एम्स रायपुर में कोरोना वायरस के मरीजों के लिए बनाए गए आइसोलेशन वार्ड में तैनात डॉक्टर और कर्मचारियों के घर जाने पर प्रबंधन ने सुरक्षा के मद्देनजर रोक लगा दी है। इनके लिए अस्पताल में ही रहने की व्यवस्था की गई है। प्रबंधन का कहना है कि 15 दिनों के लिए ड्यूटी लगाई गई है। आइसोलेशन वार्ड में डॉक्टर और स्टॉफ सीधे मरीज के संपर्क में रहेंगे। बार-बार घर जाने पर परिजनों में संक्रमण होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
रायपुर. कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों की जांच व भर्ती करने के लिए आयुष बिल्डिंग में 24 बिस्तरों का आइसोलेशन वार्ड बनाया गया है। यहां पर 15 एसआर, सीनियर रेजीडेंट, 20 जेआर जूनियर रेजीडेंट और 25 नर्सिंग आफिसर्स की ड्यूटी लगाई गई है। सभी की तीन शिफ्ट में ड्यूटी लगाई गई है। 15 दिनों बाद इनकी जगह दूसरे डॉक्टर व कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी। आइसोलेशन वार्ड में तैनात रहने वाले डॉक्टर व कर्मचारियों को रहनेए खाने-पीने, सोने आदि की व्यवस्था डी ब्लॉक के थर्ड फ्लोर पर नवनिर्मित प्राइवेट वार्ड में किया गया है।
सभी को दिया गया विशेष कीट
कोरोना वायरस से लडऩे में दिन-रात डॉक्टर और नर्सिंग स्टॉफ की टीम टक्कर ले रही है। आइसोलेशन वार्ड में डॉक्टर सीधे मरीज के संपर्क में हैं। एम्स प्रबंधन ने सभी को सुरक्षा के मद्देनजर विशेष किट प्रदान किया हैए जिसे पर्सनल प्रोटेक्टिंग इक्यूपमेंट कहा जाता है। इसमें बड़े गाउन, जूतों के कवर, आंखों के कवर, दस्ताने, कैप आदि शामिल है।
एम्स को स्वास्थ्य विभाग ने 4 डॉक्टर समेत 16 स्टॉफ दिए
कोरोना वायरस के संक्रमण के रोकथाम, नियंत्रण एवं आपातकालीन स्थिति से निपटने में एम्स प्रबध्ंान अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इसी के मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने एम्स को 4 डॉक्टर समेत 16 स्टॉफ उपलब्ध कराए हैं। डॉ. पंकज किशोर मिश्रा, डॉ. दिव्या पाल, डॉ. प्रितिलता श्रीवास्तव, डॉ. ओमप्रकाश टंडन, एक बीपीएम,1 जेएसए,8 स्टॉफ नर्स, एक सहायक ग्रेड-1 और एक सहायक ग्रेड-& कर्मचारी की ड्यूटी एम्स में लगाई गई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गत दिनों एम्स के डायरेक्टर डॉ. नितिम एम नागरकर को डॉक्टर व कर्मचारी देने का आश्वासन दिया था। इसी के तारतम्य में डॉक्टर व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
ये होगा फायदा
डॉ. करन पीपरे अधीक्षक, एम्स रायपुर ने बताया कि 15 दिनों के लिए आइसोलेशन वार्ड में तैनात डॉक्टर व स्टॉफ के रहने की व्यवस्था अस्पताल में ही की गई है। आइसोलेशन वार्ड में तैनात डॉक्टर सीधे मरीज के संपर्क में रहेंगे, जिससे परिजनों को खतरा होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। जांच व स्क्रीनिंग के बाद घर जाने की अनुमति दी जाएगी।