
Coronavirus
रायपुर . राजधानी के वृंदावन बीएसयूपी ब्लॉक-5 सड्डू में गुरुवार को कोरोना संक्रमित युवक पाए जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उसके पत्नी, बच्चे समेत 20 लोगों के सैंपल लेकर आरटी-पीसीआर से जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेज दिया है। उसके नजदीकियों को क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया है। उस क्षेत्र में घर-घर जाकर सर्वे के लिए तीन सदस्यीय 27 टीमें गठित की गई है। टीम में एक एनएम और दो मितानिन शामिल हैं।
युवक कैसे संक्रमित हुआ, इसकी जांच की जा रही है। युवक नूरानी चौक स्थित समोसा दुकान में काम करता था। इसके अलावा वह शराब खरीदने शराब दुकान भी रोजाना जाता था। युवक वृंदावन बीएसयूपी ब्लॉक-5 के फस्र्ट फ्लोर पर रहता था। विगत 4 दिनों पहले थर्ड फ्लोर पर शिफ्ट हुआ था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पत्नी की तबीयत खराब होने पर तीन दिन पहले जांच के लिए युवक आंबेडकर अस्पताल आया था। उसे भी सर्दी-खांसी की शिकायत थी, जिसके बाद युवक को कोविड-19 वार्ड में भर्ती कर डॉक्टरों ने सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा दिया था। गुरुवार शाम रिपोर्ट आने पर युवक पॉजिटिव पाया गया। उसे माना सिविल अस्पताल में भर्ती किया गया है। युवक शराब का आदी था और वह शराब खरीदने के लिए शहर के दुकान पर भी गया था। स्वास्थ्य विभाग की टीम युवक से पूछताछ कर कॉन्ट्रेक्ट हिस्ट्री तलाशने में जुटी हुई है।
शहर के कई जगहों पर गया है युवक
यूनानी चौक स्थित चाय-समोसा के ठेले पर कोरोना संक्रमित युवक काम करता था। विगत तीन दिनों पहले दुकान से वह 20 समोसे लेकर गया था, लेकिन बेच नहीं पाया। ठेला मालिक ने उसे नौकरी से निकाल दिया, तो वह बेरोजगार हो गया था।
युवक के नजदीकी 20 लोगों का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया है। टीम भी सर्वे काम में जुट गई है। युवक के कॉन्टेक्ट हिस्ट्री का अभी तक पता नहीं चल पाया है, पूछताछ की जा रही है। युवक को टीवी की भी बीमारी है।
डॉ. मीरा बघेल, सीएमएचओ, रायपुर
एम्स में स्क्रीनिंग से लेकर डिस्चार्ज तक की होती है रिकॉर्डिंग
राजधानी के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में कोरोना संक्रमित मरीज की स्क्रीनिंग से लेकर डिस्चार्ज तक की रिकॉर्डिंग होती है। आयुष बिल्डिंग के तीनों फ्लोर पर 17 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। एम्स के अधीक्षक डॉ. करन पीपरे का कहना है कि कानूनी पेंच से बचने के लिए रिकॉर्डिंग जरूरी होती है। कोई मरीज कभी भी झूठा आरोप लगाकर कोर्ट की शरण में जा सकता है। उन्होंने बताया कि आयुष बिल्डिंग में हेल्प डेस्क बनाया गया है, जहां पर मरीज का विस्तृत डिलेट लिया जाता है।
इसके बाद मरीज को स्क्रीनिंग वार्ड में भेजा जाता है, जहां पर डॉक्टर शरीर का तापमान देखते हैं। मरीज में यदि कोरोना वायरस का थोड़ा भी लक्षण दिखता है, तो उसका सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाता है। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उसे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया जाता है और नेगेटिव आने पर उसे घर भेज दिया जाता है। आइसोलेशन वार्ड में भी सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं।
Published on:
22 May 2020 11:18 pm
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
