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दाखिला रायगढ़, राजनांदगांव व अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज में, अब ट्रांसफर लेकर आ गए रायपुर

- गलत परंपरा : छात्रों ने स्वास्थगत कारण का दिया हवाला, इनमें डॉक्टर व अफसरों के बच्चे। - डीएमई ने एनएमसी से पूछा क्या करें, लेकिन बिना जवाब मिले 4 छात्रों का ट्रांसफर किया।  

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रायपुर@ प्रशांत गुप्ता. प्रदेश में पहली बार 4 एमबीबीएस छात्र ट्रांसफर (MBBS admission ) लेकर एक मेडिकल कॉलेज से दूसरे मेडिकल कॉलेज में आ गए। एक छात्र ने दूसरे राज्य के विश्वविद्यालय के नियमों और अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा संचालक, छत्तीसगढ़ को नियमानुसार कार्यवाही के आदेश दिए। तत्कालीन संचालक डॉ. एसएल आदिले ने इस संबंध में नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को पत्र लिखकर अभिमत मांगा। वहां से जवाब आए बगैर ही सकारात्मक जवाब की प्रत्याशा में अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज के छात्र का ट्रांसफर रायपुर के पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में कर दिया।

'पत्रिका' पड़ताल में सामने आया कि इस आदेश को आधार बनाकर रायगढ़ से 2 और राजनांदगांव मेडिकल से 1 छात्र ने रायपुर मेडिकल कॉलेज में ट्रांसफर के लिए आवेदन किया, और इन्हें भी ट्रांसफर मिल गया। ये सभी छात्र 2018-19 बैच के हैं। अक्टूबर-नवंबर से ये रायपुर मेडिकल कॉलेज में पढ़ रहे हैं। डॉक्टर, प्रोफेसर, आईएमए के पदाधिकारी इसे गलत पंरपरा की शुरुआत मान रहे हैं। कह रहे हैं कि इससे उन छात्रों के मनोबल पर असर पढ़ेगा जो अच्छी रैंक लेकर आए, और उनका भी जो इनके पूर्व के संस्थान में अध्ययनरत हैं। सूत्रों के मुताबिक कुछ और छात्रों ने पालकों ने ट्रांसफर के लिए आवेदन किया था। आशंका है कि भविष्य में ट्रांसफर के लिए और आवेदन होंगे।

150 सीट से ज्यादा पर दाखिले संभव ही नहीं
रायपुर मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस (MBBS Admission) की 150 सीट हैं। एमसीआई के नियमानुसार इससे ज्यादा पर दाखिले नहीं दिए जा सकते। कम दाखिले हो सकते हैं। मगर, 2018 बैच के इन छात्रों ने हाईकोर्ट में कहा, 2018 बैच में 150 छात्रों का दाखिले हुए। फस्र्ट ईयर में कुछ छात्र फेल हो गए। उन सीट पर हमें दाखिले दिए जाएं। जबकि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। जब तक बैच पास-आउट नहीं हो जाता, बीच के किसी भी वर्ष में सीधे दाखिले देने या फिर ट्रांसफर का नियम नहीं है।

ट्रांसफर लेने का लाभ : मैरिट उच्च संस्थान में पढऩे का मौका
पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज (Pt Jawaharlal Nehru Medical College) प्रदेश का सबसे बड़ा, सबसे पुराना मेडिकल कॉलेज है। यहां पढ़ाई का स्तर सबसे अच्छा माना जाता है। टॉप रैंक वाले अभ्यर्थियों की प्राथमिकता इसी कॉलेज की रहती है। अगर छात्र ट्रांसफर लेकर आते हैं तो उन्हें टॉप 150 रैंक वाले छात्रों के साथ बैठकर पढऩे का अवसर मिल रहा है।

फेल छात्र भी 2018 बैच के ही
जानकारों के अनुसार, ट्रांसफर लेने 4 छात्रों ने रायपुर मेडिकल कॉलेज में 2018 बैच के छात्रों के फेल होने के चलते सीट खाली होने की बात कही, दरअसल ऐसा नहीं है। छात्र फेल भी होते हैं तो उसी बैच के छात्र कहलायेंगे जिसमें उनका दाखिला हुआ। ये 6-6 महीने में होने वाली परीक्षा में शामिल होते हैं।

मैरिट में आए छात्रों के अधिकारों का हनन
हॉस्पिटल बोर्ड के अध्यक्ष एवं इंडियन मेडिकल काउंसिल (आईएमए) के सदस्य डॉ. राकेश गुप्ता कहना है कि ये ट्रांसफर उन छात्रों के अधिकारों का हनन है, जो मेहनत से मैरिट में आए। नियमानुसार, ट्रांसफर नहीं हो सकते।

ये प्रकरण मेरे आने से पहले के हैं। इस संबंध में इतना पता है कि छात्रों के ट्रांसफर हाईकोर्ट के आदेश पर हुए। आदेश का पालन किया गया है।
- डॉ. आरके सिंह, संचालक, चिकित्सा शिक्षा

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