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ओपी नैयर पहले ऐसे संगीतकार थे जिनके पोस्टर छपा करते थे

फिल्म फेस्टिवल में सिंगर उद्भव ओझा की मास्टर क्लास

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ओपी नैयर पहले ऐसे संगीतकार थे जिनके पोस्टर छपा करते थे

रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में मास्टर क्लास लेते उद्भव ओझा।

ताबीर हुसैन @ रायपुर.न्यू सर्किट हाउस में चल रहे रायपुर फिल्म फेस्टिवल के पहले दिन उद्भव ओझा ने फिल्म संगीत की बदलती दुनिया 'कल आज और कल' पर मास्टर क्लास ली। ओझा ने 40 के दशक से संगीत की शुरुआत की और यूट्यूब सिंगर्स तक की कहानी को रोचक अंदाज में पेश किया। उन्होंने हर दौर के गाने बजाए और उसके संगीतकारों, धुन और गायकों के नाम के साथ प्रसंगों को बताया। सबसे पहले आएगा आने वाला... बजाया। बोले- मोनो साउंड और एक ही स्पीकर के बावजूद इतने रेयर और जीनियस गाने बनाना हर किसी की बस की बात नहीं। आवारा हूं...के जरिए बताया कि यह म्यूजिक का पहला स्टारडम सॉन्ग था। मोरा गोरा अंग गीत पर कहा कि इस गीत पर पीएचडी की जानी चाहिए कि कैसे लिखा और गाया गया। इसके बाद अलग-अलग दौर के गाने व संगीतकारों का जिक्र किया गया। ओझा ने बताया, ओपी नैयर पहले ऐसे संगीतकार थे जिनके पोस्टर छपा करते थे। ठीक ऐसे ही नदीम-श्रवण के होर्डिंग्स लगा करते थे।

आरडी बर्मन ने बदली हिंदुस्तानी संगीत की फिजा

70 के दशक में दम मारो दम में संगीत देकर आरडी बर्मन ने हिंदुस्तानी संगीत की फिजा बदल दी। ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे में नई टेक्निक यूज की गई। महबूबा गीत में बीयर के बोतल की एक विशेष आवाज के लिए 40 बोतलें तोडऩी पड़ी थीं। इसके बाद बप्पी लहरी का दौर आया जिसने इंडस्ट्री की काया ही पलट दी। हालंकि उन्होंने कई अच्छे गाने भी बनाए लेकिन उनको डिस्को सॉन्ग से ही पहचाना जाता है। टी सीरीज ने आशिकी एल्बम बनाया जिसे महेश भट्ट ने सुना तो उस पर फिल्म बनाना डिसाइड किया। स्टार तय नहीं थे, ऑडियो रिलीज करना था इसलिए हीरो-हीरोइन के चेहरे कोर्ट में छिपा दिए थे। बाद में राहुल राय और अनु अग्रवाल को कास्ट किया गया लेकिन पहले वाला पोस्टर ही हिट रहा।

रहमान के संगीत में कर्नाटक संगीत की खुशबू

एआर रहमान ऐसे संगीतकार हुए जिनकी म्यूजिक में वेस्टर्न और मॉर्डन टच तो रहता था लेकिन कर्नाटक संगीत की खुशबू हमेशा रिफलेक्ट होती। प्रयोगधर्मिता के मामले में पंचम दा के बाद रहमान का नाम ही आता है। उन्होंने भारतीय संगीत को इंटरनेशनल ऊंचाई दी।