
इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्रेम संबंध सफल न होने के गुस्से में दुराचार व एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज करायी गयी प्राथमिकी को लड़की के आरोप वापस लेने पर मुकदमे की कार्रवाई रद्द कर दी है। कोर्ट ने कहा है कि जब पीड़िता ने स्वयं स्वीकार किया है कि उसने गुस्से में आकर प्राथमिकी दर्ज करायी है। उसने स्वयं ही प्राथमिकी निरस्त करने की मांग की है। ऐसे में मुकदमा चलाया जाना निरर्थक होगा।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह ने औरंगाबाद थाना क्षेत्र बुलन्दशहर के निवासी ब्रह्मदयाल की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याची अधिवक्ता दिलीप कुमार पाण्डेय का कहना है कि शिकायत कर्ता लड़की का याची से एकतरफा प्रेम संबंध था। जब उसकी शादी तय हो गयी तो लड़की गुस्से में आ गयी और दुराचार व एससी-एसटी एक्ट के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करा दी। पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और अपर सत्र न्यायालय में मुकदमा चल रहा था ।
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पीड़िता की तरफ से पुलिस को प्रार्थना पत्र दिया कि वह आरोपों को वापस ले रही है। आपसी विवाद को सुलझा लिया गया है और याची पर लगाये गये आरोपों पर बल नहीं देना चाहती। उसने याची से शादी का प्रस्ताव किया था। वह याची के साथ कभी नहीं रही। याची का कहना था कि एकतरफा प्रेम था, वे साथ कभी नहीं रहे। याची के घर वालों ने उसकी शादी तय कर दी। इसकी खबर मिलते ही लड़की ने गुस्से में आकर प्राथमिकी दर्ज करा दी थी। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के स्थापित विधि सिद्धान्तों का हवाला देते हुए मुकदमे की कार्रवाई रद्द कर दी है। अब याची के खिलाफ दर्ज मुकदमा नहीं चलेगा।
BY- Court Corrospondence
Updated on:
18 Sept 2018 10:24 pm
Published on:
18 Sept 2018 10:07 pm
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