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khelo India: बस्तर की बेटी ने बढ़ाया मान, 121 किलोग्राम वजन उठाकर जीता सिल्वर

Khelo India: ऋषिका ने 13 साल की उम्र में खेल की शुरुआत की। शुरुआत में वह पावरलिफ्टिंग करती थीं, बाद में उन्हें वेटलिफ्टिंग की जानकारी मिली और फिर उन्होंने इसी में अपना कॅरियर बनाने का फैसला किया।

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khelo India: बस्तर की बेटी ने बढ़ाया मान, 121 किलोग्राम वजन उठाकर जीता सिल्वर

वेटलिफ्टिंग में ऋषिका ने जीता सिल्वर (Photo Patrika)

khelo India: @ताबीर हुसैन। छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र दंतेवाड़ा की प्रतिभाएं अब राष्ट्रीय मंच पर लगातार अपनी पहचान बना रही हैं। इसी कड़ी में बचेली की रहने वाली ऋषिका कश्यप ने खेलो इंडिया प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर जिले और प्रदेश का नाम रोशन किया है। ऋऋषिका ने 86 किलोग्राम भार वर्ग में हिस्सा लेते हुए बेहतरीन तकनीक और आत्मविश्वास का प्रदर्शन किया। उनके कोच नंदू साहू के अनुसार, ऋषिका ने स्नैच और क्लीन एंड जर्क राउंड मिलाकर कुल 121 किलोग्राम वजन उठाया, जिससे उन्होंने कड़े मुकाबले में दूसरा स्थान हासिल किया।

कजिन सिस्टर शिप्रा से मिली प्रेरणा

छोटे से नगर बचेली से निकलकर राष्ट्ररय स्तर तक पहुंचने का ऋषिका का सफर संघर्ष, मेहनत और समर्पण की मिसाल है। वर्तमान में ऋषिका रायपुर के शंकर नगर में रहकर पढ़ाई के साथ-साथ वेटलिफ्टिंग की तैयारी कर रही हैं। वह छत्तीसगढ़ कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष की छात्रा हैं।

ऋषिका बताती हैं कि उन्हें इस खेल की प्रेरणा उनकी कजिन सिस्टर शिप्रा विश्वास से मिली, जो खुद भी वेटलिफ्टिंग में कई मेडल जीत चुकी हैं। उन्हें देखकर ही ऋषिका ने 13 साल की उम्र में खेल की शुरुआत की। शुरुआत में वह पावरलिफ्टिंग करती थीं, बाद में उन्हें वेटलिफ्टिंग की जानकारी मिली और फिर उन्होंने इसी में अपना कॅरियर बनाने का फैसला किया।

पिता मजदूरी करते हैं

ऋषिका के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत नहीं है। उनके पिता मजदूरी करते हैं फिर भी परिवार ने हमेशा उनका साथ दिया। शुरुआत में परिवार को चिंता थी, लेकिन जैसे-जैसे ऋषिका मेडल जीतती गईं, परिवार का हौसला और समर्थन भी बढ़ता गया। आज उनकी सफलता से परिवार और मोहल्ले में खुशी का माहौल है।

सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढऩा चाहिए

ऋषिका राजधानी के एक फिटनेस सेंटर में कोच अशोक, जुगल, ओमप्रकाश, लविश और शेखर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही हैं, जहां उन्हें नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। पढ़ाई और खेल को साथ लेकर चलना उनके लिए आसान नहीं रहा। पढ़ाई पर असर भी पड़ा, लेकिन उन्होंने मेहनत जारी रखी और अब राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतकर अपनी मेहनत का परिणाम हासिल किया। ऋषिका का सपना है कि वह एक दिन भारत का प्रतिनिधित्व करें और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए मेडल जीते। उनका कहना है कि लड़कियों को अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढऩा चाहिए।