
शक में कर दी गर्लफ्रेंड की हत्या, फिर इलाहाबाद जाकर बन गया साधु और देने लगा ऐसे उपदेश
रायपुर. छत्तीसगढ़ में एक ऐसा मामला सामने जहां एक प्रेमी ने पांच साल पहले अपनी प्रेमिका पर शक कर उसे मौत के घाट उतार दिया। फिर फरार होकर इलाहाबाद जाकर साधु बन गया और लोगों को भागवत कथा में धर्मोपदेश देने लगा। आखिरकार साधुवेशधारी सुशील शुक्ला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
यह मामला भिलाई इलाके का है। एएसपी पांडेय ने बताया कि रामनगर गायंत्री मंदिर वार्ड-13 में एक युवती का 10 दिन पुरानी शव मिला था। शव डी-कंपोज हो गया था। विवेचना में मृतिका की शिनाख्त कोरिया बैकुंठपुर की रीता साहू के रूप में हुई। भिलाई में वह एक एनजीओ में काम करती थी। सुशील ऑटो चलाता था। उसकी ऑटो में राती कई बार आई गई। यहीं से दोनों एक दूसरे के करीब आ गए। पुलिस ने युवती के शव का पंचनामा कर अज्ञात के खिलाफ हत्या का अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की। पास पड़ोस के लोगों ने क्लू दिया था कि सुशील शुक्ला नामक का एक व्यक्ति इस युवती के साथ रहता था। पुलिस ने उसके परिजनों से पूछताछ की, लेकिन आरोपी का कोई सुराग नहीं मिला। आखिरकार पुलिस ने फाइल बंद की दी।
एसएसपी डॉ. संजीव शुक्ला ने पुराने लंबित मामलों की समीक्षा की। जिसमें यह मामला भी सामने आया। उन्होंने अज्ञात के नाम दर्ज हत्या की इस फाइल को री-ओपन कराया। वैशाली नगर चौकी प्रभारी राजेन्द्र कंवर ने उन्हें बताया कि आरोपी सुशील के इलाहाबाद में साधु बनकर रहने की सूचना मिली है। इस पर एसएसपी ने विशेषज्ञ से आरोपी के स्कैच फोटो बनवाया। एक फोटो दाढ़ी में बनवाया और दूसरी फोटो बिना दाढ़ी में। फिर आरक्षक गगन सिंह को फोटो का मिलान कराने इलाहाबाद भेजा। वहां साधुओं ने स्कैच देखकर कन्फर्म तो किया पर वे उसका सही ठिकाना नहीं बता पा रहे थे। सुधाओं ने कहा कि संत है एक जगह रहते नहीं। आरक्षक इलाहाबाद से लौट आया।
चौकी प्रभारी राजेंद्र सिंह कंवर ने सुशील के परिजनों को बुलकर पूछताछ की। सुशील के पिता श्याम दुबे मौर्या टाकीज में गेट कीपर का काम करते है। वह भी उसके बारे में कुछ भी बताने से साफ इनकार कर दिया। उसकी पत्नी से जब पुछताछ की तो उसने साधु बनने की बात से ही मुकर गई। वह अपना नम्बर देने से भी कतराने लगी। तब पुलिस का शक उस पर गहराते गया। प्रभारी राजेन्द्र का एक दोस्त रायपुर में रहता है, जो सुशील का रिश्तेदार है। उसने आरोपी के साधु होने की पुख्ता जानकारी दी।
सुशील के दो मोबाइल नंबर का लोकेशन छतरपुर में ग्राम नेवरा का मिला। तब चौकी प्रभारी राजेन्द्र सिंह ने तत्काल छतरपुर के चौकी प्रभारी से संपर्क किया। उनके लिए एक अच्छी बात यह रही कि राजेन्द्र सिंह का मित्र उपनिरीक्षक राजेन्द्र पाठक वहीं पदस्थ है। उसने पाठक को भागवत कथा में भेजा। वहां से पाठक ने सुशील की फोटो खींचकर राजेंद्रसिंह को वाट्सऐप किया। फोटो का स्केच फोटो से मिलान कराया गया। फोटो एक सामान मिला। तब सीएसपी श्याम सुंदर शर्मा ने पुलिस टीम गठित कर छतरपुर के लिए रवाना किया।
पुलिस ने बताया कि आरोपी रीता के चरित्र पर शक करने लगा था। रीता के किसी दूसरे पुरुषों से बात करना उसे अच्छा नहीं लगता। एक दिन उसने रीता को एक युवक से हंस-हंस कर बात करते देख लिया। इसी बात पर दोनों में झगड़ा हो गया। आरोपी ने रीता का बाल पकडक़र तीन चार बार दीवार पर जोर -जोर से टक्कर मार दी। लहूलुहान रीता नीचे गिर पड़ी और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। आरोपी वहां से फिर भाग निकला।
सीएसपी ने बताया कि हत्या के बाद सुशील भिलाई से फरार होकर ट्रक पर हेल्फरी करने लगा। उसी दौरान उसकी मुलाकात इलाहाबाद संगम तट पर साधुओं से हुई। वह वहीं पर रहने लगा। इलाहाबाद में साधुओं के साथ कुछ दिन रहने के बाद वह कुछ संतों के साथ आयोध्या चला गया। अयोध्या में उसने महंत रामगोपाल महाराराज से दीक्षा ली। दीक्षा लेकर वह फिर इलाहाबाद में आकर साधुओं की संगत में रहते हुए उनकी सेवा करने लगा। संतों के साथ वह भागवत कथा में हरिद्वारा, ऋषिकेश, दिल्ली, मथुरा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र जाने लगा। उसने इलाहाबाद से अपनी आईडी, एपिक कार्ड, आयकर विभाग की आइडी भी बनवा लिया।
सीएसपी ने बताया कि इलाबाबाद में कुछ साधुओं ने उसके हाथ में रीता नाम का गोदना देखा तो आपत्ति की। तब उसने रीता का गोदना मिटवाकर सीता-राम लिखवा लिया। श्रीहनुमानदास महाराज की आईडी भी बनवा लिया। इसके बाद खुद इसी नाम से अलग-अलग प्रदेश में जाकर भागवत करने लगा। भागवत कर जनता को उपदेश देने लगा। लोग उसका पैर छूकर सेवा सत्कार करने लगे।
Published on:
07 Dec 2018 11:34 am

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