
इन चार स्टूडेंट्स ने बनाया 'जननी' एेप जो प्रेग्नेंसी में ऐसे करता है मदद, जानें इसकी खासियत
ताबीर हुसैन @रायपुर. जिन प्रॉब्लम्स को हम देखते हैं या किसी माध्यम से पढ़ते-सुनते हैं, कहीं न कहीं दिमाग में क्लिक होता है कि इसका साल्युशन क्या होगा। मिलती-जुलती फील्ड वाले तो इस पर न सिर्फ रिसर्च करते हैं, बल्कि बेहतर ऑप्शन भी तलाश लेते हैं।
ऐसा ही कर दिखाया है एम्स रायपुर के दो छात्रों ने अपने इंजीनियरिंग कर रहे साथियों के साथ मिलकर। स्काई हैकाथॉन कॉम्पिटीशन में इस कैटेगरी में इसे फर्स्ट प्राइज चिप्स की ओर से डेढ़ लाख रुपए का चेक दिया गया। हमने इन छात्रों से 'जननी' ऐप की इजाद की कहानी विस्तार में जानी।
एम्स के छात्र प्रतीक ने बताया कि डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान अक्सर ऐसी स्थिति से वाकिफ होते रहे हैं जिसमें कई महिलाएं प्रेग्नेंसी की रेगुलर जांच नहीं करवाती और डिलीवरी के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके चलते उच्च मातृत्व व शिशु मृत्यु दर में बढ़ोतरी हो रही है। हमने इस प्रॉब्लम को सॉल्व करने का सोचा।
स्डटी से जाना कि हेल्थकेयर सिस्टम कैसे काम करता है। चूंकि हम डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे हैं इसलिए चिकित्सीय बातें तो समझ सकते थे, इंजीनियरिंंग की पढ़ाई कर रहे दोस्तों से बात की तो उन्होंने ऐप का आइडिया दिया। उनकी मदद से एक ऐप का प्रोटोटाइप बनाया जो वीमंस को प्रेग्नेंसी के दौरान अवेयर करेगा।
पढ़ाई का यूज बेहतर काम पर किया तो अच्छा लगा
स्वाति उत्तरकर कहती हैं कि रायपुर में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे साथियों ने हमें जब अपनी स्टडी के बारे में बताया तो हमने उनसे कहा कि कुछ समय सोचने के लिए दो। मेरी एक फ्रेंड जया से मैंने डिस्कस किया। जया ने कहा कि इस पर हम वर्क कर सकते हैं। हम दोनों ने स्टडी की और पाया कि इसे बनाना आसान है। हालांकि इसका बेनिफिट सही इंप्लीमेंट पर ही नजर आएगा।
जब सुना कि फर्स्ट प्राइज मिला है, खुशी से उछल पड़ी
जया कहती है कि हमने ऐप तो बनाया, लेकिन सोचा नहीं था कि हमें फस्र्ट प्राइज मिल जाएगा। रायपुर में एम्स में पढ़ रहे फ्रेंड्स ने काफी मेहनत की है। जबकि हमने तो इंजीनियरिंग की स्टडी के दौरान ऐप्स को लेकर काफी कुछ जान लिया था। ये जरूर है कि इस प्रोजेक्ट पर हम सभी ने दो महीने मेहनत की। घंटों वीडियो कॉलिंग कर आपस में डिस्कस किया करते थे। आम लोगों को फायदा मिले यही उम्मीद है।
टीकाकरण का ध्यान
साहना ने बताया, हमारा ऐप संस्थागत डिलीवरी को भी बढ़ावा देगा और बच्चे के टीकाकरण का भी ख्याल रखेगा। हमने अपने ऐप को यथासंभव सरल बनाने की कोशिश की ताकि यहां तक कि अशिक्षित महिलाएं आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकें। हम इसे जल्द ही छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रो में इम्पलीमेंट करने वाले हैं। यह ऐप एक ऐसे सॉफ्टवेयर मॉडल पर काम करेगा जिससे हाई रिस्क प्रेग्नेंसी का पता जल्दी हो जाएगा।
ये हैं टीम में शामिल
- प्रतीक गुडथे पाटिल : सेवंथ सेमेस्टर, एम्स रायपुर।
- साहना टी : फिफ्त सेमेस्टर, एम्स रायपुर।
- स्वाति उत्तरकर : फिफ्त सेमेस्टर, दयानंद सागर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग बैंगलोर।
- जया चंद्रिका : फिफ्त सेमेस्टर, दयानंद सागर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग बैंगलोर।
Updated on:
06 Sept 2018 07:47 pm
Published on:
06 Sept 2018 03:27 pm
बड़ी खबरें
View Allरायपुर
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
