
थाली में जोड़ें यह देसी अनाज (AI)
आधुनिक जीवनशैली में बच्चों का खान-पान प्रोसेस्ड फूड, रिफाइंड फ्लोर (मैदा) और अत्यधिक चीनी की तरफ तेजी से झुका है। इसके परिणामस्वरूप बच्चों में कम उम्र में ही पोषण संबंधी कमियां, मोटापा, एनीमिया और पाचन तंत्र से जुड़ी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में पारंपरिक मोटे अनाज यानी 'मिलेट्स' एक मजबूत समाधान बनकर उभरे हैं। बाजरा, रागी, ज्वार, कोदो, कुटकी और कंगनी जैसे श्रीअन्न केवल पारंपरिक खान-पान का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध पोषण के पावरहाउस हैं। बच्चों की नियमित थाली में मिलेट्स को शामिल करके उनके शारीरिक विकास, हड्डियों की मजबूती, रोग प्रतिरोधक क्षमता और मानसिक एकाग्रता में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।
मिलेट्स बच्चों के समग्र विकास को गति देने में कैसे मदद करते हैं, इसे कई वैज्ञानिक अध्ययनों और मेटा-एनालिसिस द्वारा प्रमाणित किया जा चुका है:
शारीरिक वृद्धि में तीव्र सुधार: एक व्यापक सिस्टेमैटिक रिव्यू और मेटा-एनालिसिस के अनुसार, जब नियमित आहार में सामान्य पॉलिश किए गए चावल की जगह मिलेट्स शामिल किए गए, तो बच्चों के शारीरिक विकास में गुणात्मक परिवर्तन देखा गया। अध्ययन के अनुसार:
एनीमिया और कुपोषण पर प्रहार: तेलंगाना के आदिवासी क्षेत्रों में किए गए एक वर्षीय क्लिनिकल हस्तक्षेप में बच्चों को मिलेट्स, दाल और मूंगफली आधारित फॉर्मूलेशन दिया गया। इस अध्ययन के परिणाम अत्यंत उत्साहजनक रहे:
बाजार में उपलब्ध तैयार मिलेट स्नैक्स, कुकीज और सीरियल्स को खरीदते समय सतर्कता बरतनी चाहिए:
एम्स (AIIMS) बिबिनगर के एक अध्ययन में पाया गया कि बाजार में मिलने वाले कई पैकेज्ड मिलेट उत्पादों में वास्तविक पोषक तत्व (विशेषकर कैल्शियम) कम होते हैं तथा उनमें प्रिजर्वेटिव्स, अतिरिक्त चीनी और सोडियम मिलाया जाता है।
पैकेजिंग पर अक्सर उम्र-उपयुक्त पोषण और संभावित एलर्जन की पूरी जानकारी नहीं होती। इसलिए, बच्चों के लिए घर पर ताजी सामग्री के साथ पारंपरिक और नए मिलेट व्यंजन तैयार करना सबसे सुरक्षित और अधिक पौष्टिक विकल्प है।
बच्चों के खान-पान में बदलाव हमेशा सहज और चरणबद्ध होना चाहिए:
मिलेट्स बच्चों के पोषण संबंधी अंतर को पाटने का एक अत्यंत किफायती, प्राकृतिक और प्रभावी जरिया हैं। स्वाद और नवाचार के मेल से इन्हें बच्चों की दैनिक दिनचर्या का सहज हिस्सा बनाया जा सकता है।
(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और पोषण संबंधी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी बच्चे को विशेष एलर्जी, पाचन विकार या गंभीर स्वास्थ्य स्थिति होने पर आहार में बड़ा बदलाव करने से पहले पीडियाट्रिशियन अथवा प्रमाणित क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट से परामर्श अवश्य लें।)
Updated on:
20 Aug 2026 06:07 pm
Published on:
20 Aug 2026 06:07 pm
