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देश में पहली बार छत्तीसगढ़ सरकार करवाएगी 6 लाख बच्चों का नेत्र परीक्षण

आज बाल दिवस से होगी बाल नेत्र सुरक्षा सप्ताह की शुरुआत, जांच के साथ 30 हजार बच्चों को चश्में बांटने का लक्ष्य

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देश में पहली बार छत्तीसगढ़ सरकार करवाएगी 6 लाख बच्चों का नेत्र परीक्षण

देश में पहली बार छत्तीसगढ़ सरकार करवाएगी 6 लाख बच्चों का नेत्र परीक्षण

रायपुर. पहली बार छत्तीसगढ़ सरकार प्रदेश में विशेष अभियान चलाकर ६ लाख बच्चों को नेत्र परीक्षण कराने जा रही है। यहां देश का एेसा पहला प्रोजेक्ट होगा, जो पूरी तरह से सिर्फ बच्चों के नेत्र परीक्षण पर केंद्रित है। इस अभियान की शुरुआत 14 नवम्बर बाल दिवस से होगी। स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रदेश के सभी 27 जिलों में 6 से 15 वर्ष के बच्चों की नेत्र जांच करेगी। बाल नेत्र सुरक्षा कार्यक्रम के तहत टीमें 15 से 20 नवंबर तक रोजाना स्कूलों, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी शिविर लगाकर जांच की सुविधा मुहैया कराएगी।
इस योजना के तहत नेत्र परीक्षण होगा, दृष्टिदोष पाए जाने वाले बच्चों को चश्मा वितरित किया जाएगा। अगर किसी बच्चे में गंभीर बीमारी पहचानी जाती है, तो उसे हायर सेंटर रेफर किया जाएगा, ताकि संपूर्ण जांच व मुफ्त उपचार हो सके। जानकारी के तहत बुधवार को डब्ल्यूआरएस कॉलोनी स्थित केंद्रीय विद्यालय में बच्चों की जांच की गई। जिसमें 150 के करीब बच्चों में दृष्टि दोष मिला है।


सात फीसद बच्चों में दृष्टिदोष होता है
आंकड़ों के मुताबिक 100 में से सात बच्चे यानी सात फीसद में दृष्टिदोष पाया जाता है। यह जन्मजात या अनुवांशिक हो सकता है। वहीं जन्म के बाद बराबर मात्रा में पोषण आहार न मिलना भी दृष्टिदोष की वजह हो सकती है।
मानसिक रोग के शिकार मिले छात्र
जांच में यह बात सामने आई कि आंखों का इलाज सही समय पर नहीं होने के कारण बच्चे मानसिक रोग का शिकार भी हो जाते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक कई बच्चें आंखों की परेशानी बता नहीं पाते हैं। इस वजह से लगातार पढ़ाई में पिछड़ते चले जाते हैं और कुंठा का शिकार हो जाते हैं। इस समस्या को खत्म करने के लिए विभाग शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दे रहा है, ताकि वे छात्रों की आंख संबंधी बीमारियां का आसान तरीके से पता लगा सकें।
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इन योजनाओं पर भी दें ध्यान-


राष्ट्रीय स्वास्थ्य बाल कार्यक्रम-

यह केंद्र सरकार की योजना है। इसके तहत बच्चों की संपूर्ण जांच का लक्ष्य होता है। इसके लिए नेत्ररोग, त्वचा रोग, कान-नाक-गला रोग, मेडिसीन के डॉक्टरों की संयुक्त टीम होती है। इसकी नियमित जांच सही तरीके से नहीं हो पाती है। इससे सही समय में बच्चों की बीमारी का पता नहीं चल पाता है।
अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम

इसके तहत सिर्फ आंखों की जांच कर चश्में का नंबर दिया जाता है। आंखों की शेष बीमारियां की जांच छूट जाती हैं। इसके लिए समय-समय पर शिविर लगाएं जाते हैं, लेकिन सभी बच्चों तक पहुंचना संभव नहीं हो पाता है। लगातार मॉनीटरिंग नहीं होने से भी योजना पर असर पड़ रहा है।
छात्रावासों व आश्रमों में नियमित जांच

दूरदस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों के एसटी-एससी छात्रावास और आश्रमों के बच्चों की नियमित जांच की योजना है। डॉक्टरों की कमी के कारण नियमित जांच नहीं हो पाती है। इससे खासकर लड़कियों में खून की कमी हो जाती है, जो कई बीमारियों को जन्म देती है।
मुफ्त साइकिल वितरण-

प्रदेश में स्कूली छात्राओं के लिए सरस्वती साइकिल वितरण योजना संचालित है। नौवीं कक्षा में प्रवेश के दौरान एसटी-एससी और गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले छात्राओं को मुफ्त साइकिल दी जाती है। इसके लिए ७० करोड़ रुपए का बजट है, लेकिन साइकिल की खरीदी नहीं हो सकी है।
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अंधत्व निवारण कार्यक्रम राज्य नोडल अधिकारी डॉ. सुभाष मिश्रा ने बताया कि अगर हम आंख की बीमारी की कम उम्र में ही पहचान कर लेते हैं तो बच्चे भविष्य में होने वाली परेशानियों से बच सकते हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भी यही है।

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