
ऑनलाइन छंद सिखाकर पिता के सपने को कर रहे पूरा, जानें ये जरूरी बातें
रायपुर. राज्य बने 18 साल हो चुके हैं। छत्तीसगढ़ी को बढ़ावा देने के मकसद से छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग का गठन किया गया। इसके अलावा पं. रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी और कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि में छत्तीसगढ़ी से संबंधित कोर्सेस हैं। आज छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस है।
इस मौके पर हम कुछ ऐसे लोगों से रूबरू करवा रहे हैं जो छत्तीसगढ़ी को समृद्ध बनाने की दिशा में कुछ खास कर रहे हैं। बीते दिनों सिटी में आयोजित एक साहित्यक कार्यक्रम में शिरकत करने आए अरुण निगम और डॉ. शकुंतला शर्मा ने बताया कि वे छत्तीसगढ़ी में कुछ नया कर रहे हैं।
डॉ. अमरोही संविधान को छत्तीसगढ़ी में लिख रहे
छत्तीसगढ़ी के जानकार डॉ. गितेश अमरोही हमेशा कुछ नया करते रहते हैं। इसी कड़ी में उन्होंने भारतीय संविधान को छत्तीसगढ़ी में लिखने का बीड़ा उठाया है। वे कहते हैं कि हर किसी को संविधान की जानकारी होनी चाहिए। छत्तीसगढ़ी में संविधान लिखने से हो सकता है इसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए और छात्र जीवन से ही पढऩे से संविधान की जानकारी मिलनी शुरू हो जाए। यही सोचकर मैंने शुरुआत कर दी है। इस काम को मैं काफी सतर्क होकर कर रहा हूं, ताकि कोई त्रुटि न हो।
वाट्सऐप ग्रुप बनाया, एक सत्र में 10 स्टूडेंट्स
अरुण निगम स्टेट बैंक के रिटायर्ड अधिकारी हैं। वे इन दिनों दुर्ग में रहते हैं। साहित्य उन्हें विरासत में मिला है। पिता कोदूराम दलित जनकवि थे। उन्होंने अपनी किताब 'सियानी गोठÓ में छत्तीसगढ़ी छंद पर चिंता जताई थी। इस बात का उनके पुत्र अरुण निगम पर गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने ठान लिया कि पिता के सपने को पूरा करेंगे और 'छंद के छÓ किताब लिख डाली। अरुण ने पिछले ढाई वर्षों से वाट्सऐप ग्रुप चला रहे हैं। इसमें वे राज्य के साहित्यकारों को ऑनलाइन ट्रेनिंग दे रहे हैं। इसमें गुरु-शिष्य परंपरा चल रही है। जो लोग सीख रहे हैं वे दूसरों को सिखा रहे हैं। एक सत्र में सिर्फ 10 स्टूडेंट रहते हैं। अभी उनका सातवां सत्र चल रहा है। पहला सत्र मई 2016 को शुरू हुआ था। इसी वर्ष मई में सातवें सत्र की शुरुआत हुई है। बाबूजी की इच्छा को पूरा कर रहा हूं।
चाणक्य नीति का छत्तीसगढ़ी में किया अनुवाद
हिंदी, संस्कृत और छत्तीसगढ़ी में रचनाएं लिखने वाली शकुंतला शर्मा की अब तक सत्रह किताबें छप चुकी हैं। जल्द ही छत्तीसगढ़ी छंद की एक किताब प्रकाशित हो रही है। भिलाई की कवयित्री शकुंतला शर्मा ने चाणक्य नीति का छत्तीसगढ़ी अनुवाद किया है। वे बताती हैं कि कविता की शुरुआत बचपन से ही हो गई। जब मैं अ अनार का भी नहीं जानती थी। मेरी नानी रंभा देवी तिवारी ने मुझे सिखाया कि कविता की रचना किस तरह होती है। जब मैं तीन-चार बरस की थी, तो नानी कविता की पहली लाइन बोलती थीं और फिर दूसरी पंक्ति मेरे लिए होती थी जिसे मुझे पूरा करना होता था।
Published on:
28 Nov 2018 05:09 pm
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