
भू-राजस्व संहिता में संशोधन पर मंत्री ने पेश की सफाई, कहा - आदिवासियों को इससे कोई नुकसान नहीं
रायपुर . भू-राजस्व संहिता में संशोधन पर आदिवासियों के विरोध को लेकर राजस्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडे ने सफाई पेश की। प्रेमप्रकाश ने बताया कि आदिवासियों की सहमति से ही राज्य या केन्द्र सरकार जमीन खरीदेगी। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि आपसी समझौते के जरिए आदिवासियों से खरीदी गई जमीन का उपयोग सिर्फ सरकारी कामों में किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासी खरीद सकता है यह सही नहीं है। मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने इन खबरों को पूरी तरह अफवाह करार देते हुए कांग्रेस पर हमला किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए आदिवासियों को भ्रमित करने का काम कर रही है।
एक सवाल के जवाब में प्रेमप्रकाश ने कहा कि आदिवासियों की जमीन को निजी हाथों में देने का सवाल ही पैदा नहीं होता। उन्होंने भूराजस्व संहिता में संशोधन की वजह बताते हुए कहा कि प्रदेश में नए प्रोजेक्टर आ रहे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में नई सड़कों का निर्माण हो रहा है या चौड़ीकरण किया जा रहा है इसके लिए भूमि की जरूरत पड़ रही है। एेसे में राज्य या केंद्र सरकार इन कामों के लिए आदिवासियों की सहमति से उनकी जमीन लेगी। इसके लिए उन पर किसी भी प्रकार का दबाव नहीं डाला जाएगा।
इसके अलावा मंत्री ने यह भी स्पस्ट किया कि आदिवासियों की जितनी भी जमीन सरकार लेगी उसे निजी हाथों में नहीं दिया जाएगा। उन्होंने भू-राजस्व संहिता में संशोधन को प्रदेश के आदिवासियों के लिए हितकारी बताया। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को जमीन के बाजार मूल्य से अतिरिक्त राजस्व भी दी जाएगी। भू-अर्जन के लिए आदिवासियों को लगभग तीन गुनी राशि दिए जाने का प्रावधान है।
मीडिया के एक सवाल का जवाब देते हुए प्रेमप्रकाश ने कहा कि बीजेपी में कोई विरोध नहीं है, यदि राम विचार नेताम जी विरोध कर रहे हैं, उनको भी मैं समझाना चाहूंगा। वहीं उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं है। एेसे में कांग्रेस राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए आदिवासियों को बरगलाने का काम कर रही है।
Updated on:
05 Jan 2018 10:04 am
Published on:
04 Jan 2018 03:01 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
