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जनजाति संस्करीति : घोटुल माने विस्वविद्यालय

घोटुल ह मुरिया जनजातिमन के परमुख सामाजिक संस्था हरे। मेल-जोल के सबले बढिय़ा माध्यम हरे। जेकर माध्यम ले मुरिया जनजाति संगठित रहिथे अउ अपन संस्करीति, सभ्यता अउ संस्कार ले जुड़े रहिथे।

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जनजाति संस्करीति : घोटुल माने विस्वविद्यालय

जनजाति संस्करीति : घोटुल माने विस्वविद्यालय

छत्तीसगढ़ के बस्तर छेत्र अपन जनजातीय संस्करीति के सेती भारत के संगे-संग दुनिया भर म एक अलगे पहिचान रखथ। इहां के रहन-सहन, आचार-बिचार, संस्करीति, सभ्यता, परंपरा, संस्कार जहां लोगनमन बर अचरज के बात हे, त इहां के कतको नियम-धियम ह अबूझ पहेली घलो हे। जउन ल समझना वोतेक सरल नइहे जइसे हमन उपरे उपर समझे के कोसिस करथन। अइसने एक पहेली हरे ‘घोटुल’। जेला हमन सिरिफ परेम परसंग के जगा समझ जाथन।

घोटुल ह जनजातिमन म ‘युवा घर’ के परंपरा रहे हे। परजा जनजाति म धागा बक्सर, उरांव के धुम कुरिया, बिरहोर के गितिओना, भारिया के घसरवासा, भुइंया जनजाति के रंग-भंग, अबूझमाडिय़ा जनजाति के कोसीघोटुल अउ अइसने मुरिया,मारिया व गोंड़ जनजातिमन के ‘युवा घर’ ल घोटुल कहे जाथे। युवा घर घास-फूस ले बने एक झोपड़ी या मकान होथे जउन गांव के बीचोबीच या जंगल के तीर बनाय जाथे।
घोटुल के मायने : ऐकर सही नांव गोटुल हर। गोटुल के मायने होथे गोंगा जगा या बिद्या ठउर।
ऐहा गांव के बीच म बनाय जाथे। अब नामे से पता चलथे के घोटुल ह सिरिफ रास-रंग के ठउर नोहे, बल्कि ऐकर अउ कतको बने उद्देस्यय हे। जेकर माध्यम ले मुडिय़ा या मुरिया जनजाति के युवक (चेलिक) अउ युवती (मुटियारिन) मन ऐमा सामिल होके जिनगी जीये के मरम ल समझथें। ऐहा पारिवारिक, सामाजिक दायित्व ल समझे के मउका देथे जउन जिनगी म अब्बड़ काम देथे। घोटुल के जन्मदाता लिंगोपेन माने जाथे। जेहा जनजातिमन के मुख्य देवता हरे। घोटुल ल कुमार घर (गिरिह) घलो कहे जाथे। इहां सामाजिक, राजनीतिक अउ धारमिक जिनगी जीये के सिक्छा मिलथा। युवा गिरिह के माध्यम ले जनजाति समाज के युवक-युवतीमन सामाजिक रीति रिवाज अउ परंपरा ले जुड़े गियान ल सीखथे। अतकिच नइ, घोटुल के माध्यम ले वोमन अपन समाज के बढ़वार म घलो योगदान देथें। घोटुल के मुख्य निरत्यि मांदरी हरे, जेला पुरुसमन संचालन करथे।
घोटुल के नियम : बस्तर के घोटुल म 7 बरस ले 16 बरस उमर तक के टूरा-टूरीमन दाखिल ले सकथ। इहां अविवाहित टूरा-टूरीमनमन संझा बेरा इक_ा होथे अउ रात म घर वापस आथें। ऐेमन ल चेलिक (परेमी) अउ मुटियारिन (परेमिका) कहे जाथे। मानलो कोनो मुटियारिन ह घोटुल म कोनो चेलिक ले परेम करे ल लग जाथे त वोकर चेलिक के नांव पूछ करके वोकर संग बिहाव कराय जाथे। बिहाव के बाद दंपत्ती ल घोटुल म रहना मनाही रहिथे। फेर, घोटुल के मुखिया वो दंपत्ती ले ए बचन लेथे कि वोमन अपन संतान ल घोटुल म जरूर भेजही। घोटुल म दंड के नियम हे। जेकर पालन सबो सदस्यमन ल करना रहिथे। ऐमा सदस्यमन अपन ले बडक़ा सदस्यमन ल परनाम करथं,े जेला राम जुहार परथा कहे जाथे। ए संस्था म सरदार के पद सबले बड़े होथे। ऐकर चुनई आम सहमति ले करे जाथे।
घोटुल म चेलिकमन के मुखिया (सरदार पुरुस) ल सिरेदार अउ मुटियारिनमन के मुखिया (सरदार महिला) ल बेलोसा कहे जाथे। अक्सर घोटुल के संचालन विधुर या परित्यक्त लोगन ह करथे।
घोटुल के उद्देेस्य : ऐहा भोजन इक_ा करे खातिर एक महत्वपूरन आरिथिक संगठन हे। ऐहा युवक-युवतीमन ल सामाजिक अउ जिनगी संबधी कारज ल सही ढंग से करे के उदिम सिखाथे। ऐहा जादू अउ धरम ले संबंधित संस्कार, लोक परंपरा ल सीखे के ठउर हरे। जइसे वोमन ल भरोसा रहिथे कि सिकार म सफलता जरूर मिलही अउ युवक-युवतीमन के उत्पादन सक्ति म बढ़वार होही।
व्यवहारिक उद्देस्य : युवक युवत मन म सेवा भाव जगाना। सामाजिक सिक्छा देना। जीवन साथी के चयन करना।
घोटुल के परमुख परब : घोटुल म समे-समे म उत्सव, तिहार मनाय जाथे। जेमा नुनानारे दाना पंडुम, वेल पिज्जा, पारंद, नया खानी, हरेली, दीयारी, काडामारगा, कारा पंडुम, कोरता पंडुम, कोरे पंडुम, ईराऊ पंडुम, मरका पंडुम, प्रमुख हरे।


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