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राजापड़ाव क्षेत्र के आदिवासी परिवारों के ईसाई धर्म अपनाने से क्षेत्र में भारी नाराजगी

अशांति फैलाने वालों को आदिवासी समाज कभी बर्दाश्त नहीं करेगा

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राजापड़ाव क्षेत्र के आदिवासी परिवारों के ईसाई धर्म अपनाने से क्षेत्र में भारी नाराजगी

राजापड़ाव क्षेत्र के आदिवासी परिवारों के ईसाई धर्म अपनाने से क्षेत्र में भारी नाराजगी

मैनपुर। गरियाबंद जिले के विकासखंड मैनपुर राजापड़ाव क्षेत्र के 12 पाली 65 गांव के सैकड़ों लोगों ने सर्व आदिवासी समाज राजापड़ाव क्षेत्र के मुखिया दलसू राम मरकाम, जनपद सभापति घनश्याम मरकाम के नेतृत्व में रविवार को पेंड्रा गांव में बैठक आयोजित की। जिसमें आदिवासी परिवारों को बहला-फुसलाकर धर्मांतरण कराने वाले लोगों के खिलाफ विरोध जताया गया। समाजजनों ने कहा कि आदिवासियों की अपनी संस्कृति, पूजा पद्धति, रहन-सहन, खान-पान, आचार-विचार, पारंपरिक व्यवस्था है। साथ ही देवी-देवताओं के प्रति आस्था अनादिकाल से है।
बैठक में उपस्थित समाज के मुखियाओं ने कहा कि जानबूझकर आदिवासी समुदाय के अस्तित्व को मिटाने के लिए कुछ वर्षों से क्षेत्र में भोले-भाले गरीब आदिवासियों को बहला-फुसलाकर धर्मांतरण कराने वाले लोगों ने इस क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं। जिनके द्वारा आदिवासियों को शिक्षा, स्वास्थ्य व आर्थिक सहयोग का लालच देकर जबरदस्ती ईसाई धर्म अपनाने के लिए बड़ी चालाकी से षड्यंत्र कर रहे हैं। जिस कारण क्षेत्र के बहुत सारे परिवार ईसाई धर्म अपनाते हुए अपने पुरखौती पारंपरिक व्यवस्था, रीति रिवाज, पूजा पद्धति को नकारते हुए ईसाई धर्म के नियमों के आधार पर चलने के लिए मजबूर हैं। जिस कारण परिवार में ही लड़ाई, झगड़ा, मारपीट होने लगा है। शांत वातावरण वाला इलाके में लगातार अशांति फैल रही है, जिसको आदिवासी समाज कभी बर्दाश्त नहीं करेगा।
न्याय संगत कार्यवाही करने के लिए आदिवासी समाज रणनीति बनायेगी ऐसा सर्व आदिवासी समाज राजा पडाव क्षेत्र के मुखिया दलसू राम मरकाम ने अपने संबोधन में कही है। बैठक को संबोधित करते हुए जनपद सभापति एवं आदिवासी नेता घनश्याम मरकाम ने कहा कि हमारे धर्म संस्कृति पर प्रहार करने वाले भोले-भाले आदिवासियों को बहला-फुसलाकर के ईसाई धर्म अपनाने के लिए षड्यंत्र करने वालों को कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आर्थिक सहयोग व इलाज के नाम पर अपने धर्म को प्रचार-प्रसार करने के लिए क्षेत्र में लोग सक्रिय हैं। समय रहते इस पर अंकुश लगाना जरूरी होगा। अन्यथा हमारी धमर्, संस्कृति पर खतरा मंडराना स्वभाविक है।

ये निर्णय लिए गए
आदिवासी परिवारों में कहीं किसी को जन्म-मरण या अन्य कार्यों पर आर्थिक सहयोग किए जाने के लिए प्रत्येक परिवार से 10 रुपए सहयोग राशि जमा की जाएगी, जो जरूरतमंद के लिए काम आएगी। अपने धर्म संस्कृति को त्याग कर धर्मांतरण करने वाले लोगों को समझाइश देते हुए मूल धर्म में आने के लिए प्रेरित किया जाएगा। न्याय संगत कार्रवाई के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से संवाद किया जावेगा।


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