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छुट्टियों में भीड़ से दूर, मध्यप्रदेश की ये अनदेखी जगहें आपको दिलाएंगी असीम सुकून

मध्यप्रदेश के इन 10 ऑफबीट ठिकानों को बहुत कम लोग जानते हैं! भीड़ से दूर एक शांत और यादगार सफर के लिए पढ़ें पूरी ट्रेवल गाइड।
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भारत

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Chitra Badoliya

Aug 18, 2026

Madhya pradesh

MP का यह अनदेखा रूप देखा क्या? (AI)

भागदौड़ भरी जिंदगी, ट्रैफिक का शोर और काम की लगातार व्यस्तता के बीच हर किसी का मन एक ऐसे ठहराव की तलाश में होता है, जहां केवल प्रकृति का संगीत और असीम शांति हो। जब भी छुट्टियों की योजना बनती है, अक्सर लोग जाने-पहचाने पर्यटन स्थलों की ओर रुख करते हैं, जहां अंततः उन्हें वही भीड़ और भागमभाग मिलती है जिससे वे बचना चाहते हैं। 'भारत का दिल' कहलाने वाला मध्यप्रदेश सिर्फ अपने प्रसिद्ध मंदिरों या बड़े राष्ट्रीय उद्यानों तक ही सीमित नहीं है। इसके आंचल में कई ऐसे अनछुए, शांत और जादुई कोने छिपे हैं, जो आम पर्यटन मार्गों से दूर एक अलौकिक अनुभव देते हैं। आइए जानते हैं मध्यप्रदेश के ऐसे ही 10 चुनिंदा और अनदेखे ठिकानों के बारे में, जहां की यात्रा आपके मन को सुकून से भर देगी।

मध्यप्रदेश के 10 शांत और अनदेखे डेस्टिनेशंस

गिन्नौरगढ़ किला (सीहोर/भोपाल): रहस्य और इतिहास की छांव

भोपाल से लगभग 60 किलोमीटर दूर रतापानी वन्यजीव अभयारण्य के घने जंगलों के बीच एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है गिन्नौरगढ़ का किला। गोंड और मुगल स्थापत्य कला का यह संगम इतिहास प्रेमियों के लिए किसी छिपे हुए खजाने से कम नहीं है। लगभग 3 किलोमीटर की सीधी और प्राकृतिक चढ़ाई पूरी करने के बाद जब आप ऊपर पहुंचते हैं, तो चट्टानों में खुदे प्राचीन जलाशय और दूर-दूर तक फैली हरियाली आपका स्वागत करती है। यहां कोई कृत्रिम शोर नहीं है, केवल परिंदों की चहचहाहट और हवा की सरसराहट है।

पातालकोट घाटी (छिंदवाड़ा): पाताल लोक का साक्षात अनुभव

छिंदवाड़ा जिले के तामिया ब्लॉक में स्थित पातालकोट प्रकृति का एक ऐसा अजूबा है, जो घोड़े की नाल के आकार में 1,200 से 1,500 फीट गहरी खाई में बसा है। बाहर से देखने पर यह केवल एक विशाल घाटी दिखती है, लेकिन इसके भीतर 'भारिया' और 'गोंड' जनजातियों के कई गांव आबाद हैं। सूर्य की किरणें यहां दिन के कुछ ही घंटों के लिए पहुंच पाती हैं। यह क्षेत्र अपनी दुर्लभ औषधीय वनस्पतियों और पारंपरिक जीवनशैली के लिए देश-दुनिया के शोधकर्ताओं के आकर्षण का केंद्र भी है।

सरदारपुर वन्यजीव अभयारण्य (धार): घास के मैदान और दुर्लभ परिंदे

धार जिले में महाराष्ट्र सीमा के पास फैला लगभग 348 वर्ग किलोमीटर का यह अभयारण्य घास के खुले मैदानों के लिए जाना जाता है। मुख्य रूप से 'खरमोर' (लेसर फ्लोरिकन) पक्षी और काले हिरणों (ब्लैकबक) के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध यह स्थल वन्यजीव फोटोग्राफरों और प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बेहद शांत आश्रय स्थल है। यहां खुले मैदानों में दौड़ते काले हिरणों को देखना एक बेहद रोमांचक और सुकून भरा अनुभव होता है।

