
बजट का नाम सुनते ही हमारे दिलो-दिमाग में अर्थशास्त्र के ऐसे उलझाऊ आंकड़ों की तस्वीर उभरती है जो जिसे समझना नामुमकिन नहीं तो भी मुश्किल जरूर है।
आमतौर पर बजट को किसी खास अवधि के लिए एक ऐसा खाका माना जाता है जिसे ध्यान में रखकर कोई देश अपना मुकद्दर तय करता है, लेकिन बजट की बात महज यहीं तक सीमित नहीं है। इससे जुड़ी हैं कई रोचक परंपराएं और कई अमिट कहानियां।
वर्ष 2017 का बजट इस मायने में भी खास होगा क्योंकि इस बार रेल बजट अलग से नहीं आएगा। यह आम बजट के साथ ही पेश होगा। इस तरह 93 साल की यह परंपरा टूट जाएगी। जानिए रेल बजट से जुड़ी कुछ रोचक बातें।
1- रेल बजट अलग से शुरू होने की परंपरा ब्रिटिश शासन से जुड़ी है। साल था 1924 और इसकी सिफारिश की थी ऑकवर्थ कमेटी ने।
2- उस जमाने में भारत में रेलवे की देखरेख और बड़े फैसलों का दायित्व ब्रिटिश रेलवे पर था। तब ऑकवर्थ कमेटी ने 1920 से 1921 तक अध्ययन कर पाया कि भारत में रेल बजट को आम बजट से अलग कर दिया जाना चाहिए।
3- ऑकवर्थ कमेटी के अध्यक्ष विलियम ऑकवर्थ थे जो ब्रिटिश रेलवे के प्रख्यात अर्थशास्त्री थे। उनका सुझाव ब्रिटिश सरकार ने 1924 में माना और एक नई परंपरा की शुरुआत हुई। इसके तहत रेल बजट और आम बजट अलग-अलग पेश किए जाने लगे। आजाद भारत में भी यह परंपरा 93 साल तक जारी रही।
4- भारत में रेल बजट का पहला लाइव टेलीकास्ट 24 मार्च 1994 को किया गया।
5- भारत में पहली महिला रेलमंत्री ममता बनर्जी थीं जो वर्तमान में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हैं। 2002 में वे रेल बजट पेश करने वाली पहली महिला रेलमंत्री थीं।
6- ममता बनर्जी के नाम एक और कीर्तिमान दर्ज है। वे पहली रेलमंत्री थीं जिन्होंने एनडीए और यूपीए दोनों सरकारों में रेल बजट पेश किया।
7- लालू प्रसाद यादव रिकॉर्ड छह बार रेल बजट पेश कर चुके हैं। यही नहीं, कभी उनके घोर राजनीतिक विरोधी रहे नीतीश कुमार भी रेल मंत्री रह चुके हैं।
8- भारतीय रेलवे की गिनती विश्व में सबसे ज्यादा नौकरियां देने वाले नियोक्ता में होती है।
9- इंडियन रेलवे की पहली पैसेंजर ट्रेन 16 अप्रेल 1853 को मुंबई से थाणे के बीच चली थी। इसके बाद पूरे भारत में रेलवे पटरियों का जाल बिछाया गया और रफ्तार भी तेज हुई। आज रेलवे हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है।
Published on:
01 Feb 2017 11:05 am
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