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जानिए खूबसूरती के अलावा किन सवालों के जवाब देकर फेमिना मिस ग्रैंड इंडिया बनी रायपुर की शिवानी

फेमिना मिस इंडिया की फर्स्ट रनरअप से पत्रिका प्लस की खास बातचीत

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shivani jadhav

जानिए खूबसूरती के अलावा किन सवालों के जवाब देकर फेमिना मिस ग्रैंड इंडिया बनी रायपुर की शिवानी

ताबीर हुसैन @ रायपुर. ब्यूटी कॉम्पीटिशन में पार्टिसिपेट की पहली शर्त है खूबसूरत होना, लेकिन विनर्स बनने के लिए बाहरी सौंदर्य के साथ ही इंटरनल सुंदरता जरूरी है। यानी आप क्या सोचती हैं, सोचने और कहने का तरीका कैसा है यह भी कॉम्पीटिशन में बहुत मायने रखता है। फेमिना मिस इंडिया में शहर की शिवानी जाधव फस्र्ट रनरअप रहीं। उन्हें फेमिना मिस ग्रैंड इंडिया-2019 का खिताब दिया गया है। 40 दिन तक वे अलग-अलग राउंड और इंटरव्यू के बाद फिनाले में पहुंचीं। यहां शॉर्ट लिस्ट होकर टॉप 12 में उन्हें एंट्री मिली। इसके बाद टॉप 6 के लिए सलेक्ट हुईं। दोनों में क्वेश्चन-आंसर राउंड रहे। अब वे वेनुजुऐला में होने वाले मिस ग्रैंड इंटरनेशनल में इंडिया को रिप्रजेंट करेंगी। खिताब जीतने के बाद पत्रिका से विशेष बातचीत में शिवानी ने 40 दिनों की जर्नी को साझा किया। वे बताती हैं कि कई बार ऐसा लगा कि विनर बनना मुश्किल है, क्योंकि कॉम्पीटिशन बहुत टफ था। मैं खुद को समझाते रही, पुश करती रही और अपने बिलीव को जिंदा रखा। कुछ बड़ा हासिल करने के लिए खुद पर यकीन करना बेहद जरूरी है। शिवानी के पापा जीवन जाधव बिजनेसमैन हैं, मॉम नैना जाधव हाउसवाइफ। शिवानी ने अचीवमेंट का क्रेडिट पैरेंट्स को देते हुए कहा कि उनके बिना यहां तक पहुंचना पॉसिबल नहीं था। मालूम हो कि शिवानी सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और वे रायपुर में जॉब भी कर रहीं थीं।

वीमंस के लिए वल्र्ड में बिगेस्ट चैलेंज क्या है?

फिनाले में 12 गर्ल्स सलेक्ट हुईं थीं। जजेस ने अलग-अलग पार्टिसिपेंट्स से सवाल पूछे। मुझसे हुमा कुरैशी ने पूछा कि वीमंस के लिए वर्ल्ड में बिगेस्ट चैलेंज क्या है? मैंने कहा- हम जितने भी स्ट्रांग हों लेकिन हमें एक्सेप्टेंस नहीं मिलते। वीमंस जितनी भी पढ़ी लिखी हों, ताकतवार हों लोग रुकावट डालने का काम करते हैं।

आपके हिसाब से फेमेनिजम क्या है?

टॉप 6 में पहुंचने के बाद हमको हेडफोन पर गाना सुनाया गया। सभी के लिए कॉमन सवाल था कि आपके हिसाब से फेमेनिजम क्या है? मैंने कहा- जो राइट्स और अपॉच्र्युनिटी इतने वर्षों से ब्वॉयज एंजॉय कर रहे हैं वह हमें मिला नहीं, इसलिए हमने इसे क्रिएट किया था। फेमेनिजम का मतलब ये नहीं कि खुद को लड़कों से बेहतर समझें बल्कि हम बराबर हैं। बल्कि मैं यह कहूंगी कि फेमेनिजम लड़कों की जरूरत है जो उनके मॉम, सिस्टर या डॉटर को सपोर्ट करे। नेक्स्ट जनरेशन में काफी सुधार आएगा।

सपनों को जीयें

शिवानी ने कहा कि अगर आप ठान लें कि कुछ अलग करना है तो आप उस दिशा में बढ़ते जाएंगे। आपको ऐसे लोग मिलते चले जाते हैं जो में मंजिल तक पहुंचने में मदद करते हैं। मैं स्पेशली गल्र्स से यही कहूंगी कि अपने सपनों को जीएं। उन्हें मरने न दें। जो दिल में आए वहीं करें। पैरेंट्स को भी चाहिए कि वे अपने बच्चों के इंट्रेस्ट को तवज्जों दे।

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