
हाउसिंग बोर्ड की चालाकी: 37 साल बाद मकानों को फ्री होल्ड कराने पर लग रहा 47000% लैंड रेंट का झटका
गौरव शर्मा @ रायपुर. शंकर नगर जैसे वीवीआईपी इलाके में प्राॅपर्टी पर मालिकाना हक मांगना अपने ही पैर में कुल्हाड़ी मारने जैसा हो गया है। वो इसलिए क्योंकि यहां सैकड़ों मकान कृषि भूमि पर बना दिए गए हैं। हाउसिंग बोर्ड की 37 साल पुरानी इस चालाकी का हाल ही में भंडाफोड़ हुआ जब लोगों ने अपनी प्राॅपर्टी को फ्री होल्ड कराया। लोग यह जानकर सन्न पड़ गए कि सन् 1985 में खरीदे गए मकान पर अब उन्हें 47000% अधिक लैंड रेंट देना होगा।
दरअसल, मध्यप्रदेश के जमाने में हाउसिंग बोर्ड ने शंकर नगर में सेक्टर 1, 2, 3 बसाया था। यहां हाउसिंग बोर्ड की कुल 22 हेक्टेयर जमीन है। इनमें से 60 प्रतिशत जमीन का ही डायवर्सन कराया गया। बाकी 40% कृषि भूमि पर ही मकान बना दिए गए। यह जानकारी तब सामने आई जब शासन द्वारा नगरीय निकायों की संपत्ति को फ्री होल्ड करने का फैसला लिया गया। दरअसल, फैसले से खुश होकर लोग अपनी प्राॅपर्टी पर मालिकाना हक मांगने के लिए हाउसिंग बोर्ड के दफ्तर पहुंचे। बोर्ड ने शुल्क लेकर लोगों को कागजात भी मुहैया करा दिए। मामला नामांतरण पर आकर फंस गया जब पटवारी ने लोगों को बताया कि उनका घर खेत पर बना है। रेसीडेंशियल यूज के लिए डायवर्सन कराना पड़ेगा। इसके लिए लोग एसडीएम दफ्तर पहुंचे तो पता चला कि डायवर्सन के बाद प्रतिवर्ष लैंड रेंट देना होगा। नियमों के मुताबिक, मौजूदा कलेक्टर रेट के हिसाब से जमीन की कुल कीमत का 0.3% भू-भाटक शुल्क लिया जाता है। 2592 रुपए प्रति वर्ग फीट के हिसाब से अभी 1350 स्कवायर फीट मकान का भू-भाटक शुल्क 10,545 रुपए होता है। 1187 रुपए भूमि संरचना उपकर मिलाकर हर वर्ष लोगों को 11,732 रुपए लैंड रेंट देना पड़ेगा। हाउसिंग बोर्ड ने 1985 में ही जमीनों का डायवर्सन करवा लिया होता तो 1350 स्कवायर फीट के मकान पर लोगों को अधिकतम 25 रुपए ही शुल्क देना पड़ता। इसकी तुलना में आज 47000% अधिक लैंड रेंट चुकाना होगा।
300 से ज्यादा मकान ऐसे हैं जिन्हें कृषि भूमि पर बनाया
शंकर नगर के सेक्टर 1, 2 और 3 में हाउसिंग बोर्ड ने 22 हेक्टेयर जमीन पर 838 मकान बनाए थे। दस्तावेजी प्रमाण के मुताबिक करीब 40 फीसदी कृषि जमीन पर मकान बनाए गए हैं। ऐसे मकानों की संख्या 300 के पार है। क्षेत्रफल के हिसाब से देखें तो यहां 1500, 3500, 4000 और 6000 स्क्वायर फीट के मकान भी हैं। यानी जितना बड़ा मकान, उतना ही ज्यादा लैंड रेंट।
जितने में खरीदा मकान उतना पड़ रहा है लैंड रेंट
हाउसिंग बोर्ड की लापरवाही ने लोगोंं को कितनी गहरी चोट दी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 37 साल पहले लोगों ने जितने पैसों में जमीन खरीदी थी, अब उससे ज्यादा लैंड रेंट हर साल पटाना होगा। उदाहरण के लिए 1350 स्क्वायर फीट का लैंड रेंट साढ़े 11 हजार लैंड रेंट होता है, जबकि 1985 में इस मकान की कीमत 10 हजार रुपए थी।
जमीन हाउसिंग बोर्ड के नाम ही रहने देते तो फायदे में रहते
दरअसल, अब तक मकानों पर हाउसिंग बोर्ड का मालिकाना हक था। नियमों के मुताबिक लोगों को हर 30 साल में बोर्ड में शुल्क जमा कराते और लीज दोबारा 30 साल के लिए बढ़ जाता। ऐसे में लोगों को 30 साल में सिर्फ एक बार सिर्फ हाउसिंग बोर्ड को ही शुल्क जमा कराना पड़ता। लेकिन, मकानों को हाउस होल्ड कराने के बाद लोगों को सालाना लैंड रेंट देना होगा वह भी भारी भरकम।
छलका रहवासी का दर्द- ठगी भी हमसे, खामियाजा भी हम ही भरें
बताते हैं कि मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड ने 1970-75 के बीच शंकर नगर में मकान बनाने की शुरुआत की थी। अशोक भूतड़ा उन लोगों में एक हैं जिनका परिवार शुरुआती दौर से ही यहां रह रहा है। उन्होंने बताया कि हमने सन् 1976 में यहां मकान खरीदा था जो तकरीबन 2400 स्क्वायर फीट का है। जब रजिस्ट्री के जो कागज दिए गए थे उसमें इसे रेसीडेंशियल यूज की जमीन बताई गई थी। इसी साल फरवरी में मकान को फ्री होल्ड करवाने के बाद नामांतरण के लिए पटवारी के पास गया तो उसने बताया, आपका घर कृषि भूमि पर बना है। मैंने बोर्ड के अफसरों से इसकी शिकायत भी की, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हुई। 46 साल पहले हाउसिंग बोर्ड ने हमसे ठगी की और अब खामियाजा भी हम ही भुगतें?
सेक्टर 1, 2, 3 में हाउसिंग बोर्ड के कितने मकान, जानिए...
सेक्टर - मकान
1- 434
2- 374
3- 30
कुल- 838
- इनमें से 40% यानी करीब 320 मकान कृषि भूमि पर बनाए गए हैं।
सीधी बात
कुलदीप जुनेजा, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड
शंकर नगर में कृषि भूमि पर मकान बना दिए गए?
- यह मध्यप्रदेश के जमाने में हुआ है। मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता।
आज तक बोर्ड को इस बारे में जानकारी भी नहीं थी?
- 15 साल भाजपा की सरकार थी। पहली बार आपसे ही जानकारी मिली है।
बिना गलती लोग 47000% लैंड रेंट क्यों चुकाएं?
- आप जो कह रहे हैं, उस बारे में जानकारी जुटाकर ही कुछ बता पाऊंगा।
लोगों को राहत पहुंचाने के लिए आप क्या करेंगे?
- अफसरों से बात करता हूं कि इस मसले में अब क्या कर सकते हैं।
Published on:
21 Aug 2022 09:38 pm
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
