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PIC : भीलवाड़ा के लोग रोज लेते है चटकारे, रोजाना गप्प हो जाते हैं तीन लाख गोल-गप्पे

भीलवाड़ा. गोल गप्पे का नाम सुनते ही अच्छे-अच्छों के मुंह में पानी आ जाता है। पानी पूरी कहें या गोल गप्पे या फिर पताशी की मांग पूरे साल रहती है। इनका ठेला शहर हो या कस्बा, हर गली-मोहल्ले में आसानी से मिल जाएगा। अकेले भीलवाड़ा शहर में रोजाना करीब तीन लाख गोल गप्पे गप्प किए जाते हैं।

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भीलवाड़ा शहर में एक ठेले वाले के यहा युवतिया गोल गप्पे का आनन्द लेती हुई।

भीलवाड़ा शहर में एक ठेले वाले के यहा युवतिया गोल गप्पे का आनन्द लेती हुई।

भीलवाड़ा शहर में एक ठेले वाले के यहा महिलाएं व बच्चे गोल गप्पे का आनन्द लेते हुए।

भीलवाड़ा शहर में एक ठेले वाले के यहा महिलाएं व बच्चे गोल गप्पे का आनन्द लेते हुए।

भीलवाड़ा के चन्द्र शेखर आजाद नगर में एक मशीन पर गोल गप्पे तैयार करती महिला। इसके लिए हर समय चार जने लगे रहते है।

भीलवाड़ा के चन्द्र शेखर आजाद नगर में एक मशीन पर गोल गप्पे तैयार करती महिला। इसके लिए हर समय चार जने लगे रहते है।

भीलवाड़ा के चन्द्र शेखर आजाद नगर में एक मशीन पर तैयार गोल गप्पे जो खाखरे की तरह लगते है। लेकिन कडाई में तैयार होने के बाद वह गोल गप्पे तैयार हो जाते है।

भीलवाड़ा के चन्द्र शेखर आजाद नगर में एक मशीन पर तैयार गोल गप्पे जो खाखरे की तरह लगते है। लेकिन कडाई में तैयार होने के बाद वह गोल गप्पे तैयार हो जाते है।

भीलवाड़ा के चन्द्रशेखर आजाद नगर में एक मशीन पर तैयार गोल गप्पे।

भीलवाड़ा के चन्द्रशेखर आजाद नगर में एक मशीन पर तैयार गोल गप्पे।

भीलवाड़ा के चन्द्रशेखर आजाद नगर में एक मशीन पर गोल गप्पे बनाने के लिए तैयार किया गया आटा, सूजी व मेदा का गोल

भीलवाड़ा के चन्द्रशेखर आजाद नगर में एक मशीन पर गोल गप्पे बनाने के लिए तैयार किया गया आटा, सूजी व मेदा का गोल

भीलवाड़ा में एक मकान में तैयार किए गए गोल गप्पे।

भीलवाड़ा में एक मकान में तैयार किए गए गोल गप्पे।