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बारिश के मौसम में उमस से हैं परेशान? अपनाएं ये लाइफस्टाइल हैक्स, रहेंगे बिल्कुल फिट

बारिश के मौसम में उमस और पसीने से हैं परेशान? जानिए मानसून में हीट स्ट्रेस, डिहाइड्रेशन और इन्फेक्शन से बचने के आसान व असरदार हेल्थ टिप्स।
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भारत

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Chitra Badoliya

Aug 27, 2026

Humidity

बारिश में उमस से परेशान? (AI)

मानसून की पहली बारिश जहां चिलचिलाती धूप और गर्मी से राहत दिलाती है, वहीं इसके साथ आने वाली भारी नमी यानी 'ह्यूमिडिटी' कई तरह की स्वास्थ्य चुनौतियां भी खड़ी कर देती है। बारिश के दिनों में हवा में जलवाष्प (Water Vapour) की मात्रा अत्यधिक बढ़ जाती है, जिससे वातावरण चिपचिपा और भारी हो जाता है। यह उमस न केवल हमारी कार्यक्षमता को प्रभावित करती है, बल्कि शरीर के तापमान नियंत्रण तंत्र (थर्मोरेगुलेशन) को भी बाधित कर देती है।

उमस का शरीर पर जैविक प्रभाव: हीट स्ट्रेस को समझें

सामान्य परिस्थितियों में जब शरीर गर्म होता है, तो पसीना निकलता है और हवा के संपर्क में आकर वाष्पीकृत (Evaporate) हो जाता है, जिससे शरीर को ठंडक मिलती है। लेकिन उमस भरे मौसम में हवा पहले से ही नमी से संतृप्त होती है, जिसके कारण पसीना आसानी से नहीं सूखता।

अनकंपेंसबल हीट स्ट्रेस (Uncompensable Heat Stress): जब पसीना सूखना बंद हो जाता है, तो शरीर का आंतरिक तापमान बढ़ने लगता है। इस स्थिति को हीट स्ट्रेस कहते हैं, जिससे दिल पर दबाव बढ़ता है और थकान, चक्कर आना, लो ब्लड प्रेशर और घबराहट जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

साइलेंट डिहाइड्रेशन: अत्यधिक पसीना बहने से शरीर से पानी के साथ-साथ जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स (सोडियम और पोटेशियम) भी निकल जाते हैं। कई बार प्यास का अहसास कम होता है, जिससे लोग अनजाने में डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं।

मानसून में पनपने वाले मुख्य स्वास्थ्य जोखिम

उमस और नमी का मौसम बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के पनपने के लिए सबसे अनुकूल होता है। इस दौरान निम्नलिखित बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

त्वचा और फंगल संक्रमण: जांघों, उंगलियों के बीच और बगलों में पसीना जमा रहने से दाद, खाज, खुजली और 'एथलीट फुट' जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं।

जल एवं भोजन जनित रोग: नमी में बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं। बासी खाना या दूषित पानी पीने से टाइफाइड, हैजा, डायरिया और हेपेटाइटिस-ए का संक्रमण हो सकता है।

मच्छर जनित बीमारियां: बारिश के रुके हुए पानी में मच्छरों का लार्वा तेजी से पनपता है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का प्रकोप बढ़ता है।

श्वसन संबंधी समस्याएं: हवा में नमी बढ़ने से घरों के अंदर फफूंद (Mould) और डस्ट माइट्स बढ़ जाते हैं, जो अस्थमा और एलर्जी के मरीजों के लिए सांस लेना मुश्किल कर देते हैं।

उमस से बचाव: दैनिक जीवनशैली में जरूरी बदलाव

  1. स्मार्ट हाइड्रेशन और खानपान
  • केवल सादा पानी पीने के बजाय इलेक्ट्रोलाइट युक्त तरल पदार्थ लें; जैसे नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और ओआरएस (ORS)।
  • अत्यधिक तैलीय, मसालेदार और स्ट्रीट फूड से परहेज करें क्योंकि मानसून में पाचन अग्नि कमजोर हो जाती है। हल्का, सुपाच्य और ताजा पका हुआ गर्म भोजन ही खाएं।
  • मौसमी फल जैसे सेब, जामुन और पपीता खाएं, लेकिन कटे हुए फलों को देर तक खुला न छोड़ें।
  1. कपड़ों का सही चयन और व्यक्तिगत स्वच्छता
  • पूरी तरह से सूती (Cotton) या लिनेन के ढीले और हल्के रंग के कपड़े पहनें। सिंथेटिक कपड़े पसीना नहीं सोखते और त्वचा संक्रमण को बढ़ावा देते हैं।
  • दिन में दो बार गुनगुने पानी से नहाएं और शरीर को तौलिए से अच्छी तरह सुखाएं। संवेदनशील हिस्सों पर एंटी-फंगल पाउडर का उपयोग करें।
  1. घर के अंदर के वातावरण का प्रबंधन
  • घर के अंदर वेंटिलेशन बनाए रखें। यदि उमस बहुत ज्यादा हो, तो एयर कंडीशनर को 'ड्राई मोड' पर चलाएं या डीह्यूमिडिफायर का उपयोग करें।
  • गीले कपड़े कभी भी घर के बंद कमरों में न सुखाएं; इससे कमरे की नमी 30% तक बढ़ जाती है, जो फंगल ग्रोथ का कारण बनती है।

त्वरित उपाय और स्वास्थ्य प्रबंधन

समस्यामुख्य कारणप्रभावी समाधान
अत्यधिक पसीना व थकानशरीर का तापमान बढ़नागीले तौलिए से गर्दन/चेहरा पोंछें, इलेक्ट्रोलाइट्स लें
स्किन एलर्जी व रैशेजफंगल व बैक्टीरियल ग्रोथसूती कपड़े, दिन में 2 बार स्नान, एंटी-फंगल पाउडर
पेट की गड़बड़ीदूषित पानी व कमजोर पाचनउबला पानी पिएं, ताजा व हल्का सुपाच्य भोजन लें
डेंगू/मलेरिया का डरजमा हुआ पानी ও मच्छरकूलरों की सफाई, मच्छरदानी और रिपेलेंट का उपयोग

संवेदनशील वर्गों का विशेष ध्यान

  • बुजुर्ग: उम्र बढ़ने के साथ शरीर की तापमान सहन करने की क्षमता घट जाती है। बुजुर्गों को सीधे धूप या अत्यधिक उमस में जाने से रोकें और उनके बीपी की नियमित जांच करें।
  • छोटे बच्चे: बच्चे खेल-कूद में पानी पीना भूल जाते हैं। उन्हें समय-समय पर तरल पदार्थ देते रहें और डायपर वाले बच्चों में रैशेज से बचने के लिए समय पर डायपर बदलें।

मानसून की उमस परेशान करने वाली जरूर हो सकती है, लेकिन दैनिक आदतों में थोड़ा सा अनुशासन और स्वच्छता रखकर आप इसके दुष्प्रभावों से पूरी तरह सुरक्षित रह सकते हैं।