रायपुर

जनता ने कहा- न्यूनतम बैलेंस पर ग्राहक देता है पेनल्टी, तो एटीएम खाली होने पर बैंक भी दे जुर्माना

क्यों ना एटीएम में कैश नहीं होने पर बैंकों को ग्राहकों के खाते पर जुर्माना भरना चाहिए।

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Apr 25, 2018

रायपुर . बैंक खातों में न्यूनतम बैलेंस नहीं होने पर जिस तरह प्रबंधन द्वारा बिना बताएं ग्राहकों के खाते से राशि वसूल की जा रही है । उसी तरह क्यों ना एटीएम में कैश नहीं होने पर बैंकों को ग्राहकों के खाते पर जुर्माना भरना चाहिए। शहर में यह बहस छिड़ चुकी है। 15 दिनों से एटीएम में कैश की किल्लत के बाद ग्राहक परेशान हो चुके हैं । वहीं हर तरफ से यह मांग उठ रही है कि आखिरकार जुर्माना भरने के लिए आम ग्राहक ही क्यों है, क्यो ना बैंक भी इस नियम का पालन करें।

आखिरकार बैंक प्रबंधन की गलती से ग्राहकों को परेशानी हो रही है, लेकिन इसकी जिम्मेदारी उठाने के लिए कोई नहीं है। राजधानी में बीते दो हफ्ते से एटीएम में नो-कैश की स्थिति है। अभी भी शहर के 60 से लेकर 70 फीसदी एटीएम में कैश नहीं है । जिसकी वजह से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय स्टेट बैंक ने अप्रैल से नवंबर-2017 तक न्यूनतम बैलेंस न रखने वाले ग्राहकों पर पेनाल्टी लगाकर 1771 करोड़ रुपए की कमाई की है।

ग्राहकों के खाते में मोबाइल और आधार का लिंक होने के बाद भी ग्राहकों को मिनिमम बैलेंस का खेल नजर नहीं आ रहा है। मिनिमम बैलेंस के जरिए कटने वाली राशि की जानकारी मोबाइल पर नहीं आ रही है। स्टेटमेंट निकालने पर पता चल रहा है कि ग्राहकों के खाते से विभिन्न शुल्क के जरिए हर महीने 100 से 500 रुपए की राशि की चपत लग रही है।

एसबीआई की मूल शाखा में कैश जमा करने के बजाय दूसरी शाखा में जमा करने पर ग्राहकों को ५९ रुपए का अतिरिक्त शुल्क वसूल किया जा रहा है। हर बार यह राशि ग्राहकों के खाते से कट रही है।

2. 24 घंटे के बजाय 2 से 3 दिन में हो रहा चेक क्लियरेंस।

राजधानी के कारोबारी गौरव ने बताया उनके बैंक खाते में न्यूनतम बैलेंस नहीं होने पर एचडीएफससी बैंक ने दो महीने 600 रुपए के हिसाब से कुल 1200 रुपए की राशि काटी है । वहीं बैंक से यह निर्देश मिला कि वे हर महीने अपना न्यूनतम बैलेंस 5000 रुपए अनिवार्य रूप से जमा रखें।

5. एसबीआई खुद के एटीएम से तब कोई शुल्क नहीं लगाएगा, जब तक खाते में 25,000 रुपये से अधिक बैलेंस होगा।


मालवीय रोड व्यापारी संघ महासचिव राजेश वासवानी ने कहा कि निश्चित तौर पर एटीएम में कैश नहीं होने पर बैंकों को जुर्माना भरना चाहिए। दूसरी बात यह है कि कैशलेस योजना में भारी-भरकम एमडीआर चार्जेंस की वजह से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।

संगठन मंत्री रविकांत जायसवाल ने कहा कि संगठन के जरिए भी हम इस मुद्दे को उठाना चाहते हैं कि जब ग्राहकों को रुपए की जरूरत पड़ती है तो एटीएम में कैश नहीं होता है। इस पर बैंकों को जिम्मेदारी उठानी चाहिए।

एसबीआइ डीजीएम ब्रम्ह सिंह ने बताया कि मिनिमम बैलेंस नहीं होने पर आरबीआई के नियमों के मुताबिक ग्राहकों के खाते से राशि काटी जाती है, लेकिन एटीएम में कैश नहीं होने पर ग्राहकों को इसके बदले किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति देने का नियम नहीं है।

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Published on:
25 Apr 2018 12:31 pm

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