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छत्तीसगढ़ में ईंधन बचत के नए नियम लागू, मंत्रियों, निगम मंडल के अध्यक्षों और सरकारी कर्मचारियों के लिए गाइडलाइन जारी

Chhattisgarh Fuel Saving Rules: साय सरकार ने बड़ी पहल करते हुए मंत्रियों और निगम मंडल के अध्यक्षों और सरकारी अफसरों को सीमित संख्या में वाहन के इस्तेमाल के निर्देश जारी किए है..

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Chhattisgarh Flue saving new rules

छत्तीसगढ़ में ईंधन बचत के नियम लागू ( Photo - Patrika )

Chhattisgarh Fuel Saving Rules: छत्तीसगढ़ सरकार ने पेट्रोल डीजल के खर्चे को कम करने के लिए नई गाइडलाइन जारी किया है। इसके तहत मंत्रियों, निगम मंडल के अध्यक्षों और सरकारी कर्मचारियों को अब सीमित संख्या में वाहन के इस्तेमाल के निर्देश दिए है। बता दें कि ईंधन की कमी के चलते देश में हाहाकार मचा हुआ है। पीएम मोदी की अपील के बाद दिल्ली, उत्तरप्रदेश सहित कई राज्यों ने सरकारी वाहनों के खर्चे में कटौती कर दी हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी पीएम की अपील के बाद काफिले में वाहनों की संख्या को घटाया है।

Chhattisgarh Fuel Saving Rules: इन 8 नियमों का पालन करने के निर्देश

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वित्तीय संसाधनों के कुशल प्रबंधन और सार्वजनिक व्यय में अनुशासन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से वर्तमान में निम्नानुसार मितव्ययिता के उपायों को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया गया है।

  1. कारकेड में वाहनों का सीमित उपयोग- माननीय मुख्यमंत्रीजी / मंत्रीगण / समस्त निगम / मण्डल/आयोग के पदाधिकारियों के कारकेड वाहनों में केवल अत्यावश्यक वाहनों का ही उपयोग किया जाए एवं अन्य शासकीय संसाधनों का संयमित उपयोग सुनिश्चित किया जाए।
  2. इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहन- राज्य के समस्त शासकीय वाहनों को चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाए।
  3. वाहनों के उपयोग एवं ईंधन में मितव्ययिता- शासकीय वाहनों के उपयोग में पेट्रोल / डीजल के व्यय को न्यूनतम स्तर पर रखा जाए। एक ही गंतव्य की ओर जाने वाले विभागों के अधिकारियों के लिए वाहन पूलिंग की व्यवस्था लागू की जाए।
  4. विदेश यात्रा पर प्रतिबंध- अत्यंत अपरिहार्य परिस्थितियों को छोड़कर, राज्य शासन के व्यय पर शासकीय सेवकों के विदेश यात्राओं पर पूर्णतः प्रतिबंध रहेगा। अनिवार्य होने पर समन्वय में माननीय मुख्यमंत्री जी का पूर्वानुमोदन आवश्यक होगा।।
  5. वर्चुअल बैठकों एवं ऑनलाइन समीक्षा को प्रोत्साहन- विभागों को निर्देशित किया जाता है कि भौतिक बैठक यथासंभव माह में एक बार ही आयोजित की जावे। भौतिक रूप से बैठकों के आयोजन के स्थान पर वर्चुअल/ऑनलाइन मोड में होने वाली बैठकों को प्रोत्साहित किया जाए। विभागों की नियमित समीक्षा बैठकें अनिवार्य रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की जाएं।
  6. कार्यालय में ऊर्जा की बचत- कार्यालयीन समय के पश्चात सभी विद्युत उपकरणों (लाइट, पंखे, ए.सी., कंप्यूटर) को अनिवार्य रूप से बंद किया जाए। शासकीय भवनों में ऊर्जा की बर्बादी को रोकने हेतु आवश्यक उपाय किये जाये
  7. ई-ऑफिस एवं डिजिटल कार्यप्रणाली- बैठकों में प्रिंटेड पेपर/बुकलेट्स के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक फाइलों (.pdf/.ppt आदि) का उपयोग किया जाए। कार्यालयीन पत्राचार और नस्तियों का संचालन अनिवार्य रूप से e-Office के माध्यम से किया जाए ताकि कागज और स्टेशनरी व्यय में कटौती हो सके।
  8. IGOT कर्मयोगी पोर्टल एवं प्रशिक्षण- भौतिक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने के स्थान

ऐसा हैं खर्च का हिसाब

छत्तीसगढ़ अफसरों की लग्जरी गाड़ी में किराए के रूप में 75 हजार रुपए महीने तक की दर तय है। एक रिपोर्ट के अनुसार यह दर हर माल 2000 किलोमीटर के लिए दी जाती है। छत्तीसगढ़ में करीब 58 विभाग है। इनमें से लगभग सभी विभागों में तीन से चार गाड़ी किराए पर दौड़ रही है। छत्तीसगढ़ में 2000 किलोमीटर पर सबसे कम मासिक किराए 54 हजार रुपए तय है।

पत्रिका ने उठाई थी आवाज

ईंधन की बचत के लिए पत्रिका ने सवाल उठाया कि मंत्रियों ने अपने स्तर पहल की है लेकिन अभी तक प्रशासनिक मशीनरी अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। वहीं आज इस खबर का असर है। वित्त विभाग ने आदेश जारी कर सभी को ईंधन की बचत को कम करने के लिए इन 8 नियमों को पालन करने की अपील की है।

जितने विभाग, उतनी गाड़ी की परंपरा

छत्तीसगढ़ में जितने विभाग, उतनी गाड़ी की परंपरा चली आ रही है। सूत्रों का दावा है कि मंत्रियों और वरिष्ठ आईएएस के पास जितने विभाग है, वो उनके लिए गाडि़यों की व्यवस्था करते हैं। उनका भुगतान संबंधित विभाग की ओर से किया जाता है। हालांकि इसमें कुछ अधिकारी सभी विभाग से गाड़ी नहीं लेते हैं। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि एक मंत्री और अधिकारी के पास चार से पांच गाड़ी रहती है। ये काफिला से अलग होती है। इनका उपयोग अन्य लोगों के द्वारा किया जाता है।