
रेलवे में सुरक्षा को लेकर कर्इ बार सवाल उठते रहते हैं आैर हर बार रेलवे को आैर सुरक्षित करने के दावे किए जाते हैं। सोचिए सुरक्षा के तमाम दावे आखिरकार क्यों धरे के धरे रह जाते हैं। इसका कारण माना जा रहा है रेलवे के पास सेफ्टी स्टाॅफ की कमी होना। वहीं रेलवे सुरक्षा के लिए काम करने वाले लोगों की संख्या कम है आैर इनके पास काम का काफी दबाव होता है। उस अनुपात में मिलने वाली सुविधाएं भी काफी नाकाफी होती हैं। कर्इ सरकारी रिपोर्ट हमेशा से ही इस बात का जिक्र करती रही हैं।
रेलवे के सेफ्टी स्टाॅफ के देश भर में 24 फीसदी पद रिक्त हैं। इनकी संख्या करीब 1.42 लाख है। रेलवे बोर्ड ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि सेफ्टी स्टाॅफ की कमी के कारण सिग्नल, इंजीनियर्स आैर लोको पायलट को कर्इ बार 20 से 24 घंटे तक काम करना पड़ता है। माना जा रहा है कि इस बार बजट में राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष के तहत मिलने वाली रकम को बढ़ाया जा सकता है।
रेलवे सेफ्टी फंड पर कुल 1.19 लाख करोड़ रुपए खर्च होंगे आैर ये फंड पांच सालों के लिए बनाया जाएगा। पिछले साल रेलवे ने सेफ्टी फंड का प्रस्ताव भेजा था। सूत्रों के मुताबिक जिस पर वित्त मंत्रालय आैर रेलवे के बीच सहमति बन चुकी है। फंड का 50-50 हिस्सा वित्त आैर रेलवे मंत्रालय देंगे।
Published on:
01 Feb 2017 11:13 am
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