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3853 करोड़ के कर्ज में डूबी नेको इंडस्ट्रीज ने सरकार को रखा अंधेरे में, अब दिवालिया होने के कगार पर

छत्तीसगढ़ में नीरव मोदी की तरह हजारों करोड़ का कर्ज लेने वाले बकायेदारों ने बैंकों की नींद तो उड़ाई ही हैं, वहीं सरकार को भी जमकर धोखा दिया है।

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आवेश तिवारी/रायपुर. अपार खनिज सम्पदा के गढ़ छत्तीसगढ़ में नीरव मोदी की तरह हजारों करोड़ का कर्ज लेने वाले बकायेदारों ने बैंकों की नींद तो उड़ाई ही हैं, वहीं सरकार को भी जमकर धोखा दिया है। देश के टॉप 28 डिफॉल्टरों में शामिल और 3865 करोड़ के भारी भरकम ऋण को चुकता करने में असफल रही जायसवाल नेको इंडस्ट्रीज ने छत्तीसगढ़ सरकार को अंधेरे में रखकर नए प्रोजेक्ट के लिए अनुबंध कर लिया।

2016 के दौरान छत्तीसगढ़ के रायपुर और भिलाई में कास्ट आयरन कारखाना चला रही नेको के ऋण को जिस वक्त आरबीआई गैर निष्पादक घोषित करने की कार्रवाई कर रहा था। ठीक उसी वक्त नेको से बलौदाबाजार में 3 एमटीपीए का सीमेंट प्लांट और 50 मेगावाट का बिजलीघर लगाने का तकऱीबन 1832 करोड़ रुपयों का एमओयू कर लिया।

बैंक भी मेहरबान
नेको के मामले में बैंकों का रवैया कितना अजीबोगरीब रहा इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले वर्ष रिजर्व बैंक ने सभी बैंकों को आदेश दिया था कि 13 दिसंबर तक डिफाल्टर घोषित सभी 28 कंपनियों के मामले का आपसी सहमति से समाधान कर ले।

रिजर्व बैंक का कहना था कि अगर समाधान न हुआ तो दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सूत्रों कि माने तो बैंकों ने नेको के इस कर्ज को लेकर नेको द्वारा प्रस्तुत किये गए समाधान प्रस्ताव पर आश्चर्यजनक ढंग से सहमति भी दे दी। पत्रिका से बातचीत में नेको के अधिकारी कहते भी है बैंक हमारे फेवर में हैं, लेकिन रिजर्व बैंक को यह प्रस्ताव समझ में नहीं आया और मामला अभिकरण में चला गया।

बैंकिंग विशेषज्ञ सुनील कुमार मिश्रा ने कहा कि कंपनी को बार बार नाम बदलने की क्या जरूरत थी यह समझ में नहीं आया, निस्संदेह बैंकों को ऐसे मामलों में तात्कालिक तौर पर कारवाई करनी चाहिए थी, जो नहीं की गई।

किसका पैसा कितना पैसा
नेको को दिए गए ऋ ण के दो हिस्से है जिसमे पहला हिस्सा 3100 करोड़ रुपए का है जिसे टर्म लोन के तौर पर पंजाब नेशनल बैंक की अगुवाई में बनाए गए संघ ने दिए वहीं 690 करोड़ रुपए स्टेट बैंक आफ इंडिया की अगुवाई में बनाए गए संघ द्वारा दिए गए थे। कंपनी ने ऋ ण लेते समय 2014 के अंत तक छत्तीसगढ़ में अपने इंटिग्रेटेड स्टील प्लांट का ऑपरेशन शुरू करने की बात कही थी, जिसमे बिजलीघर भी लगाया जाना था, लेकिन प्रोजेक्ट आज तक नहीं शुरू हो सका।

कर्ज न चुका अमरीका में खोल ली नेको ग्लोबल
रेटिंग एजेंसी आईसीआरए की माने तो नेको को कुल 435.26 करोड़ का लेटर आफ क्रेडिट दिया गया ऐसा ही लेटर आफ क्रेडिट पीएनबी ने नीरव मोदी को दिया था। दिलचस्प है कि कर्ज चुकाने में अब तक असफल रही नेको ने जनवरी 2016 में कंपनी ने अमरीका के टेक्सास में नेको ग्लोबल नाम की नई कंपनी भी खोल ली। नेको इंडस्ट्रीज का नाम आरबीआई द्वारा घोषित की गई देश की उन 28 कारपोरेट डिफाल्टर की सूची में शामिल है,जिनके खिलाफ रिजर्व बैंक कड़ी कारवाई की बात कर रहा है। गौरतलब है कि हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक द्वारा नेशनल कंपनी ला ट्रिब्यूनल में नेको के खिलाफ दिवालिया कानून 2016 के तहत कारवाई शुरू करने की दरखास्त दी है जिसको लेकर नेको ने पिछले महीने ही मुंबई हाईकोर्ट की शरण ली है।

