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CG New Criminal Law: छत्तीसगढ़ में अब जो जाएगा जेल, उसे हर हाल में करना होगा ये काम

CG New Criminal Law: अपराध विवेचना पूरी तरह से डिजिटल की जाएगी। पत्नी द्वारा पति के विरुद्ध रेप का अपराध अब पत्नी के नाबालिग होने पर ही माना जाएगा।

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CG New Criminal Law

CG New Criminal Law: जुलाई से देश में लागू होने वाले नए कानूनों को लेकर रायपुर पुलिस की ओर से एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इसमें जिले के विवेचकों को प्रशिक्षण दिया गया। सेमिनार में आईजी अमरेश मिश्रा, एसएसपी संतोष सिंह और रविवि के विधि विभाग के सहायक प्राध्यापक प्रिया राव शामिल हुईं।

इस मौके पर आईजी मिश्रा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय न्याय संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि ये तीनों कानून आपराधिक न्यायप्रणाली को एक मजबूत, आधुनिक और वैज्ञानिक आधार प्रदान करेगा। साथ ही विवेचना में पारदर्शिता को बढ़ावा, तकनीकी व फॉरेसिंक उपकरणों की मदद से यह जांच बेहतर होगा। उन्होंने बताया कि समय-सीमा में ट्रायल की प्रक्रिया पूरी होगी।

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इस दौरान एसएसपी सिंह बताया कि पुराना कानून दंडात्मक प्रकृति का था। नए कानून की प्रकृति न्याय है। इसमें विवेचना और न्यायालयीन कार्रवाई में अनावश्यक देरी को समाप्त करके पीड़ित को जल्द से जल्द न्याय मिल सके। नए कानून में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष महत्व दिया गया है। इसके लिए अलग से अध्याय रखा गया है।

पुराने कानून में अपराधियों के जेल जाने का प्रावधान था, लेकिन नए कानून में अपराधियों से सामुदायिक सेवा कराए जाने के प्रावधान जोड़े गए हैं। पहले जो राजद्रोह कहलाता था, उसे अब देशद्रोह बताया गया है। लोगों के वाणी की स्वतंत्रता के अधिकार में वृद्धि की गई है।

देश के खिलाफ अपराध किए जाने पर देशद्रोह का अपराध माना जाएगा। सात वर्ष और उससे अधिक सजा संबधी अपराधो में अपराध पंजीबद्ध होने के बाद पुलिस विवेचना के दौरान घटनास्थल, गवाही का कथन की वीडियोग्राफी, एफएसएल निरीक्षण व रिपोर्ट लेकर संलग्न करना अनिवार्य किया गया है। अपराध विवेचना पूरी तरह से डिजिटल की जाएगी। पत्नी द्वारा पति के विरुद्ध रेप का अपराध अब पत्नी के नाबालिग होने पर ही माना जाएगा।

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CG New Criminal Law: ट्रायल का समय तय

नए कानूनों में न केवल पुलिस बल्कि न्यायालयीन कार्य की समय सीमा भी निर्धारित की गई है। इससे मामलों के निराकरण में देरी होती थी। अब इसे दूर करने के लिए समय तय कर दिया गया है। विवि विशेषज्ञ प्रिया राव का कहना है कि नए कानून में महिलाओं और बच्चों के साथ हुए अत्याचार को पहला स्थान दिया गया है।