
राजधानी में 900 से अधिक पार्क हैं, इनमें से ज्यादातर बदहाल हैं। निगम हर साल पार्कों पर करोड़ों खर्च कर रहा है, लेकिन ये उजाड़ ही बने हैं। वहीं एेसे भी पार्क हैं, जहां निगम ने नहीं जनता ने ही व्यवस्थाएं संभाल लीं। आज ये पार्क हरियाली से लकदक हो कॉलोनी का सुकून बने हैं।

सबसे सुंदर पार्क, बन गया प्रेरणा मिलता है सुकून। यहां झूले झूलते हुए बच्चे दिखे। ओपन जिम भी दिखी। छह माह पहले पार्क की स्थिति खराब थी, परकोटे के अच्छे पार्कों में से है।

नगर निगम पार्क के रख-रखाव में सालाना करोड़ों रुपए खर्च करता है। फिर भी अधिकतर की सूरत खराब ही है। जो साफ-सुथरे हैं, उनकी कमान कॉलोनी की समिति के हाथ में है।

निगम जिन पार्कों को संभाल रहा है, उनकी सूरत बदलने की जगह और बिगड़ती जा रही है।