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युवा पत्रकारों का भविष्य गर्त में! पत्रकारिता विश्वविद्यालय का हाल बेहाल

CG News: भरपूर फंड के बावजूद बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा विश्वविद्यालय प्रशासन। विवि के कुलसचिव भी इसी परिसर में निवास करते हैं, उसके बाद भी आज तक इन बुनियादी समस्याओं का निराकरण नहीं हो पाया है।

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file photo

CG News: कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय (Kushabhau Thackeray University of Journalism and Mass Communication) के विद्यार्थी अव्यवस्थाओं से जूझ रहे हैं। भाठागांव से 6 किमी दूर काठाडीह में स्थित इस पत्रकारिता विश्वविद्यालय में छात्रों को हो रही परेशानियों की शिकायत पत्रिका टीम को मिली।

टीम ने पड़ताल में पाया कि यहां छात्रों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं ही नदारद है। पूरे परिसर में जंगली पेड़-पौधे उग आए हैं। ऐसा लग रहा है, मानों घने जंगल के बीच यूनिवर्सिटी (KTUJM University Raipur) स्थित हो। पीने के पानी के लिए बच्चे तरस रहे हैं, वहीं गंदे टेबल, कुर्सी में उन्हें बैठना पड़ रहा है, क्योंकि इनकी सफाई तक नहीं हो रही है। खेल के लिए बना मैदान जंगल बन गया है। गाड़ियों की पार्किंग भी अव्यवस्थित है।

7 करोड़ के ऑडिटोरियम में दरारें
विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन के पीछे बने ऑडिटोरियम की उद्घाटन होने के पहले ही दीवार दरक गई है। निर्माण कार्य अब तक पूरा नहीं हुआ है, ऐसे में अभी से दीवार में आई दरार से कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। वहीं आसपास जंगल उग आए हैं।

कचरे में विद्यार्थियों की मेहनत
‘पत्रिका’ की टीम जब यहां पहुंची तो देखा कि विद्यार्थीं जो प्रोजेक्ट फाइल आदि बनाते हैं, वह कचरे में पड़ा हुआ था। एक पेपर तो पेड़ पर लटका हुआ था। ऐसा लग रहा था जैसे फेंकते वक्त वह पेड़ पर ही लटक गया हो। विद्यार्थियों की मेहनत को पत्रकारिता विवि में रखने के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है।

जंगल में हॉस्टल, बाथरूम में लाइट नहीं
विद्यार्थियों के रहने के लिए परिसर के अंदर ही हॉस्टल बनाया गया है। पत्रिका की टीम जब पड़ताल करने पहुंची, तो देखा यहां हॉस्टल के चारों तरफ जंगल उग आया है। भवन से बड़े पेड़ पौधों से हॉस्टल घिरा हुआ है। यहां की खिड़कियों का कांच भी टूटा हुआ है, जिससे जीव जंतुओं के कमरे में प्रवेश करने का डर बना हुआ रहता है। यहां के बाथरूम में लाइट तक नहीं जलती है।

वाटर कूलर खराब
विभागों में विद्यार्थियों के लिए पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है। यहां लगाए गए वाटर कूलर और आरओ सालों से खराब पड़े हैं। न इन्हें बनाया जा रहा है, न ही इन्हें बदला जा रहा है। हर विभाग में छात्र और छात्राओं के लिए अलग-अलग बाथरूम बना है, हर विभाग का बाथरूम बेहाल है।

गार्डन और मैदान बना जंगल
विश्वविद्यालय में प्रवेश द्वार के बांए तरफ गार्डन बना है। वहीं दाएं तरफ खेल मैदान है। न गार्डन का रखरखाव हो रहा है, न ही मैदान की साफ-सफाई हो रही है। आलम यह है कि गार्डन और मैदान दोनों में 6 से 8 फीट के जंगली घास और पौधे उग आए हैं। दूर-दूर तक मैदान नहीं केवल जंगल दिखाई देता है। यही हाल पूरे विवि परिसर का है। विद्यार्थियों ने बताया कि पिछले तीन साल से कोई भी खेल प्रतियोगिता या एनुअल स्पोर्ट्स नहीं हुआ है।

करोड़ों रुपए के जनरेटर खराब
विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपए खर्च कर 3 जनरे़टर लगाए गए हैं, ताकि जरूरत में उपयोग किया जा सके, लेकिन सभी सालों से खराब हैं। इनका मेंटेनेंस भी नहीं किया जा रहा है। प्रवेश गेट पर लाखों खर्च बनाया गया फव्वारा भी सालों से बंद है।

सभी समस्याओं पर विवि के कुलसचिव आनंदशंकर बहादुर ने कहा कि हॉस्टल के आसपास पिछले 2 महीने से लगातार सफाई कराई गई है। इस महीेने ही सफाई नहीं हुई है। उस एरिया में बहुत जल्दी जंगली पेड़ पौधे उग जाते हैं। कक्षाओं में भी साफ-सफाई होती है। मैदान के लिए प्रक्रिया की जा रही है। बाकी जानकारी के लिए विश्वविद्यालय पधारें।