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छत्तीसगढ़ : परिवहन विभाग को कई शासकीय विभाग लगा रहे हैं चूना

- निजी परमिट की गाडिय़ों के हर माह कर रहे हैं लाखों रुपए का भुगतान .- कागजों में हो रहा है खुलेआम भुगतान, सिर्फ टैक्सी परमिट का ही करना है भुगतान .- देना पड़ता है रजिस्ट्रेशन व फिटनेस फीस इसलिए नहीं कराते टैक्सी पास .

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रायपुर। प्रदेश के शासकीय विभाग खुद परिवहन विभाग को हर साल करोड़ों का चूना लगा रहे हैं। इन विभागों में टैक्सी परमिट की जगह पर निजी वाहन अटैच किए हुए हैं। जबकि नियम से विभाग में लगने वाले चार पहिया वाहन टैक्सी में परमिट होना अनिवार्य है। नियम की जानकारी सभी जिला अधिकारियों को पहले से ही है। इसके बावजूद शासन के निर्देशों को ताक पर रखकर अधिकारियों ने निजी वाहन कार्यालय के उपयोग के लिए लगा रखे हैं।

आरटीआई से मिले दस्तावेज बताते हैं कि खुल जिला प्रशासन के प्रोटोकाल शाखा से 2015 से 2018 तक सैकड़ों निजी परमिट वाले वाहनों का उपयोग में लाया गया है। इसके अलावा पुलिस, विद्युत विभाग, रेल्वे में भी सैकड़ों वाहनों को भुगतान हर साल किया जा रहा है। जिसकी वजह से परिवहन विभाग को हर साल करोड़ों रुपए राजस्व की हानि हो रही है। जबकि टैक्सी में परमिट कराने के लिए लोगों को अधिक टैक्स जमा करना होता है। वहीं रजिस्ट्रेशन एवं फिटनेस की अलग से फीस जमा करनी होती है। निजी में परमिट कराने पर कम टैक्स लगता है, और आजीवन के लिए कोई झंझट नहीं रहता है।

शासन ने दिए है सख्त निर्देश
शासन ने 2012 से सभी विभागों में टैक्सी वाहन लगाने के लिए सख्त निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद भी जिले के आधा दर्जन विभागों में 100 से अधिक निजी वाहन लगा रखे हैं। अधिकारियों एवं वाहन मालिकों की साठगांठ के चलते निजी वाहनों को विभागों के कार्य के लिए लगाया गया है।

जमा करना पड़ता है शुल्क
यदि चार पहिया वाहन को टैक्सी में परमिट कराते हैं तो करीब गाड़ी की कीमत से करीब 8 से 9 प्रतिशत टैक्स जमा करना होता है। साथ ही रजिस्ट्रेशन फीस करीब 3 से 4 हजार रुपए, उसके उपरांत हर साल गाड़ी की फिटनेस करानी होती है। जिसमें करीब एक से डेढ़ हजार तक शुल्क जमा करना होता है।

अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने लगा रखे हैं अपने निजी वाहन
जिला के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने अपने भाई या रिश्तेदार के नाम से गाडिय़ां खरीद ली हैं, और अपने कार्यालय में ही गाडिय़ों को लगा रखा हैं। शासन वाहन लगाने पर 25 से 30 हजार रुपए प्रतिमाह भुगतान करता है। गाड़ी भी अधिकारी सामने रहती है, और देखरेख होती रहती है।

निजी वाहन से शासन को नहीं मिल पाता है राजस्व
शासन ने निजी वाहनों पर टैक्स बहुत कम रखा है। विभाग में लगाने के लिए टैक्सी वाहन होना अनिवार्य है। टैक्सी वाहन पर टैक्सी भी अधिक रहता है, और उसकी हर साल फिटनेस करानी होती है। इसी कारण लोग अपने वाहन को टैक्सी परमिट में पास करवाने से बचते हैं।
- शैलाभ साहू, आरटीओ, रायपुर