
मोड़क स्टेशन की हिमाद्री कहती हैं कि हर सुबह दादाजी नटवर लाल कौशिक के फोन से ही जागती हूं। वे सुबह 4 बजे जाग जाते हैं। हर सुबह फोन घनघनाता है और आवाज आती है, बेटा उठो, कोचिंग जाना है। मम्मी-पापा से अधिक चिंता दादा-दादी को रहती है। उनकी कॉल को कभी मिस नहीं करती। कोचिंग से आने के बाद उनसे बात जरूरी होती है। दादा-दादी मिलना सौभाग्य की बात है।

जेईई की तैयारी कर रहे आसाम के नवारयूण भड़ाली व खलील धनंजय कहते हैं कि जिसे दादा-दादी का प्यार नहीं मिला, उसका संसार अधूरा है। नवारयूण की दादी नहीं है, लेकिन दादा इतने प्यारे हैं कि हम साथ टीवी देखता हूं। दादा रोहितेश्वर की बातें उन्हें हर पल प्रेरित करती है। कोई भी बात होती है तो पहले दादा को बताता हूं। धनंजय के लिए भी दादा-दादी प्रेरणा के स्रोत हैं।

मेडिकल की तैयारी कर रही अटरु की पल गुप्ता दादा दादी की बात करते ही भावुक हो गई। वह दो साल से कोटा में है। दादी से दीपावली के बाद नहीं मिली, लेकिन वीडियो कॉलिंग से बात हो जाती है। पल बताती है कि दादी की बातें डिप्रेशन दूर कर देती है। वे हमेशा सकारात्मक बात ही करती ही। दादी से सीखा अनुशासन यहां बहुत कम आता है। यहां रहते हुए दादी को बहुत मिस करती है।

पंजाब की प्रवल दादी गुरनाम कौर के साथ कोटा में रहकर कोचिंग कर रही है। पहले अकेली थी तो अकेलापन सताता था। दादी साथ आई तो पढाई का समय भी ज्यादा मिल रहा है। दादी गुरनाम बताती है कि बच्चों की खुशी में हमारी खुशी है। दादी खुशमिजाज है, लेकिन पढ़ाई में आलस करने पर डांट भी लगा देती है।दोस्त हरमन बताती है कि उसे भी लगता है कि दादी उसके भी साथ है।

हरमन हनुमानगढ़ से कोचिंग करने कोटा आई तो दादी मनजीत कौर भी साथ आ गई। दादी के साथ रहने से इमोशनल सपोर्ट मिल जाता है, मैं अकेली रहती तो दादी को बहुत मिस करती। दादी का साथ नर्वस नहीं होने देता। दादी मनजीत कौर बताती है कि बिटिया का भविष्य प्राथमिकता है। घर की याद आती है तो फोन पर बात कर लेते हैं। परिवार में लोगों से वीडियो कॉलिंग हो जाती है।