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कोरोना से ऐसे बच रहे हैं शहर के थानेदार, किसी ने बाल जीरो करवाए, तो कोई बाहर टांग रहे हैं वर्दी

किसी ने अपने बाल जीरो करवा लिए हैं, तो कोई अपनी वर्दी घर के भीतर नहीं ले जा रहा है। धुलने के बाद ही भीतर ले जा रहे हैं। दरअसल थाना प्रभारियों की ड्यूटी रोज फील्ड में कई लोगों से मिलने-जुलने और कार्रवाई करने में लगी है।

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कोरोना से ऐसे बच रहे हैं शहर के थानेदार, किसी ने बाल जीरो करवाए, तो कोई बाहर टांग रहे हैं वर्दी

कोरोना से ऐसे बच रहे हैं शहर के थानेदार, किसी ने बाल जीरो करवाए, तो कोई बाहर टांग रहे हैं वर्दी

रायपुर. कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाले पुलिस वाले स्वयं को सुरक्षित रखने के कई तरीके अपना रहे हैं। किसी ने अपने बाल जीरो करवा लिए हैं, तो कोई अपनी वर्दी घर के भीतर नहीं ले जा रहा है। धुलने के बाद ही भीतर ले जा रहे हैं। दरअसल थाना प्रभारियों की ड्यूटी रोज फील्ड में कई लोगों से मिलने-जुलने और कार्रवाई करने में लगी है। उनके साथ अन्य स्टॉफ भी होते हैं। भीड़ में रहने से कोरोना संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है। एेसे में अपनी सुरक्षा के लिए हर संभव उपाय कर रहे हैं। ड्यूटी से घर जाते समय पूरी सावधानी बरत रहे हैं।

जीरो कट करवा लिए सिर के बाल

कोराना संक्रमण से बचने के लिए मौदहापारा टीआई यदुमणि सिदार, टिकरापारा टीआई याकूब मेमन और गोलबाजार टीआई अल्बर्ट कुजूर ने अपने सिर के बाल जीरो कट करवा लिया है। हालांकि पुलिस विभाग में सिर के बाल छोटे ही रखते हैं, लेकिन तीनों टीआई ने कुछ दिन पहले ही कोराना वायरस के संक्रमण से बचने अपने-अपने बाल जीरो स्टाइल में करवा लिया। इसके पीछे तर्क है कि बड़े बाल में कोरोना वायरस अधिक समय तक रहता है।

बरामदे में ही टांग रहे हैं वर्दी

पुलिस वालों के लिए वर्दी उनका मान-सम्मान होती है, लेकिन कोरोना संक्रमण ने इससे भी दूरी बना दी है। मौदहापारा टीआई सिदार ड्यूटी से घर जाने पर अपनी वर्दी बरामदे में ही रखते हैं। भीतर नहीं ले जाते हैं। वर्दी बाहर ही धुलती है। इसके बाद भीतर ले जाते हैं। इसके अलावा जूते-मौजे भी बाहर ही रख रहे हैं। और नहाने के बाद ही घर में प्रवेश करते हैं।

सैनिटाइज होने के बाद ही घर में प्रवेश

टिकरापारा टीआई याकूब मेमन और गोलबाजार टीआई अल्बर्ट कुजूर भी ड्यूटी खत्म होने के बाद घर जाते हैं, तो पहले खुद को सैनिटाइज करते हैं। वर्दी और अन्य चीजों को बाहर ही रखते हैं। नहाने के बाद ही घर में प्रवेश कर रहे हैं। साथ ही बार-बार घर जाना कम कर दिए हैं। अब एक ही समय घर जा रहे हैं। इसी तरह आमानाका टीआई भरत लाल बरेठ भी सप्ताह में एक बार अपने घर जाते हैं। थाने में ही रहते हैं। घर वालों की याद आने पर वीडियो कॉन्फ्रेसिंग कर लेते हैं।
आरक्षक से लेकर अफसर तक को खतरा

अस्पतालों में ड्यूटी करने वाले डॉक्टर और नर्सों को वायरस से संक्रमित होने का जितना खतरा रहता है, उसी तरह का खतरा पुलिस वालों को भी रहता है। दिनभर कई स्थानों पर जाना, लोगों से बातचीत करना, भीड़भाड़ में जाना आदि काम के दौरान संक्रमण की चपेट में आने की आशंका पुलिस वालों को ज्यादा रहती है। इसलिए आरक्षक से लेकर पुलिस अफसरों को अलर्ट रहने कहा गया है।