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सुर्खियों में ऐसे आया आईजीकेवी का यह स्टार्टअप

मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी ने किया था जिक्र

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सुर्खियों में ऐसे आया आईजीकेवी का यह स्टार्टअप

मन की बात का संसद टीवी में प्रसारण के दौरान की तस्वीर।

इंदिरा गांधी एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (आईजीकेवी) के इन्क्यूबेशन सेंटर का स्टार्टअप देशभर में उस वक्त सुर्खियों में आ गया जब मन की बात में प्रधानमंत्री ने उन्हें सराहा। पीएम मोदी ने 25 फरवरी को अपने मन की बात कार्यक्रम के दौरान कालाहांडी, ओडिशा के गोट बैंक की जमकर तारीख की थी। पीएम का कहना था कि कालाहांडी के गांव में बकरी पालन के चलते रोजगार के नए मौके सामने आ रहे हैं। पत्रिका से खास बातचीत में जयंती ने बताया कि हमारा सालान टर्नओवर लगभग 5 करोड़ रुपए है। हमारे लिए आईजीकेवी आर-एबीआई डोर ओपनर रहा है। हम उनके प्रति हमेशा कृतज्ञ रहेंगे। आर-एबीआई के सीईओ हुलास पाठक ने कहा कि हमारी पूरी कोशिश रहती है कि जो भी अपना आइडिया लेकर हमारे यहां आए, वह इसी तरह नाम रोशन करे।
न्यूज वाली गाडिय़ां आईं तो लगा रेड पड़ी है

जयंती ने बताया कि मन की बात का प्रसारण हो रहा था, तब मेरे पास लगातार फोन आने लगे। हमारी सोसायटी में कई न्यूज गाडिय़ां पहुंचने लगी। एक पल के लिए लगा कि कहीं रेड पड़ गई है। कुछ ही देर में सबको पता चल गया कि पीएम ने मन की बात में हमारा जिक्र किया है।

एमबीए डिग्री होल्डर, इसलिए चुना यह स्टार्टअप

जयंती ने बताया, हम दोनों ने एमबीए किया है। मैं बैंकिंग सेक्टर में जॉब करती थी। कालाहांडी इलाके में बहुत छोटे किसान रहते हैं। कई तो ऐसे जिनके पास जमीन तक नहीं। कई ऐसे जो लेबर के तौर पर दूसरे राज्यों में काम करने जाते हैं। कई बार देखा गया कि उन्हें बाहर काम नहीं मिलता और लौटने पर अपने क्षेत्र में भी। इसलिए वे सुसाइड का रास्ता अपनाते हैं। हमने तय किया कि बकरी बैंक के जरिए महिलाओं को स्वावलंबी बनाया जाए, ताकि वे सोर्स ऑफ लवलीहुड बन सके।

अगला कदम क्या होगा?

बीरेन ने बताया कि जिन इलाकों में हमारा काम चल रहा है हम वहां ऐसे लोगों को तीन महीने की ट्रेनिंग देकर पशु सेवा अधिकारी बना रहे हैं जो किसी वजह से हायर एजुकेशन हासिल नहीं कर पाए हैं। आगे हमारा इरादा है कि किसी यूनिवर्सिटी से टाइअप कर उन्हें डिप्लोमा या डिग्री दिलवाएं ताकि वे कहीं भी अप्लाई कर जॉब हासिल कर सकें।

ऐसे काम करता है बकरी बैंक

माणिकास्तु एग्रो बकरी बैंक ने किसानों के लिए एक पूरी व्यवस्था बनाई है और इसके जरिए किसानों को 24 महीने के लिए दो बकरियां दी जाती हैं। बकरियां दो साल में नौ से 10 बच्चों को जन्म देती हैं, जिनमें से 6 बच्चों को बैंक द्वारा रखा जाता है, बाकी उसी परिवार को दे दिया जाता है जो बकरियां पालता है। इतना ही नहीं, बकरियों की देखभाल के लिए जरूरी सेवाएं भी प्रदान की जाती हैं।

उद्भव कार्यक्रम का हिस्सा बने

आर-एबीआई के सीईओ हुलास पाठक ने कहा, 2020-2021 में इस दंपती ने हमारे उद्भव कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। हमारे इन्क्यूबेशन सेंटर में बिजनेस मॉडल डेवलपर के तहत गोट बैंक चलाने की बारीकियों का समझा व जाना। यहां से उन्हें फंडिंग भी प्राप्त हुई थी। चूंकि हमारा इन्क्यूबेशन सेंटर का क्राइटेरिया नेशनल है। देश के किसी भी कोने से लोग अपना आइडिया लेकर यहां आ सकते हैं।