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छत्तीसगढ़ राज्य बने के बाद छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य म नवाचार के उदीम

छत्तीसगढ़ी भासा ल अंतररास्टरीय स्तर म बढ़ावा दे के खातिर डिजिटलीकरन करे बर छत्तीसकोस एप परियोजना सुरू करे गे हे। ऐहा छत्तीसगढ़ी साहित्यकारमन के किताब आदि ल ई-संस्करन के रूप म निसुल्क परकासित करे के मंच घलो देथे।

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छत्तीसगढ़ राज्य बने के बाद छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य म नवाचार के उदीम

छत्तीसगढ़ राज्य बने के बाद छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य म नवाचार के उदीम

नवाचार अउ नवपरवरतन बिचार ह साहित्य के छेत्र म करे गे बदलाव ल बताथे। जिहां तक छत्तीसगढ़ी गद्य के सवाल हे, छत्तीसगढ़ राज्य बने के पहिली ले नवाचार के कईठन चिन्हारी ह ए डहर हमन ल देखे ल मिलथे। बछर 1960 -1970 के बछर के बीच म छत्तीसगढ़ सहकारी संघ बिलासपुर के मासिक पत्रिका ‘छत्तीसगढ़ सहकारी संदेस’ के परकासन सुरू होइस। जेमा पं. द्वारिका परसाद तिवारी ‘विप्र’ के धारावाहिक गोठ बात ‘चैतू बैसाखू के गोठ’ के सरलग परकासन होवत रिहिस। ए पत्रिका ह हर सेवा सहकारी समिति म गांव-गांव बगरे रहिस। ऐमा छत्तीसगढ़ी गद्य के सुघराई हर अबड़ अकन बाढि़स। फेर बेरा के पाछू धीरे-धीरे दैनिक समाचार पत्रमन म ‘कालम’ के सुरुआत घलो होवत गिस।

छत्तीसगढ़ राज्य बने के बाद छत्तीसगढ़ी गद्य म नवाचार के डांड म पहिली ले चले आत आकासवानी अउ दूरदरसन के उदिममन संहराए लाइक हें। छत्तीसगढ़ी भाखा म ब्लाग के सुुरुआत करइया म जयपरकास मानस के नाव आघू आथे। वोहा सबले पहिली छत्तीसगढ़ी के सुग्घर पत्रिका ‘लोकाक्छर’ ल आनलाइन करे के उदिम करिस। फेर, सिवसंकर सुक्ल के छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘दियना के अंजोर’, जे. आर. सोनी के उपन्यास चंद्रकला ल ब्लॉग के प्लेटफारम म रखे गिस। फेर ,परदेसीराम वरमा के छत्तीसगढ़ी उपन्यास ‘आवा’ ह ब्लॉग के माध्यम ले नेट के पढ़इयामन करा हबरिस।
बछर 2006 म सोसल नेटवर्क गूगल डहर ले संचालित ‘आरकुट’ (अब गुगल प्लस) के अब्बड़ जोर रहिस। ए बेरा अमेरिका म सोध करइया धमतरी के चेलिक युवराज गजपाल ह छत्तीसगढ़ी रचनामन ल वोमा संघराय के घात उदिम करिस। आरकुट के सिराती अउ फेसबुक के जनमती (2004) बेरा म हिंदी ब्लॉग म बढ़ोतरी घलो होय लागिस। एही बखत संजीव तिवारी ह अपन ब्लॉग ‘आरंभ’ म अउ संजीव त्रिपाठी ह अपन ब्लॉग ‘आवारा बंजारा’ म छत्तीसगढ़ी पोस्ट डारे के उदिम करिसस।
संजीव तिवारी अक्टूबर बछ्र 2008 ले ब्लॉग ‘गुरतुर गोठ’ के सुरुआत करिस। जेहा आज तक चलत हावे। सोसलमीडिया म 2011 म जयंत साहू के चारी चुगली अउ 2013 म सुसील भोले के मयारू माटी् ब्लॉग के भी अब्बर चरचा होथे। छत्तीसगढ़ी भासा म समाचार लिखने वाला परदेस के पहला वेबसाइट ‘गुरतुर गोठ’ 2007 म दूसर जयंत साहू के ‘अंजोर’् 2014 म सुुरू होइस। जेमा इनटरनेट म छत्तीसगढ़ी डाटा अपलोड करे जाथे। ए बीच छुटपुट छत्तीसगढ़ी ब्लॉग घलो बनिस। फेर वोमन नंदागे। कनाडा ले डॉ. युवराज गजपाल ह ‘पिरोहिल’ अउ ललित सरमा ह अपन खुद के छत्तीसगढ़ी रचनामन बर ‘अड़हा के गोठ’ नाव के एकठन ब्लॉग बनाइस। फेर, ऐहू ब्लाग ह सरलग नइ रह पाइस।
गुंडरदेही के संतोस चंदराकर ह छत्तीसगढ़ी भाखा म दूठन ब्लॉग बनाइस अउ रचनाकारमन के रचनामन ल परकासित करे के उदिम करिस। रायपुर के अनुभव सरमा गांव बंघी, दाढ़ी ले ईस्वर कुमार साहू मन ‘मया के गोठ’ ब्लॉग बनाइन।
बिलासपुर के डॉ. सोमनाथ यादव के ब्लॉग ‘सुहई’ जांजगीर के राजेश सिंह छत्री के ब्लॉग ‘मुस्कान’ म छत्तीसगढ़ रचना आवत रहिस। भोपाल के रविसंकर सिरीवास्तव ह अपन परसिद्ध ब्लॉग रचनाकार म छत्तीसगढ़ी रचना अउ किताब ल अपलोड करे हे।
छत्तीसगढ़ राज्य सिरजे के बाद दैनिक अखबारमन ह हफ्ता म एक पेज दे के सुरुआत करिन। कतको साप्ताहिक मासिक म कालम सुरू होइस। देसबंधु म मड़ई, पत्रिका म पहट, हरिभूमि म चौपाल जइसे खंभा ह कतको पढइया तियार करिस हे।
सोसल मीडिया म छत्तीसगढ़ी गद्य के परयोग के बाढ़ आ गे हे। आसीस सिंह ठाकुर के ब्लॉग ‘सुमिरौं छत्तीसगढ़’ म छत्तीसगढ़ी आलेख परकासित होवत रहिथे।

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