तवा जलाशय (नर्मदापुरम): शांत जलधाराओं के बीच क्रूज की सैर

नर्मदापुरम जिले में सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान और बोरी अभयारण्य के छोर पर बना तवा डैम जल-पर्यटन के लिए बेहतरीन विकल्प है। यहां का मुख्य आकर्षण मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग का क्रूज और स्पीड बोटिंग है। शांत नीले पानी के बीच तैरता क्रूज, दूर दिखती सतपुड़ा की पहाड़ियां और ढलते सूरज की लालिमा आंखों को अनोखा सुकून देती है। जलाशय किनारे स्थित एमपीटी रिसॉर्ट में ठहरना रात को प्रकृति की सन्नाटे भरी लोरी सुनने जैसा है।

अमरकंटक (अनूपपुर): नदियों का उद्गम और आध्यात्मिक शांति

मैकाल, विंध्य और सतपुड़ा पर्वतमालाओं के मिलन बिंदु पर स्थित अमरकंटक केवल एक तीर्थ ही नहीं, बल्कि अद्भुत प्राकृतिक संपदा का केंद्र है। यह पवित्र नर्मदा और सोन नदी का उद्गम स्थल है। कपिल धारा और दूध धारा जैसे दूधिया झरने, घने साल के जंगल और शांत मंदिर परिसर यहां आने वाले हर यात्री के मन से थकान मिटा देते हैं। ऊंचाई पर होने के कारण यहां का मौसम साल भर सुहावना रहता है।

भीमबेटका शैलाश्रय (रायसेन): आदिमानव के कैनवास का दीदार

भोपाल से मात्र 45 किलोमीटर दूर स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल 'भीमबेटका' में करीब 30 हजार साल पुराने शैलचित्र मौजूद हैं। विंध्य पर्वतमाला की प्राकृतिक गुफाओं में बने ये रेखाचित्र शिकार, नृत्य, संगीत और दैनिक जीवन को दर्शाते हैं। यहां आकर खड़े होना ऐसा लगता है मानो समय का पहिया हजारों साल पीछे घूम गया हो।

मांडू (धार): पत्थरों पर लिखी प्रेम की अमर कहानी

मांडू को महलों और खंडहरों का शहर कहा जाता है, जो बाज बहादुर और रानी रूपमती की अमर प्रेम गाथा का साक्षी है। जहाज महल, हिंडोला महल, होशंगशाह का मकबरा और रूपमती मंडप जैसी इमारतें अफगान वास्तुकला की बेमिसाल मिसाल हैं। मानसून के दौरान जब मांडू के ऊपर बादल तैरते हैं और हरियाली चारों तरफ फैलती है, तो इसका सौंदर्य किसी रूमानी पेंटिंग जैसा लगता है।

पचमढ़ी (नर्मदापुरम): सतपुड़ा की हरी-भरी गोद

समुद्र तल से 1,067 मीटर की ऊंचाई पर बसा पचमढ़ी मध्यप्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन है। बी फॉल्स, जटाशंकर गुफा, डचेस फॉल्स, हांडी खोह और धूपगढ़ (मध्यप्रदेश की सबसे ऊंची चोटी) यहां के प्रमुख आकर्षण हैं। धूपगढ़ से सूर्यास्त का नजारा देखना जीवन भर याद रहने वाला अनुभव बन जाता है।

महेश्वर (खरगोन): अहिल्या नगरी के पावन घाट और रेशमी ताना-बाना

पवित्र नर्मदा नदी के शांत तट पर बसा महेश्वर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से अत्यंत समृद्ध शहर है। लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की राजधानी रहे इस शहर का अहिल्या किला और नर्मदा के विशाल घाट अपनी स्थापत्य भव्यता के लिए जाने जाते हैं। शाम के समय नर्मदा की महाआरती और स्थानीय बुनकरों द्वारा तैयार की जाने वाली विश्वप्रसिद्ध 'महेश्वरी साड़ियों' की बुनाई देखना आत्मिक शांति देता है।

