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भाजी के राजा ‘बोहार भाजी

हमर खान-पान

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भाजी के राजा 'बोहार भाजी

भाजी के राजा 'बोहार भाजी

छत्तीसगढ़ म अलग-अलग मउसम म 100 ले जादा किसम के भाजी मिलथे। जेमा 50 ले जादा किसम के भाजी ह बिना पइसा के यानि फोकट के घर के कोलाबारी, घास भुइंया, खेत-खार, रद्दा के तीरे-तीर अउ जंगल म मिल जथे।
पालक, मेथी, चौलाई, सरसो अइसन साग हे जउन ल हमन अपन बारी म लगाथन या बजार ले बिसा के खाथन। भाजी, हरा पत्ता वाले सागमन अइसन होथय, जेकर इस्तेमाल कोनो बेमारी ल ठीक करे बर या अपन सुवास्थ ल बने राखे बर होथे।
ये हरा पत्तेदार भाजीमन म जम्मो परकार के पोसक तत्व जइसे परोटीन, विटामिन ए., बी, सी आदि पाय जाथय। कारबोहाइड्रेट, कैल्सियम, फास्फोरस आयरन आदि घलो परचुर मात्र म पाय जाथे। जेकर ले मनखेमन ह सुवस्थ रहिथें। अमारी भाजी, चेंच भाजी, तिंवरा भाजी, चना भाजी, लाल, खेंडहा भाजी, गोंदली भाजी, बोहार भाजी, मुसकेनी भाजी अउ 100 किसम के भाजी छत्तीसगढ़ के संस्करीति म रचे-बसे हे।
फेर सब्बो भाजीमन म 'बोहार भाजीÓ ल भाजीमन के राजा माने गे हे। काबर कि ऐहा अड़बड़ सुवादिस्ट अउ जायकेदार भाजी आय। ये भाजी ह अब्बड़ मुस्कुल म बड़ किम्मत म थोरिक दिन बर बछर म एक-दू पइत मिलथे। बोहार के बड़का रूख रहिथे जउन ह जंगल अउ बगीचा म पाय जाथे। ऐकर फर ल लेसवा कहिथें। तेकर अथान डारे जाथे। लेसवा के कच्चा फर के भीतर गोंद जइसन चिक्कन मीठ रस रहिथे। कच्चा लेसवा के सब्जी घलो बनाथे। बोहार ह फूल अउ कली के गुच्छा आय।
बोहार भाजी ल दही या मही अउ संग म चना या मूंग दार के संग जब रांधे जाथे त वोकर सुवाद ह बड़े-बड़े पकवान ल घलो मात दे देथे। बसंत रितु म बोहार के रुख म फूल लगे बर सुरू होथे। बोहार के कोंवर पत्ता ल पीस के खाय से पतला दस्त बंद होके पाचन तंत्र म सुधार होथे। ऐकर फर के काढ़ा पिये ले छाती म जमे सूक्खा कफ टघल के खांसी के साथ बाहिर निकल जाथे। ऐकर फर म एंटीऑक्सीडेंट पाय जाथे। त्वचा के सुंदरता अउ सुवास्थ बर अब्बड़ लाभकारी हावय। ऐकर फर मधुर, कसइला, सीतल, बिसनासक, किरमी नासक, पाचक, मूतरल अउ जम्मो परकार के सूल पीरा ल दूर करइया होथे।