
नर्इ दिल्ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी आज भारत के सबसे सफल बिजनेसमैन में से एक हैं। यही कारण है कि आज वो भारत ही नहीं बल्कि एशिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में पहले पायदान पर हैं। लेकिन आपको ये बात जानकर हैरानी होगी की जो शख्स अपने बिजनेस की बदौलत आज एशिया का सबसे बड़ा धनकुबेर है, वो कभी बिजनेसमैन बनना ही नहीं चाहता था। पिता धीरूभार्इ अंबानी के सफल कारोबारी होने के बावजूद भी मुकेश अंबानी को बिजनेस करने का कोर्इ शौक नहीं था।

बचपन से ही मुकेश अंबानी एक शिक्षक बनना चाहते थे। पिछले साल ही एक टीवी चैनल को दिए गए अपने इंटरव्यू में मुकेश अंबानी ने कहा था, "रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़ने से पहले मैं शिक्षक बनना चाहता था।

पापा (धीरूभार्इ अंबानी) के कहने पर मैंने रिलायंस इंडस्ट्रीज ज्वाइन किया था। पापा के कहने पर ही मैं रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़ा वर्ना उससे पहले मैं वर्ल्ड बैंक के लिए काम करना चाहता था या फिर किसी विश्वविद्यालय में छात्रों को पढ़ाना चाहता था।"

मुकेश अंबानी ने अपने इंटरव्यू में आगे कहा कि, उनकी पत्नी (नीता अंबानी ) भी एक शिक्षक हैं आैर वो भी चाहती थी की मैं शिक्षण के क्षेत्र में आउं। शिक्षा के क्षेत्र में वो अपनी संतुष्टिक के लिए काम करना चाहते थे।

जब मुकेश अंबानी से पूछा गया कि आखिर पैसे उनके लिए कितना मायने रखता है तो उन्होंने जवाब दिया, "कुछ नहीं।" पैसों को लेकर उनका कहना है, "पैसे वास्तव में मेरे लिए कुछ मायने नहीं रखता है। मेरे पापा का हमेशा यही मानना था कि यदि तुम पैसे के लिए कुछ करना चाहते हो तो तुम मूर्ख हो। यदि तुम पैसे को ध्यान में रखकर कोर्इ काम कर रहे हो तो कुछ भी नहीं कर सकते।