
पूरे देश में हरियाली तीज का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। महिलाएं सोलह श्रृंगारकर माता पार्वती और शिव की आराधना कर रही हैं। उनके हाथों में मेंहदी सजी हुई है। मगर क्या आपको पता है इस दिन महिलाएं मेंहदी क्यों लगाती हैं और इसके बिना पूजा क्यों अधूरी रहती है।

हरियाली तीज को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। महिलाएं इस पर्व में अपने पति की सलामती के लिए व्रत रखती हैं। इसमें शिव और पार्वती की पूजा की जाती है। इस बार तीज के सावन के सोमवार में पड़ने से इसका महत्व और भी ज्यादा हो गया है।

इस व्रत को तीज के नाम से भी जाना जाता है। इसका मतलब यह है कि इस व्रत में तीन चोजों के त्याग का प्रण लिया जाता है। इसके तहत महिलाएं कसम खाती हं कि वो कभी भी अपने पति से छल कपट नहीं करेंगी। दूसरा ये कि वो कभी पति से झूठ नहीं बोलेंगी और लड़ाई नहीं करेंगी। वहीं तीसरी कसम ये है कि महिलाएं किसी दूसरे की बुराई नहीं करेंगी।

तीज पर हाथों में मेंहदी लगाने को बहुत शुभ माना जाता है। कहते हैं कि जिस भी महिला के हाथों में लगी मेंहदी का रंग गहरा चढ़ता है, उसका पति उससे उतना ही प्यार करता है। इसके अलावा ऐसी स्त्रियों को अच्छी सास भी मिलती हैं। जिनके साथ उनका तालमेल अच्छा रहता है।

इस व्रत में मेंहदी का इसलिए भी बहुत महत्व है क्योंकि इसे सोलह श्रृंगार में सबसे महत्वूपर्ण माना जाता है। ये विवाहित स्त्रियों के सुहाग का प्रतीक होता है। वहीं कुंवारी कन्याएं इसे अपने हाथ में रचाकर माता पार्वती से अच्छे पति की कामना करती हैं।

पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार तीज पर मेंहदी लगाने की परंपरा की शुरुआत स्वयं देवी पार्वती ने की थी। दरअसल वो भोलेनाथ को रिझाना चाहती थीं, जिसकी वजह से उन्होंने अपने हाथों और पैरों में मेंहदी लगाई थी। तब से महिलाएं इस व्रत में मेंहदी लगाने लगीं।

हाथों में मेंहदी लगाने को सौभाग्य और सम्पन्ता की निशानी माना जाता है। मान्यता है कि मेंहदी का रंग अच्छा चढ़ने से घर में खुशहाली आती है। इससे पति की तरक्की होती है और उनका वैवाहिक जीवन मधुर बनता है।

हरियाली तीज पर मेंहदी लगाने का एक वैज्ञानिक कारण भी है। चूंकि मेंहदी की तासीर ठंडी होती है इसलिए इसे लगाने से शरीर और मन शांत होता है। ये बॉडी की हीट को कम करने में मदद करता है। साथ ही इसमें मौजूद एंटी बैक्टीरियल चीजें संक्रामक रोगों से बचाती हैं।

इस बार हरियाली तीज सावन के सोमवार को पड़ा है। ऐसा संयोग करीब 130 सालों बाद बना है। सोमवार के दिन तीज के पड़ने को अत्यन्त फलदायी माना जाता है। कहते हैं कि ऐसे समय सच्चे दिल से की गई प्रार्थना जरूर स्वीकार होती है।

यूं तो आजकल मार्केट में मेंहदी लगाने के लिए कई सुविधाएं उपलब्ध हैं मगर समय की कमी के चलते इन दिनों मेंहदी के टैटूज भी चलन में हैं। लोग इसका काफी इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं आॅरिजनल मेंहदी लगाने के लिए आजकल राजस्थानी और मारवाड़ी डिजाइन ट्रेंड मे है।