
एमएचआरडी की जाँच कमेटी विवि में
इलाहाबाद केन्द्रीय विश्वविद्यालय में एक बार फिर हलचल मची है।और इस बार जितनी भगदड़ कैम्पस के अंदर देखी जा रही है।उतनी ही विवि के बाहर भी है। विश्वविद्यालय का एक खेमा कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन के गुणगान में लगा है। तो वही दूसरा उसकी खामियों की परतें उधेड़कर सब कुछ शीशे की तरह साफ कर देना चाहता है।तीन दिवसीय दौरे पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय से भेजी गई छह सदस्यीय कमेटी इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शैक्षिक वित्तीय और प्रशासनिक अवस्थाओं पर चर्चा की। लगातार मिल रही शिकायत के बाद एमएचआरडी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय की हकीकत जानने के लिए इस ऑडिट टीम को भेजा।एमएचआरडी मिनिस्ट्री की टीम कुलपति शिक्षको विभागाध्यक्ष और छात्रों से मुलाकात कर फीडबैक भी लिया।उनकी शिकायत और समस्याओं को जाना।
विश्वविद्यालय पहुंची टीम ने पहले दिन ऑडिट की शुरुआत से सुबह नार्थ हाल में सभी विभागों के विभागाध्यक्ष सेंटर के इंचार्ज और रजिस्ट्रार वित्त अधिकारी और कॉलेजों के प्राचार्यों से मुलाकात कर उनकी बातों को सुना।कमेटी के सदस्यों ने विश्व विद्यालय की कार्यप्रणाली और उसकी तमाम पहलुओं पर चर्चा की।विश्वविद्यालय में लंबे समय से तमाम अलग.अलग मुद्दों पर भी बात की।सालो से लंबित चल रहे हैं। मामलो की जानकारी मांगी और उनके लम्बित होने की वजह जानी। इस मुलाकात के दौरान ऑडिट कमेटी के सामने कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हंग्लू भी मौजूद रहे। जानकारी के अनुसार कुलपति के खेमे की यह पूरी कोशिश रही की सदस्यों के सामने सिर्फ उन के खेमे को मजबूत करने वाले लोगों ही रहे।
एमएचआरडी द्वारा भेजी गई 6 सदस्य टीम में बंगलुरु से प्रोफेसर के पी पांडियन के नेतृत्व में आई टीम में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेस के निर्देशक प्रोफेसर गौतम देसी राजू मणिपुर के प्रोफेसर सोईबाम इम्पोबी कोलकाता से प्रोफेसर पिनाक चक्रवर्ती आईआईएम संबलपुर के निर्देशक प्रोफेसर महादेव जायसवाल और जेएनयू के प्रोफेसर अमिता सिंह इस टीम में आई है। सात सदस्यीय टीम पहले दिन सामूहिक रुप से शिक्षकों और कर्मचारियों से मिलने के बाद कुलपति से दूसरे दिन अलग से बैठक कर विश्वविद्यालय के द्वारा किए जा रहे काम और कुलपति को लेकर हो रहे विवादों पर सफाई मांगी और कुलपति की भी अपनी समस्याएं सुनी। लगातार उन पर लगाए जा रहे आरोपों की सफाई देते हुए कुलपति ने अपना पक्ष रखा।
तो वही दूसरी ओर विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ मोर्चा खोले हुए छात्र संघ के पूर्व पदाधिकारी सहित तत्कालीन छात्रों का डेलीगेशन स्ट्रीम से समय लेकर मिला ।टीम से मिलने वाले सदस्यों के पूर्व पदाधिकारी ने अपना नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि कुलपति और उनके लोग 24 घंटे नजर लगाये रहे की की कौन कौन मिलने आ रहा है। जबकि सदस्यों की टीम ने समय दिया और पूर्व पदाधिकारी मिले जिनमें भारी भरकम आरोप पत्रों के साथ पहुंचने पर टीम के सदस्यों ने उनकी बात सुनी और उन्हें निष्पक्ष निष्पक्ष न्याय का आश्वासन दिया। वही बीते एक वर्ष से कुलपति के खिलाफ आंदोलन चलाने वाले विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष रोहित मिश्रा कमेटी के पास वकील और सबूतों के साथ पहुंचे।रोहित के अनुसार बमुश्किल उन्हे जब समय मिल पाया तो देर शाम विश्वविद्यालय के गेस्ट हाउस में ही गए ।और अपनी बात रखी जिसको कमेटी के सदस्यों ने सुना और रोहित के खिलाफ पहले से लगाए गए आरोपों को खुद कमेटी ने खारिज किया। रोहित ने कमेटी के सामने विश्वविद्यालय में हो रही शिक्षक भर्ती में किस तरीके से धांधली की जा रही है। साथ ही विश्वविद्यालय में आंदोलन होने के कारण क्या है कुलपति ने मनमाने तरीके से जो भी निर्णय लिए हैं उनके खिलाफ कार्यवाही की मांग करते हुए अपनी बात को रखा।और सभी के साक्ष्य भी टीम को दिया।
तीन दिवसीय दौरे पर आई टीम ने अलग अलग सदस्यों से मुलाकात कर सारे पक्षों को सुना। विश्वविद्यालय सूत्रों की माने तो कमेटी ने अपनी रिपोर्ट भी यही तैयार कर लिया है और उसे आज दिल्ली पहुंचते ही मंत्रालय को सौंप दिया जाएगा। और एक बार फिर विश्व विद्यालय के कर्मचारी शिक्षक और छात्र नेताओं को इस बात का भरोसा है।कि विश्वविद्यालय के साथ न्याय होगा ।और कैंपस में चल रही मनमानी पर रोक लगेगा।तो वही कुलपति और विश्वविद्यालय के हित में काम करने के जो निर्णय कुलपति ने लिये है वो उनका पक्ष मजबूत करेंगे।
Published on:
16 Nov 2017 11:34 am
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