
Indian MSMEs Global Economy : भारतीय MSME के लिए आगे बढ़ने के क्या हैं रास्ते, PC- Chatgpt
वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेजी से हो रहे बदलाव भारतीय MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) क्षेत्र के लिए नए अवसरों और चुनौतियों दोनों को लेकर आए हैं। डिजिटल तकनीक, वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं में बदलाव और निर्यात के बढ़ते अवसर जहां विकास की नई संभावनाएं खोल रहे हैं, वहीं भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा लागत और उत्पादकता संबंधी चुनौतियां भी सामने हैं। ऐसे में यह समझना महत्वपूर्ण है कि भारतीय MSME वैश्विक परिवर्तनों का लाभ कैसे उठा सकते हैं और किन जोखिमों के लिए उन्हें तैयार रहना होगा।
भारत सरकार ने अप्रैल 2025 से MSME की परिभाषा को निवेश और वार्षिक कारोबार के आधार पर संशोधित किया। इसका उद्देश्य उद्यमों को विस्तार की अधिक गुंजाइश देना और उन्हें सरकारी सहायता एवं नीतिगत लाभों से जुड़े रहने में मदद करना है।
Udyam Registration और Udyam Assist Platform पर जून 2026 तक 8.7 करोड़ से अधिक पंजीकरण दर्ज किए जा चुके हैं। इससे बड़ी संख्या में उद्यमों को औपचारिक वित्त, तकनीक और बाजार तक पहुंच का अवसर मिला है।
MSME को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार ने Export Promotion Mission (EPM) के तहत कई पहलें शुरू की हैं। इनमें Export Factoring, ई-कॉमर्स क्रेडिट और क्रेडिट गारंटी जैसे साधन शामिल हैं।
इन उपायों का उद्देश्य MSME को नए और अपेक्षाकृत जोखिमपूर्ण विदेशी बाजारों में प्रवेश करने, वित्त जुटाने और निर्यात गतिविधियों का विस्तार करने में सहायता प्रदान करना है।
पश्चिम एशिया सहित विभिन्न क्षेत्रों में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर MSME क्षेत्र पर भी दिखाई दे रहा है। Crisil के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में MSME की राजस्व वृद्धि 7.5–8.5 प्रतिशत के दायरे में रह सकती है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 100 आधार अंक कम है। EBITDA मार्जिन भी घटकर 5–5.5 प्रतिशत तक आने की संभावना जताई गई है।
मोरबी, फिरोजाबाद और वडोदरा जैसे औद्योगिक क्लस्टर विशेष रूप से प्रभावित हुए हैं, जहां ऊर्जा लागत और कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि ने उत्पादन लागत बढ़ाई है और लाभप्रदता पर दबाव डाला है।
डिजिटल तकनीक और वैश्विक ऑनलाइन व्यापार मंच MSME के लिए नए बाजारों के द्वार खोल रहे हैं। 2020–21 से 2024–25 के बीच निर्यात में भाग लेने वाले MSME की संख्या 52,849 से बढ़कर 1,73,350 हो गई, जो 200 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को दर्शाती है।
क्लाउड-आधारित समाधान, AI-सहायता प्राप्त उपकरण, डेटा विश्लेषण और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म छोटे उद्यमों को वैश्विक मांग समझने, इन्वेंटरी प्रबंधन बेहतर करने और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुंचने में मदद कर रहे हैं।
CII MSME RISE Summit में MSME सचिव भरत खेरा ने MSME क्षेत्र को अधिक उत्पादक, नवाचारी, तकनीक-संचालित और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
ONDC, आधार और UPI जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म व्यापार करने की लागत और प्रक्रियागत बाधाओं को कम कर रहे हैं, जिससे छोटे उद्यमों की डिजिटल अर्थव्यवस्था में भागीदारी आसान हो रही है।
MSME Collab पहल के माध्यम से भारतीय MSME को विदेशों में बसे भारतीयों, उद्योग संगठनों और निवेशकों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे नवाचार, निवेश और व्यापारिक साझेदारी के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
वस्त्र क्षेत्र इसका एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। वर्ष 2023–24 में भारत का वस्त्र निर्यात लगभग 34.4 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिससे देश वैश्विक वस्त्र निर्यातकों में प्रमुख स्थान बनाए हुए है।
भारतीय MSME की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक उत्पादकता का अपेक्षाकृत निम्न स्तर है। Deloitte की एक रिपोर्ट के अनुसार, MSME की उत्पादकता बड़ी कंपनियों की तुलना में लगभग 18 प्रतिशत है, जबकि कई OECD देशों में यह अनुपात 45–70 प्रतिशत के बीच देखा जाता है।
वित्तीय पहुंच की सीमाएं, तकनीकी अपनाने की धीमी गति और अवसंरचना संबंधी बाधाएं इस अंतर के प्रमुख कारण मानी जाती हैं।
OECD ने भारत को श्रम-गहन विनिर्माण और निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर देने की सलाह दी है। वहीं IMF ने भी वैश्विक निवेश प्रवाह में नीति स्थिरता, भरोसे और अनुकूल कारोबारी माहौल की बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया है।
ऐसे माहौल में भारत के लिए MSME क्षेत्र को मजबूत बनाना न केवल घरेलू विकास बल्कि वैश्विक निवेश आकर्षित करने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
MSME Outlook Survey (जनवरी–मार्च 2026) के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद MSME क्षेत्र का कारोबारी विश्वास विस्तार के स्तर से ऊपर बना हुआ है। हालांकि बिक्री वृद्धि दर्ज करने वाले उद्यमों का अनुपात 51 प्रतिशत से घटकर 34 प्रतिशत रह गया, लेकिन सेवा क्षेत्र में यह 46 प्रतिशत पर स्थिर बना रहा।
भारतीय MSME के लिए आगे बढ़ने के प्रमुख रास्ते स्पष्ट हैं—
भारतीय MSME क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। एक ओर वैश्विक बाजार, डिजिटल प्लेटफॉर्म और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के रूप में बड़े अवसर मौजूद हैं, तो दूसरी ओर भू-राजनीतिक तनाव, लागत दबाव और उत्पादकता संबंधी चुनौतियां भी हैं।
यदि MSME डिजिटल परिवर्तन को अपनाते हैं, तकनीकी क्षमता बढ़ाते हैं और उपलब्ध नीतिगत समर्थन का प्रभावी उपयोग करते हैं, तो वे न केवल भारत की आर्थिक वृद्धि को गति दे सकते हैं बल्कि वैश्विक व्यापार में भी अपनी हिस्सेदारी मजबूत कर सकते हैं। आने वाले वर्षों में यही संतुलित रणनीति MSME क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी, टिकाऊ और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली बना सकती है।
Updated on:
28 Aug 2026 08:37 am
Published on:
28 Aug 2026 08:37 am
