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मुस्लिम शासक ने दी जमीन तो बन पाया सिखों का सबसे बड़ा मंदिर गोल्डन टेंपल

गोल्डन टेंपल बनाने के लिए जमीन किसी सिख ने नहीं बल्कि इस मुस्लिम शासक ने दी थी... वहीं नींव रखने वाला भी एक मुस्लिम ही था..

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Golden Temple

सिख धर्म में अगर किसी गुरुद्वारे बात की जाती है, तो सबसे पहले गोल्डन टेंपल यानि स्वर्ण मंदिर का नाम आता है। अमृतसर के गोल्डन टेंपल का असली नाम हरमिंदर साहिब गुरुद्वारा है। लेकिन इन दरबार साहिब को लोग गोल्डन टेंपल के नाम से ज्यादा जानते हैं। यह गुरुद्वारा अपनी सुदंरता और आस्था के लिए बहुत प्रख्यात है। लेकिन आपको पता है कि गोल्डन टेंपल के लिए जमीन किसी सिख समुदाय ने नहीं बल्कि एक मुस्लिम शासक ने दी थी। यही नहीं जब गुरुद्वारा बनना शुरू हुआ था तो उसकी नींव रखने वाला शख्स भी मुस्लिम ही था।

Golden Temple

गोल्डन टेंपल बनवाने के लिए जमीन देने वाले मुस्लिम शासक का नाम अकबर था। अकबर ने गोल्डन टेंपल के लिए इस जमीन को दान कर दिया था।

Golden Temple

वहीं जिस शख्स ने टेंपल की नींव रखी थी उसका नाम साई मियान मीर था। वह एक मुस्लिम संत थे।

Golden Temple

लगभग 200 साल के बाद, गुरुद्वारे पर सोने की परत चढ़वाने का काम महाराजा रंजीत सिंह ने करवाया था।

Golden Temple

वहीं इस गुरुद्वारे की आस्था को देखते हुए ब्रिटिश सरकार ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान यहां अपनी जीत के लिए एक अखंड पाठ करवाया था। इसके अलावा एक बार अहमद शाह अब्दाली के सेनापति जहां खान ने गुरुद्वारा पर हमला किया था लेकिन जवाब में सिख सेना ने पूरी सेना को खत्म कर दिया था।

Golden Temple

गोल्डन टेंपल में दुनिया का सबसे बड़ा लंगर लगाया जाता है। जहां लगभग 50,000 से भी ज्यादा लोग खाना खाते हैं।