गुलावट लोटस वैली (इंदौर): गुलाबी कमलों की प्राकृतिक झील

इंदौर के पास हातोद में स्थित गुलावट वैली यशवंत सागर बांध के बैकवाटर पर बनी एक प्राकृतिक कमल घाटी है। मीलों तक फैली झील में खिले गुलाबी कमल के फूल और उसके बीच से गुजरता बांस का संकरा पुल एक जादुई वातावरण तैयार करता है। यहां सुबह-सुबह नौका विहार करना और पक्षियों की चहचहाहट सुनना बेहद आनंददायक है।

गंतव्य स्थलनिकटतम प्रमुख शहर से दूरीप्रमुख आकर्षणसर्वश्रेष्ठ समय
गिन्नौरगढ़ किलाभोपाल से ~60 किमीट्रेकिंग, ऐतिहासिक अवशेष, जंगल दृश्यअगस्त से फरवरी
पातालकोट घाटीछिंदवाड़ा से ~78 किमीगहरी घाटी, औषधीय पौधे, आदिवासी संस्कृतिसितंबर से मार्च
सरदारपुर अभयारण्यइंदौर से ~135 किमी (धार)काले हिरण (ब्लैकबक), घास के मैदान, बर्ड वाचिंगनवंबर से फरवरी
तवा जलाशयभोपाल से ~115 किमी (इटारसी के पास)क्रूज, वॉटर स्पोर्ट्स, सनसेट व्यूअक्टूबर से मार्च
अमरकंटकबिलासपुर से ~120 किमी, जबलपुर से ~220 किमीनर्मदा उद्गम, दूधधारा, कपिलधारा वॉटरफॉलपूरे वर्ष (विशेषकर जुलाई से मार्च)
भीमबेटकाभोपाल से ~45 किमीप्रागैतिहासिक रॉक शेल्टर्स, गुफा चित्रजुलाई से मार्च
मांडूइंदौर से ~95 किमीजहाज महल, रूपमती मंडप, मानसूनी वादियांजुलाई से फरवरी
पचमढ़ीभोपाल से ~200 किमी, जबलपुर से ~250 किमीझरने, गुफाएं, धूपगढ़ सनसेट पॉइंटपूरे वर्ष (मानसून और सर्दी)
महेश्वरइंदौर से ~90 किमीनर्मदा घाट, अहिल्या किला, महेश्वरी हैंडलूमअक्टूबर से मार्च
गुलावट वैलीइंदौर से ~25 किमीकमल की झील, बंबू ब्रिज, बोटिंगअगस्त से जनवरी

यात्रा के लिए जरूरी सुझाव और सावधानियां

  • स्थानीय गाइड की सहायता लें: पातालकोट या घने वन क्षेत्रों में जाते समय स्थानीय गाइड का साथ जरूर लें, जिससे न केवल सुरक्षित रास्ता मिलता है बल्कि स्थानीय परंपराओं व वनस्पतियों की प्रामाणिक जानकारी भी मिलती है।
  • जरूरी सामान साथ रखें: कुछ अनदेखी जगहों पर भोजन व पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होती। इसलिए पोर्टेबल पानी की बोतल, हल्के स्नैक्स और आवश्यक प्राथमिक चिकित्सा किट (फर्स्ट एड) हमेशा साथ रखें।
  • पर्यावरण का सम्मान करें: ये सभी स्थल अपनी अदूषित प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाने जाते हैं। प्लास्टिक कचरा न फैलाएं और 'लीव नो ट्रेस' के नियम का पालन करें।
  • समय और अनुमतियां: वन्यजीव अभयारण्यों और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सूर्यास्त के बाद रुकने से बचें और वन विभाग के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।