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जितेंद्र दहिया/रायपुर. छत्तीसगढ़ दवा निगम में किया गया करोड़ों रुपए का गोलमाल सामने आया है। निगम ने निविदा में खरीदे गए उपकरण का स्पेशिफिकेशन (विशिष्ट तकनीकी मानक) न लिखकर 6 हजार के उपकरण की खरीदी ढ़ाई लाख में की गई। इस संबंध में पत्रिका ने पड़ताल की तो विभाग ने उपकरण का तकनीकी मानक एचडीएमआइ पोर्ट विथ कनेक्टिंग पीसी तय किया था।
खुले बाजार में यही जर्मन मेड विशिष्ट तकनीकी मानक वाला उपकरण मात्र छह हजार रुपए में उपलब्ध है। इस टेंडर प्रकिया के लिए सीजीएमएससी ने एक कंपनी को लाभ दिलाने के लिए पूरा टेंडर डिजाइन किया। पत्रिका को मिले दस्तावेज बताते हैं कि बिलासपुर मेडिकल कॉलेज को सप्लाई किए गए माइक्रोस्कोप के बिल और सीजीएमएससी की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट है कि माइक्रोस्कोप विथ एचडीएमआइ पोर्ट की कीमत 2 लाख 10 हजार रुपए अलग जीएसटी लगाई गई है। सामान्यत: सीजीएमएससी अपनी निविदाओं में क्रय किए जाने वाले उपकरणों के विस्तृत स्पेशिफिकेशन निविदाओं में प्रसारित करता है। आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि आइटम कोड आयुष 43 के लिए ऐसा नही किया गया था।
6 मेडिकल कॉलेजों के लिए खरीदी
'पत्रिका' को मिले दस्तावेज बिलासपुर मेडिकल कॉलेज के लिए हुई खरीदी का पर्दाफाश करते हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक यह उपकरण सभी 6 मेडिकल कॉलेजों के लिए खरीदने की प्रक्रिया की जा रही है।
नहीं हो सका मोलभाव
सीजीएमएससी द्वारा निविदा की प्राप्त दरों पर मोलभाव नही किया गया। जबकि प्राप्त दरें अनुमानित कीमत से 110 प्रतिशत अधिक थी। इस सबंध में सीजीएमएससी प्रबंधन का कहना है कि फर्म को मोलभाव के लिए बुलाया गया था लेकिन फर्म ने मोलभाव करने से इनकार कर दिया।
विवादित कंपनी से हुई खरीदी
टेंडर प्रक्रिया में पांच कंपनियां शामिल हुई थी। लेकिन प्रबंधन ने भिलाई फर्म सी.बी. कार्पोरेशन को कांट्रेक्ट मेन्यूफ्रेक्चरर की विवादित शर्त के आधार पर टेंडर दे दिया गया। यह खरीदी एक ऐसी कंपनी से की गई है जो खुद उपकरण बनाती नहीं है। बल्कि दूसरी कंपनी से खरीद कर सप्लाई की गई है।
खुद तय किए गए दाम से दोगुना में खरीदी
छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम के अनुसार इएमडी अनुमानित मूल्य का 3 प्रतिशत होना चाहिए। उपकरण कोड आयुष 43 के अंतर्गत एचडीएमआइ पोर्ट के साथ माइक्रोस्कोप के लिए निविदा क्रमांक 53ई (पी)/सीजीएमएससी/ईक्यूपी/2017 दिनांक 15/06/2017 को प्रसारित की गई थी। जिसमें अर्नेस्ट मनी की राशि 3000 रुपए रखी गई थी। 3000 रुपए के मान से सीजीमएसएसी द्वारा माइक्रोस्कोप की अनुमानित कीमत लगभग 1 लाख रुपए आंकी गई थी।
टेंडर प्रक्रिया की जांच कराई जाएगी
सीजीएमएससी एमडी सर्वेश्वर नरेंद्र भूरे ने कहा, मामला मेरे कार्यकाल के पूर्व का है। फाइल मंगाई गई है। टेंडर प्रक्रिया की जांच कराई जाएगी।
Published on:
25 Jan 2019 03:03 pm

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