदकर भरोसा न करें।
  • यदि किसी सर्च रिजल्ट के आगे 'Sponsored' लिखा है, तो इसका मतलब है कि किसी ने उस लिंक को ऊपर लाने के लिए भुगतान किया है।
  • सर्च इंजन द्वारा दिए जाने वाले क्विक सारांश (AI Overview) में दिए गए नंबर पर तुरंत डायल करने के बजाय कंपनी की मुख्य वेबसाइट के भीतर जाकर पुष्टि करें।

कॉल के दौरान इन खतरे के संकेतों को पहचानें

यदि आपने गलती से किसी नंबर पर कॉल मिला भी दिया है, तो बातचीत के दौरान इन बातों से सतर्क हो जाएं।

  • रिमोट एक्सेस ऐप्स: अगर कॉलर आपको AnyDesk, TeamViewer, RustDesk या QuickSupport जैसा कोई ऐप डाउनलोड करने को कहे, तो कॉल तुरंत काट दें। ये ऐप आपके फोन की स्क्रीन का पूरा कंट्रोल हैकर को दे देते हैं।
  • सत्यापन शुल्क (Verification Fee): कोई भी असली कस्टमर केयर आपकी समस्या हल करने के लिए ₹1, ₹5 या ₹10 का यूपीआई ट्रांसफर करने को नहीं कहता।
  • ओटीपी, पिन और पासवर्ड की मांग: बैंक या कोई भी प्रतिष्ठित कंपनी कभी भी फोन पर आपसे OTP, UPI PIN या कार्ड का CVV नहीं मांगती।

तत्काल रिपोर्टिंग और नेशनल साइबर हेल्पलाइन (1930) का उपयोग

धोखाधड़ी की आशंका होते ही समय गंवाए बिना कदम उठाएं:

  • यदि किसी संदिग्ध नंबर से बात हुई है या अनजाने में कोई ट्रांजैक्शन हो गया है, तो बिना देरी किए 1930 पर कॉल करें। यह गृह मंत्रालय की साइबर हेल्पलाइन है जो 'गोल्डन ऑवर' में आपके पैसे ब्लॉक करवाने में मदद करती है।
  • पूरे विवरण के साथ राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें।
  • अपने बैंक को तुरंत सूचित करके संबंधित कार्ड, नेट बैंकिंग या यूपीआई आईडी को ब्लॉक करवाएं।

जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है

साइबर अपराधों की तकनीकें लगातार बदल रही हैं, लेकिन उनका मूल आधार मानवीय जल्दबाजी और अनभिज्ञता का फायदा उठाना होता है। समस्या के समय घबराने के बजाय शांत रहकर केवल आधिकारिक माध्यमों से ही संपर्क स्थापित करें। अपनी संवेदनशील वित्तीय जानकारियां कभी किसी के साथ साझा न करें और परिवार के बुजुर्गों व युवाओं को भी इन तौर-तरीकों के प्रति जागरूक रखें।