करीब आठ वर्षों तक गाइडलाइन दरों में कोई बदलाव नहीं होने के कारण बाजार मूल्य और गाइडलाइन मूल्य के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया था। इसी अंतर को समाप्त करने के उद्देश्य से शासन द्वारा वैज्ञानिक पद्धति से दरों का युक्तिसंगत पुनर्संयोजन किया गया। इसमें जिलों की भौगोलिक स्थिति, शहरी-ग्रामीण संरचना, सड़क संपर्क, बसाहट तथा आर्थिक गतिविधियों में आए बदलावों को ध्यान में रखा गया है।