
रायपुर. प्राचीन काल में छत्तीसगढ़ को ही दक्षिण कोसल राज्य कहा जाता था , इसलिए कौशल्या माता का जन्म स्थल छत्तीसगढ़ को ही माना जाता है। यह शास्त्रों में भी सिद्ध है। इसीलिए इन तथ्यों के अनुसार छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम का ननिहाल है। पिछले दो साल कोरोनाकाल के कारण कौशल्य माता की जन्मतिथि तय करने का काम नहीं हो सका। परंतु अब स्थितियां सामान्य हो रही हैं। इसलिए सभी संतों और विद्वतजनों से संपर्क कर उन्हें मठ में आमंत्रित किया जाएगा । यहां विस्तार से समागम होगा तो जन्मतिथि जरूर निकलेगी। यह पावन काम अब जल्द शुरू होने वाला है। समागम में जो विद्वान जन्म तिथि बता देंगे, उन्हें 11 लाख रुपए इनाम स्वरुप दिया जाएगा।
माता कौशल्या की जन्मतिथि बताने वाली प्रविष्टियां जिन्हें दूधाधारी मठ के राजेश्री महंत रामसुंदर दास ने देशभर के जाने-मानें संतों और विद्वतजनों से दो साल पहले मंगवाया था उन प्रविष्टियों के खुलने का समय अब आ गया है। उन्होंने ऐसी 500 प्रविष्ठियां मंगवाई थी जिसे संत समागम में खोला जाना है। महंत रामसुंदर दास ने बुधवार को पत्रिका से चर्चा करते हुए कहा कि कौशल्या माता की जन्म तिथि तय हो जाने पर छत्तीसगढ़ की धर्मप्रेमी जनता हर्षोल्लास से बिल्कुल उसी तरह माता का जन्मोत्सव मना पाएगी जिस तरह वह भगवान श्रीराम का मनाती है।
राज्य में हो रहा धार्मिक स्थलों का विकास
राजधानी के करीब चंदखुरी में कौशल्या माता का मंदिर है। जो कि सिर्फ देशभर में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में अकेला मंदिर है। यहां पर भगवान श्रीराम के बाल्य रूप के भी दर्शन कराने कराने के लिए आकर्षक स्वरूप दिया गया है। दूधाधारी मठ के राजेश्री महंत रामसुंदर दास कहते हैं- धार्मिक स्थलों को विकसित किया जा रहा है। कौशल्या माता का मंदिर आज आस्था का केंद्र बनने के साथ ही आकर्षक झलक बिखेर रही है।
माता का जन्म स्थल छत्तीसगढ़ का, इसमें कोई संदेह नहीं
महंत रामसुंदर दास कहते हैं कि भगवान श्रीराम के जीवन का एक लंबा समय करीब 10 साल यहां बीता था। परंतु कौशल्या माता का जन्म किस तिथि में हुआ था, इसका उल्लेख नहीं मिलता। इसलिए हम यह प्रयास कर रहे हैं कि कौशल्या माता की जन्मतिथि तय हो और छत्तीसगढ़ की धर्मप्रेमी जनता उस तिथि पर माता कौशल्या का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाए ।
माता कौशल्या मंदिर रायपुर से 27 किमी दूर है, जो काफी प्राचीन है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी में सोमवंशी राजाओं ने करवाया था। 1973 में मंदिर का पुनर्निर्माण किया गया था। राज्य सरकार भगवान श्रीराम के जीवन की झलकियों को दर्शाने के लिए रामवनगमन पथ प्रोजेक्ट पर काम कर ही है, जो राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देगा। इस प्रोजेक्ट के तहत राम वनवास काल से संबंधित 75 स्थानों को एक नए पर्यटन सर्किट के रूप में जोड़ा जा रहा है। ताकि लोग भगवान श्रीराम की जीवन यात्रा को करीब से देख और समझ सकें।
Published on:
27 May 2022 03:46 pm
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