
stone pelting
नई दिल्ली. जम्मू और कश्मीर से आतंकवाद के सफाए की दिशा में कदम उठाते हुए केन्द्र ने राज्य सरकार से खुले दिल से जरूरी कदम उठाने को कहा है। केन्द्र के इस सुझाव पर भटके युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार ने आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति तैयार करने की दिशा में काम शुरू कर दिया है। आपको बता दूं कि इससे पहले गृह मंत्रालय ने सीएम महबूबा मुफ्ती को सुझाव दिया था कि स्टोन पेल्टिंग मामले में नामजद युवाओं पर केस हटाएं जाएं। इस पहल के तहत अभी तक हजारों युवाओं पर से स्टोन पेल्टिंग के मामले उठाए जा चुके हैं।
3,650 को मिला आम माफी का लाभ
केन्द्र की इस नीति पर अमल करते हुए राज्य सरकार ने 23 नवंबर 2017 से आम माफी योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत 3,650 युवाओं पर से स्टोन पेल्टिंग के मामले हटा लिए गए । शेष मामलों में रिव्यू का काम जारी है। राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार 9,000 युवाओं पर स्टोन पेल्टिंग के मामले दर्ज हैं।
महबूबा ने की उच्च स्तरीय समिति की बात
राज्य सरकार ने केन्द्र को सुझाव दिया था कि डीजीपी या एडीजीपी रैंक के पुलिस अधिकारी की देखरेख में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएा समिति को गंभीर मामलों को छोड़कर अन्य मामलों में युवाओं के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म करने के लिए जरूरी ड्राफ्ट तैयार करने की जिम्मेवारी दी जाए। ताकि स्टोन पेल्टिंग के आरोप में फंसे युवा फिर से पढ़ाई शुरू करें और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ें।
पीएम मोदी ने की थी कश्मीरियत की बात
केन्द्र के इस पहल के पीछे घाटी से आतंक का पूर्ण सफाया करना है। हालिया पहल उसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। पीएम मोदी ने भी 15 अगस्त 2017 को लाल किले के प्राचीर से घोषणा की थी कि अगर भटके हुए युवा सहयोग करें तो केन्द्र सरकार कश्मीरियत की नीति पर आगे कदम बढ़ा सकती है। इस योजना के तहत पहले स्टोन पेल्टिंग मामले में आम माफी की योजना की शुरुआत हुई। अब केन्द्र ने राज्य सरकार से कहा है कि मुख्यधारा से भटके हुए युवाओं की घर वापसी के लिए आत्मसमर्पण की नीति तैयार करे। साथ ही उनके पुनर्वास के लिए एक मसौदा तैयार करे।
एतबार नहीं कर पा रहे हैं लोग
सीमा पार जाकर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे तथा प्रशिक्षण प्राप्त कर वापस लौट चुके भ्रमित युवकों अर्थात आतंकियों को राह पर लाकर उनके पुनर्वास की तैयारी की कवायद एक बार फिर से आरंभ हो गई है। इस बार केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर आत्मसमर्पण नीति तैयार करने की कवायद आरंभ की है। ये कदम पहले भी उठाए गए थे लेकिन अभी तक ऐसी नीतियों का परिणाम निराशाजनक रहा है। यही कारण है कि जम्मू और कश्मीर के लोग में शंका है कि नई नीति भी शायद ही युवाओं के लाभकारी साबित हो।
Published on:
25 Jan 2018 11:47 am
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