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छत्तीसगढ़ी म तीन महाकाव्य लिखइया

महाकवि कपिलनाथ कस्यप

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छत्तीसगढ़ी म तीन महाकाव्य लिखइया

छत्तीसगढ़ी म तीन महाकाव्य लिखइया

कपिलनाथ कस्यप छत्तीसगढ़ी के अव्वल दरजा के कवि आय। जेकर साहित्य छत्तीसगढ़ी भासा के साहित्य भंडार के अन्नपूरना कोठी कस हे। कस्यपजी छत्तीसगढ़ी म तीनठन महाकाव्य सिरी राम कथा, सिरी किरिस्न कथा अउ सिरी महाभारत गरंथ लिख के अमर हो गे हे। उनकर साहित्य रचना म छत्तीसगढ़ के माटी के महमही हावय, सुन्दराई हे।
उन पौना (अकलतरा-जांजगीर) गांव म 6 मार्च 1906 म एक किसान के घर म जनम लेइन। गांव के भुइंया म खेलिन-कूदिन, पढिऩ अपन बड़े भाई हीरालाल कस्यपजी के छांव म रहिके पराथमिक कक्छा के पढ़ई पूरा करके बिलासपुर सहर म आके आगू के पढ़ई करिन। वोकर बाद 9वीं कक्छा ले अपन पढ़ई तीरिथ परयागराज म सिका पाइन। बछर 1931 म इलाहाबाद के इर्विन क्रिस्चियन कालेज ले स्नातक के परीक्छा पास करिन।
साहित्य के लगाव तो अपन बिद्यारथी जीवन ले ही रहिस। अपन नौकरी म समे निकाल के हिंदी साहित्य के छोटे-बड़े खंड काव्य, गीत, नाटक के रचना करत रहिन। हिंदी के रचना म ‘वैदेही विछोह’ बछर 1968 म उनकर पहिली परकासित रचना आय जउन परयास परकासन के सहयोग ले छपे हावय।
35 बछर पहिली लिखिस ‘महाकाव्य’
सिरी राम कथा महाकाव्य ल मानस चतुरस्ती सताब्दी समारोह समिति बछर 1974 म छपवाइस जउन ह मध्यपरदेस साहित्य परिसद ले बछर 1975 म लोक साहित्य के ‘ईसुरी पुरस्कार’ ले सम्मानित करे गिस। कस्यपजी जब रचना करत रहिन वो समे परचार-परसार के आज असन साधन नइ रिहिस। जेकर सेती लोगनमन उनकर साहित्य के गरिमा ल नइ जान पाइन। उन ‘स्वान्त: सुखाय’ रचना करत रिहिन। आज ले 30-35 बछर पहिली उन सिरी रामकथा, सिरी किरिस्न कथा अउ महाभारत, सिरीमद भगवत गीता, जइसे पोथी पुरान ल छत्तीसगढ़ी भासा म लिख के गरंथ के रूप दे दिस। ये काम ह एकठन तपस्या हे। समंदर मंथन के जइसे कठिन काम आय।