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Rajya utsav 2022: सरकार ने बढ़ाई राज्योत्सव की तारीख, अब इस दिन तक होगा मेले का आयोजन

Rajyautsav 2022: रायपुर के साइंस कॉलेज आयोजित हो रहे इस भव्य कार्यक्रम में शामिल होने आज झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन उपस्थित हुए. बता दें कि सीएम सोरेन के मुख्य आतिथ्य और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में समापन समारोह संपन्न होने वाला था पर अब इस कार्यक्रम को रविवार तक कर दिया गया है.

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Rajya utsav 2022: रायपुर में आयोजित राज्योत्सव का आज समापन होने वाला था पर जनता का उत्साह देखते हुए. सरकार ने राज्योत्सव को को तीन दिन और जारी रखने का आदेश दे दिया है.यानि मेला, प्रदर्शनी और फ़ूडजोन 6 नवम्बर तक कर दिया गया है. रायपुर के साइंस कॉलेज आयोजित हो रहे इस भव्य कार्यक्रम में शामिल होने आज झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी उपस्थित हैं. बता दें कि सीएम सोरेन के मुख्य आतिथ्य और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में समापन समारोह संपन्न होने वाला था पर अब इस कार्यक्रम को रविवार तक कर दिया गया है.

गेड़ी, भंवरा, बिल्लस और पिट्टूल का जलवा
रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव(National Tribal Dance Festival 2022)परिसर के तीसरे दिन युवा पारंपरिक खेल गेड़ी, बिल्लस, भंवरा, पिट्टूल खेलते भी दिखे. वे इस खेल को बड़े उत्साह से खेलते हुए रोमांचित हो रहे थे. अन्य प्रदेश से आए लोक कलाकार व महोत्सव देखने आए लोग भी बड़े रुचि से इन खेलों का खेलने का प्रयास किए. साइंस कॉलेज के बीएससी द्वितीय वर्ष में अध्ययनरत अमित देवांगन, राखी, संजना और राजेश ने भी गेड़ी में संतुलन बनाते हुए चलने का प्रयास किया. वही, अन्य युवाओं ने भी भंवरा, बिल्लस और पिट्टूल पर अपना हाथ आजमाया. महोत्सव परिसर में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा छत्तीसगढ़िया ओलंपिक परिसर में पारंपरिक खेलों की जानकारी एवं खेलने के लिए सुविधा प्रदान कर रही है.

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इस वर्ष पूरे राज्य में छत्तीसगढ़िया ओलंपिक का आयोजन किया है. इस आयोजन से छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है. अन्य राज्यों से आए कलाकारों और महोत्सव देखने आए लोगों ने राज्य सरकार द्वारा आयोजित किए जा रहे छत्तीसगढ़िया ओलंपिक की सराहना की. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के पारंपरिक खेलों को बढ़ावा मिलेगा और आने वाली पीढ़ी भी इन पारंपरिक खेलों खेलों के प्रति रुचि लेगी.