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लालकिले के बाद छत्तीसगढ़ के एेतिहासिक सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर को गोद देने की तैयारी

केंद्र सरकार ने सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर को ताजमहल के साथ रखा ग्रीन सूची मे

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Laxman Temple Sirpur

आवेश तिवारी@रायपुर . केंद्र सरकार द्वारा महासमुंद जिले के सिरपुर में छठी शताब्दी में स्थापित किए गए लक्ष्मण मंदिर को भी इसी वर्ष किसी निजी कंपनी को गोद दे दिया जाएगा। केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय ने पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के साथ मिलकर ऐतिहासिक धरोहरों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए गोद देने की जो योजना शुरू की है, उसमें 2018 की सूची में सिरपुर को भी रखा है।

गौरतलब है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने सिरपुर को विश्व धरोहरों की सूची में शामिल करने के लिए डोजेयर भी तैयार कर रखा है। लेकिन एक दशक से जारी तमाम कोशिशों के बावजूद सिरपुर यूनेस्को की सूची में शामिल नहीं हो पाया है। गोद लेने वाली कंपनी को यह ठेका पांच वर्षों के लिए दिया जाएगा ।

सिरपुर के साथ गोद दी जायेगी एक और धरोहर : विश्वपटल पर बौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण तीर्थ कहे जाने वाले सिरपुर के लक्ष्मण मंदिर को गोद दिए जाने के लिए धरोहर मित्रों की तलाश शुरू कर दी गई है। सरकार ने सिरपुर को ग्रीन कोड वाली धरोहरों की सूची में रखा है। जो कंपनी सिरपुर को गोद लेगी, उसे ब्ल्यू और ऑरेंज कैटेगरी में रखे किसी एक धरोहर को भी गोद लेना होगा। सिरपुर को ग्वालियर के किले और पटना के कुम्राहार के साथ आठवें नंबर पर रखा गया है। सूत्रों कि माने तो सिरपुर के लिए अब तक किसी एजेंसी ने बोली नहीं लगाई है।

राजधानी रायपुर ? से लगभग 78 किमी दूर सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर पकी हुई लाल ईंटों से बने भारत के पहले कुछ एक मंदिरों में शामिल है। एएसआइ के मनोज कुर्मी कहते हैं कि ताजमहल से पुरानी इस धरोहर की तुलना अन्य किसी धरोहर से नहीं की जा सकती है। नागर शैली के मंदिर का निर्माण सोमवंशीय शासक महाशिवगुप्त बालार्जुन के समय उनकी मां वासाटा ने पति हर्षगुप्त के स्मृति में करवाया था। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। किन्तु गर्भगृह में शेषनाग पर बैठे हुए लक्ष्मणजी की मूर्ति है, इसलिए इसे लक्ष्मण मंदिर कहा जाता है। महानदी के तट पर स्थित सिरपुर का अतीत इस इलाके में अलग-अलग धर्मों के अनुयाइयों की रिहाइश का गवाह रहा है। इतिहासकारों के अनुसार छठी शताब्दी में चीनी यात्री व्हेनसांग भी यहां आया था।

केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने एएसआइ की धरोहरों को गोद लेने को लेकर नियमावली बनाई है। इसके अनुसार जो भी कंपनी सिरपुर को लेगी, उसे सीएसआर के जरिये आम पर्यटकों के लिए सभी सुविधाएं विकसित करनी होगी। इसमें कैफेटेरिया, सुगम मार्ग, साफ-सफाई, पेयजल की व्यवस्था, शौचालय इत्यादि का निर्माण शामिल है। कंपनी इसके एवज में टिकट लगा सकती है और धरोहर के आसपास विज्ञापन कर सकती है। 2017 में केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय ने पुरातत्व विभाग के साथ मिलकर एक योजना शुरू की, जिसका नाम था ‘अडॉप्ट अ हेरिटेज-अपनी धरोहर अपनी पहचान’ यानी अपनी किसी धरोहर को गोद लें।

भारतीय पुरातव सर्वेक्षण विभाग के डिप्टी सुपरिटेंडेट अर्कियोलाजिस्ट मनोज कुमी ने कहा कि गोद लेने से प्रबंधन बेहतर होगा क्योंकि कई बार हमारे पास मानव शक्ति कम होती है। जहां तक लक्ष्मण मंदिर का सवाल है, वह अपने आप में अद्भुत है। यह ताजमहल से प्राचीन धरोहर है।