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काम 1 साल से भी कम, फिर भी कमाई ₹1.82 करोड़! सांसद महोदय की 5 साल की सैलरी का पूरा हिसाब

देश के सांसद कितने दिन काम करते हैं और सैलरी से लेकर क्या-क्या सुविधाएं मिलती हैं। इसका पूरा गणित यहां पर समझेंगे।
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भारत

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Ravi Gupta

Jul 23, 2026

Lok Sabha Productivity Report , MP Salary,

प्रतीकात्मक तस्वीर | Credit- ChatGPT

Lok Sabha Productivity Report : सोशल मीडिया पर अक्सर क्षेत्र में ना जाने वाले सांसदों के लापता पोस्टर आते हैं। इतना ही नहीं पहली लोकसभा में सांसद 135 दिन तक संसद में रहते थे ये साल दर साल घटकर मोदी काल में 55 दिनों पर आ गई है।

आंकड़े बता रहे हैं कि सिर्फ एक सांसद अपने 5 साल के कार्यकाल में एक साल से भी कम समय (274 दिन) संसद में काम करता है। ये सब सदन में आने पर दिखता है लेकिन, सदन के बाहर ये पांच में अपने क्षेत्र में कब और कितनी देर के लिए गए। इसके बारे में ना कोई ठोस सिस्टम बना है जिससे ये ट्रैक किया जा सके।

फिर भी सांसद महोदय को सैलरी पूरी मिलती है। चलिए, सांसद महोदय की ड्यूटी और सैलरी का कैलकुलेशन विस्तार से समझते हैं-

सदन में घटता कामकाज

PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार पहली लोकसभा (1952-57) में संसद हर साल औसतन 135 दिन चलती थी। 17वीं लोकसभा (2019-2024) में यह घटकर औसतन सिर्फ 55 दिन प्रति वर्ष रह गया है। यह किसी भी पूरा कार्यकाल पूरा करने वाली लोकसभा में सबसे कम है। पूरे 5 साल में लोकसभा की कुल 274 बैठकें हुईं।

  • कार्यकाल की कुल अवधि = 1,825 दिन (5 साल)
  • सदन की कुल बैठकें = 274 दिन
  • यानी कुल कार्यकाल का सिर्फ 15% समय सदन में बीता - 365 दिन (एक साल) से भी कम

तुलना के लिए, 16वीं लोकसभा में यह औसत 66 दिन/वर्ष और 15वीं-14वीं लोकसभा में क्रमशः 332 व 356 कुल बैठकें थीं। यानी गिरावट का ट्रेंड लगातार जारी है।

सैलरी का सही गणित (अप्रैल 2023 की दरों के अनुसार)

संसदीय कार्य मंत्रालय ने 1 अप्रैल 2023 से कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स के आधार पर सांसदों के वेतन में करीब 24% बढ़ोतरी को नोटिफाई किया, जो मार्च 2025 में गजट के जरिए औपचारिक हुई। मौजूदा दरें इस प्रकार हैं:

पुरानी दर (2018)नई दर (अप्रैल 2023 से)
बेसिक सैलरी: ₹1,00,000/माहबेसिक सैलरी: ₹1,24,000/माह
क्षेत्रीय भत्ता: ₹70,000/माहक्षेत्रीय भत्ता: ₹87,000/माह
कार्यालय व्यय भत्ता: ₹60,000/माहकार्यालय व्यय भत्ता: ₹75,000/माह
दैनिक भत्ता (सत्र/समिति): ₹2,000/दिनदैनिक भत्ता (सत्र/समिति): ₹2,500/दिन
पेंशन (सेवानिवृत्त सांसद): ₹25,000/माहपेंशन (सेवानिवृत्त सांसद): ₹31,000/माह

फिक्स्ड मासिक आय (सदन चले या न चले)
1,24,000 + 87,000 + 75,000 = ₹2,86,000 प्रति माह

5 साल (60 महीने) में:
2,86,000 × 60 = ₹1,71,60,000 (₹1.72 करोड़)

दैनिक भत्ता
सदन की 274 बैठकों के अलावा सांसद संसदीय समितियों और अन्य आधिकारिक बैठकों में भी हाजिरी लगाते हैं। इन्हें मिलाकर अनुमानित कुल हाजिरी वाले दिन करीब 400 मानें तो:
400 × ₹2,500 = ₹10,00,000 (₹10 लाख)

कुल अनुमानित आय (5 साल)
₹1.72 करोड़ (फिक्स्ड) + ₹0.10 करोड़ (दैनिक भत्ता) ≈ ₹1.82 करोड़

MP की सैलरी और सुविधाएं

  • आवास: दिल्ली में सुसज्जित बंगला/फ्लैट रियायती दर पर, या ₹2,00,000/माह तक हाउसिंग अलाउंस
  • यात्रा: खुद और जीवनसाथी के लिए साल में 34 मुफ्त हवाई यात्राएं, असीमित प्रथम श्रेणी ट्रेन यात्रा
  • बिजली-पानी-टेलीफोन: रियायती/मुफ्त उपयोग सीमा तक
  • स्वास्थ्य: CGHS के तहत मुफ्त इलाज
  • MPLADS फंड: हर सांसद को अपने क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए सालाना ₹5 करोड़ मिलते हैं। लेकिन यह पैसा सांसद की निजी आय नहीं है, यह सीधे क्षेत्र के विकास कार्यों में खर्च होता है, इसलिए इसे सैलरी में नहीं जोड़ा गया है।

क्या सांसद सिर्फ इतने ही दिन काम करते हैं?

सदन की बैठकों का आंकड़ा सिर्फ लोकसभा/राज्यसभा के भीतर की कार्यवाही को दिखाता है। सत्र न चलने पर भी सांसद औपचारिक रूप से इन कामों में लगे रहते हैं:

  1. संसदीय समितियां - विधेयकों और नीतियों की समीक्षा
  2. क्षेत्रीय कार्य - जनसुनवाई, DISHA बैठकों की अध्यक्षता, MPLADS के तहत विकास कार्यों की निगरानी

फिर भी, विशेषज्ञ मानते हैं कि सदन के भीतर घटते कामकाजी दिन और बार-बार होने वाले हंगामे-स्थगन विधायी जवाबदेही और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।

नोट: उपरोक्त आंकड़े PRS Legislative Research (Vital Stats, 17th Lok Sabha), संसदीय कार्य मंत्रालय गजट अधिसूचना (अप्रैल 2023 सैलरी संशोधन), MPLADS दिशानिर्देश (सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय) से लिए गए हैं।