कंपनी का हाल बेहाल
कंपनी का हाल आज बेहद बेहाल है। स्थिति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले वित्तीय वर्ष में कंपनी ने 459 करोड़ रुपए के घाटे का दावा किया है। कंपनी के शेयर लगातार गिरते जा रहे हैं। पिछले सप्ताह खत्म हुई नेको की बोर्ड मीटिंग के बाद पता चलता है कि कंपनी को दिसम्बर में खत्म हुई तिमाही में 174.56 करोड़ का नुकसान हुआ है।

ईडी, सीबीआई और कोर्ट कर चुका है कार्रवाई
यह बात चौकाने वाली मगर सच है कि एक तरफ जहाँ सीबीआई और ईडी ने ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी पिछले चार सालों के दौरान नेको पर ताबड़तोड़ कार्रवाइयां की है लेकिन करोड़ोंं के कर्ज की वसूली के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किये गए। 24 सितम्बर 2014 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नेको के तीन कोल ब्लाक बंद कर दिए गए थे। जिनमे से दो ब्लाक छत्तीसगढ़ में थे। कंपनी का दावा था कि जिस वक्त कोल ब्लाक बंद हुए उसमे हमने 220.13 करोड़ रुपए खर्च कर दिए थे। जून 2017 में मनी लांड्रिंग के आरोप में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नेको इंडस्ट्री का पूरा प्लांट जब्त कर लिया था।

इस मामले में कंपनी पर आरोप था कि वो सारे नियमों की धज्जियां उड़ाकर अपने कोल ब्लाक से तय सीमा से अधिक कोयला निकालता रहा और उसे स्टील प्लांट में उपयोग करता रहा। ईडी का कहना था कि इस तरह से कंपनी ने 206 करोड़ की अवैध कमाई की है। इसके पहले सीबीआई भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धाराओं के तहत कंपनी, उसके मालिकों और कोयला मंत्रालय व राज्य सरकार के अधिकारियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर दिया था।

क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए का कहना है कि कंपनी के बिलासपुर स्थित बिल्हा में ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट का काम लगातार विलंबित हो रहा है, जबकि 30 सितम्बर 2017 तक इस पर 680.21 करोड़ रुपए खर्च किये जा चुके हैं, जिससे कंपनी को भारी नुकसान हुआ है।

मुख्यमंत्री सचिव सुबोध कुमार सिंह ने कहा कि ३865 करोड़ का बकाया होना कोई बड़ी बात नहीं है ,जितनी बड़ी कंपनी होगी उतना लोन होगा। वित्तीय स्थिति का पूर्वानुमान लगाना मुश्किल है मुझे पता है कि नेको रिजर्व बैंक की कारपोरेट डिफाल्टरों की सूची में है।

बैंकिंग एक्सपर्ट स्मिता अखिलेश ने कहा कि किसी कंपनी की आर्थिक स्थिति को जाने बिना उसके साथ एमओयू करना आश्चर्यजनक है। ऐसे मामलों में कड़ाई से कार्रवाई करने की जरूरत है । जहां तक मुझे पता है रिजर्व बैंक इस मामले को लेकर गंभीर हैं।

नेको इंडस्ट्रीज जीएम (कंपनी सेक्रेटरी एंड कंप्लायंस आफिसर) आशुतोष मिश्रा ने कहा कि हमारा ऋण समाधान तो लगभग पास हो गया था बैंकर्स हमारे तो फेवर्स में थे आज भी हैं। हमने दो रेटिंग की बात भी पूरी कर दी थी,लेकिन रिजर्व बैंक ने ऐन मौके पर कहा कि यह रेटिंग नहीं चलेगी दूसरे से कराकर लाइए। हम कर्ज चुकाने के लिए तैयार हैं, यह तय है। हम न्यायालय के फैसले का इन्तजार कर रहे हैं।